HPV वैक्सीन के दुष्प्रभावों पर नई पुस्तक ने उठाए गंभीर सवाल
HPV वैक्सीन के दुष्प्रभावों का खुलासा
एक नई पुस्तक के अनुसार, वैक्सीन के छिपे हुए नुकसान सोशल मीडिया और एंटी-वैक्सीन समूहों के माध्यम से फैल सकते हैं, जिससे लोगों में हिचकिचाहट बढ़ सकती है। विशेष रूप से 2010 के ट्रायल विवाद के बाद। हालांकि, भारत में मुख्यधारा मीडिया और स्वास्थ्य विभाग इसे 'मिथ' बताते हुए वैक्सीनेशन का प्रचार जारी रखते हैं। यदि अमेरिका में हुए मुकदमे को ध्यान में रखा जाए, तो यह मुद्दा और अधिक सुर्खियों में आ सकता है, जिससे इसके प्रभाव में वृद्धि हो सकती है।
हाल ही में सोशल मीडिया पर महिलाओं के स्वास्थ्य से संबंधित एक पोस्ट काफी चर्चा में है। इसमें पीटर गोट्शे, एक प्रसिद्ध चिकित्सक और शोधकर्ता, ने 'हाउ मर्क एंड ड्रग रेगुलेटर्स हिड सीरियस हार्म्स ऑफ एचपीवी वैक्सीन' नामक पुस्तक का विश्लेषण किया है। इस पोस्ट में गोट्शे के दावों का उल्लेख किया गया है कि कैसे सर्वाइकल कैंसर को रोकने वाली वैक्सीन के दुष्प्रभावों को छिपाया गया है।
गोट्शे की पुस्तक में यह बताया गया है कि 'एचपीवी वैक्सीन' को 'जीवन रक्षक' बताकर बेचा गया, जबकि इसके ट्रायल में गंभीर कमियां थीं और नुकसान को छिपाया गया। गोट्शे का कहना है कि मर्क ने कई तरीकों से गार्डासिल के दुष्प्रभावों को छिपाया। अधिकांश ट्रायल में सही प्लेसिबो का उपयोग नहीं किया गया, बल्कि एल्यूमिनियम एडजुवेंट या अन्य वैक्सीन को 'प्लेसिबो' के रूप में प्रस्तुत किया गया। ये दोनों खुद नुकसान पहुंचा सकते हैं, जिससे वैक्सीन और प्लेसिबो के साइड इफेक्ट्स समान दिखाई दिए।
गोट्शे ने यह भी बताया कि गंभीर न्यूरोलॉजिकल समस्याओं जैसे POTS और CRPS को रिपोर्ट नहीं किया गया। केवल 14 दिनों के भीतर की घटनाओं को गिना गया, जबकि 90% नुकसान इससे बाहर थे। कई मामलों को 'कोई संबंध नहीं' बताकर बाहर कर दिया गया। गोट्शे इसे 'आउटराइट फ्रॉड' मानते हैं।
हालांकि, वैक्सीन को सर्वाइकल कैंसर रोकने वाला बताया गया, लेकिन गोट्शे का दावा है कि ट्रायल में असली कैंसर के मामले शून्य थे। लंबे समय के डेटा में एंटीबॉडी स्तर तेजी से गिरता है और पहले से एचपीवी संक्रमित महिलाओं में कैंसर का खतरा बढ़ सकता है।
गोट्शे ने यह भी आरोप लगाया है कि नियामकों ने मर्क की एकतरफा रिपोर्टों को बिना सवाल स्वीकार किया। पुस्तक में Vioxx घोटाले की तुलना की गई है। लेखक ने अन्य देशों के स्वास्थ्य अधिकारियों के भ्रामक बयानों के उदाहरण भी दिए हैं।
विश्लेषकों का मानना है कि यह पुस्तक गोपनीय आंतरिक दस्तावेजों पर आधारित है और इसे जर्नल पेपरों से अधिक विस्तृत माना जाता है। इस पुस्तक का सबसे बड़ा प्रभाव यह है कि यह पारदर्शिता की मांग करती है।
गोट्शे को ब्रिटिश मेडिकल शोध संस्थान कोक्रेन से निकाला गया था क्योंकि उन्होंने 2018 में एचपीवी वैक्सीन पर इसी तरह की आलोचना की थी। WHO, CDC और Cochrane जैसे संस्थान इसे प्रभावी मानते हैं और गंभीर साइड इफेक्ट्स को दुर्लभ बताते हैं।
भारत में इस पुस्तक का प्रभाव अभी तक स्पष्ट नहीं है। हालांकि, यह अप्रत्यक्ष रूप से प्रासंगिक है क्योंकि 2009-2010 में PATH के साथ मर्क के गार्डासिल और GSK के Cervarix ट्रायल्स में कुछ लड़कियों की मौत हुई थी।
भारत सरकार HPV वैक्सीन को स्कूल कार्यक्रम में लाने की योजना बना रही है, जबकि स्वास्थ्य मंत्रालय इसे सुरक्षित और आवश्यक मानता है।
कुल मिलाकर, पुस्तक के दावे के अनुसार, वैक्सीन के छिपे नुकसान सोशल मीडिया पर फैल सकते हैं, जिससे हिचकिचाहट बढ़ सकती है। हालांकि, भारत में मुख्यधारा मीडिया इसे 'मिथ' मानता है।