IIM जम्मू में पीएम मोदी के जन्मदिन समारोह पर विवाद, छात्रों को नोटिस जारी
छात्रों को नोटिस जारी करने का मामला
जम्मू: प्रतिष्ठित प्रबंधन संस्थान 'आईआईएम जम्मू' में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन के अवसर पर आयोजित दीपोत्सव कार्यक्रम में अनुपस्थित रहने वाले छात्रों को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है। 17 सितंबर को आयोजित इस 'दीपक लाइटिंग सेरेमनी' में शामिल नहीं होने वाले छात्रों को लिखित स्पष्टीकरण देने के लिए कहा गया है, और यदि संतोषजनक उत्तर नहीं मिलता है, तो ₹500 का जुर्माना लगाने की चेतावनी दी गई है। इस आदेश के बाद शैक्षणिक और राजनीतिक हलकों में विवाद उत्पन्न हो गया है।
अनिवार्य उपस्थिति का निर्देश
आईआईएम स्टूडेंट्स काउंसिल द्वारा जारी नोटिस में स्पष्ट रूप से कहा गया था कि 17 सितंबर को होने वाले समारोह में छात्रों की उपस्थिति अनिवार्य है। जो छात्र गैरहाजिर रहे, उन्हें 18 सितंबर तक अपनी अनुपस्थिति का कारण बताने के लिए कहा गया। नोटिस में यह भी उल्लेख किया गया कि केवल चिकित्सा कारणों पर ही छूट दी जाएगी, अन्यथा ₹500 का जुर्माना भुगतना होगा।
65 छात्रों को नोटिस, काउंसिल ने दी सफाई
इस मामले में आईआईएम स्टूडेंट्स काउंसिल के अध्यक्ष अकुल शर्मा ने बताया कि शुरुआत में 65 छात्रों को नोटिस जारी किए गए थे। इनमें से कुछ छात्र कैंपस प्लेसमेंट ड्राइव के कारण बाहर थे और कुछ अस्वस्थ थे, जिनके नोटिस वापस ले लिए गए हैं। शर्मा ने कहा कि नियमों के अनुसार ही नोटिस जारी किए गए थे और अब तक किसी छात्र से जुर्माना नहीं लिया गया है। वहीं, संस्थान के प्रवक्ता ने कहा कि छात्रों को कार्यक्रमों में भाग लेने के लिए प्रेरित किया जाता है, लेकिन इस मामले को राजनीतिक रंग दिया जा रहा है।
बीजेपी विधायक की उपस्थिति और कांग्रेस का विरोध
यह दीपोत्सव कार्यक्रम आईआईएम जम्मू के एकेडमिक ब्लॉक के मुख्य रिसेप्शन पर आयोजित किया गया था, जिसमें बीजेपी विधायक युधवीर सेठी और आईआईएम के निदेशक प्रो. बीएस सहाय सहित कई वरिष्ठ लोग शामिल हुए थे। कांग्रेस ने इस कार्यक्रम को लेकर संस्थान प्रशासन और केंद्र सरकार पर तीखा हमला किया है।
कांग्रेस के जम्मू-कश्मीर प्रभारी सैयद नसीर हुसैन ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर सवाल उठाते हुए लिखा कि क्या किसी राजनीतिक नेता का जन्मदिन मनाना आईआईएम के शैक्षणिक पाठ्यक्रम का हिस्सा है? उन्होंने आरोप लगाया कि देश के प्रमुख शिक्षण संस्थानों में स्वतंत्र सोच को बढ़ावा देने के बजाय छात्रों पर राजनीतिक कार्यक्रमों में अनिवार्य उपस्थिति का दबाव डाला जा रहा है। हुसैन ने मांग की कि बीजेपी के प्रचार कार्यक्रमों को उच्च शिक्षण संस्थानों से पूरी तरह अलग रखा जाना चाहिए।