ISRO के PSLV-C62 मिशन की असफलता: सैटेलाइट्स का भविष्य और स्पेस डेब्री की चुनौतियाँ
सैटेलाइट्स की स्थिति पर उठे सवाल
ISRO के PSLV-C62 मिशन में 16 सैटेलाइट्स के असफल होने के बाद, लोगों में जिज्ञासा और चिंता बढ़ गई है। आम जनता जानना चाहती है कि ये सैटेलाइट्स अब कहां हैं और क्या वे धरती पर गिरेंगे या अंतरिक्ष में भटकते रहेंगे। अंतरिक्ष एजेंसियों के पास निष्क्रिय या खराब सैटेलाइट्स को निपटाने के लिए वैज्ञानिक और अंतरराष्ट्रीय तरीके होते हैं, ताकि ये खतरा न बनें।
PSLV-C62 की असफलता के बाद की चिंताएँ
PSLV-C62 मिशन के दौरान तकनीकी समस्या के कारण चौथे चरण और उसके साथ जुड़े 16 सैटेलाइट्स अपने निर्धारित कार्य को पूरा नहीं कर सके। इस स्थिति में सबसे बड़ा सवाल यह है कि ये सैटेलाइट्स अब अंतरिक्ष में किस स्थिति में हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी असफल मिशन के बाद सैटेलाइट्स को छोड़ देना खतरनाक हो सकता है, क्योंकि वे स्पेस डेब्री बनकर अन्य सक्रिय उपग्रहों से टकरा सकते हैं।
स्पेस डेब्री की चुनौती
अंतरिक्ष में पहले से ही हजारों सक्रिय सैटेलाइट्स मौजूद हैं। जब कोई सैटेलाइट खराब हो जाता है या ईंधन खत्म होने के बाद निष्क्रिय हो जाता है, तो वह अनियंत्रित मलबे में बदल सकता है। यह मलबा तेज गति से घूमते हुए अन्य सैटेलाइट्स या अंतरिक्ष यानों से टकरा सकता है। इसी खतरे को कम करने के लिए सभी प्रमुख अंतरिक्ष एजेंसियां सैटेलाइट डिस्पोजल के नियमों का पालन करती हैं।
लो अर्थ ऑर्बिट में सैटेलाइट्स का अंत
जो सैटेलाइट्स पृथ्वी से 200 से 2000 किलोमीटर की ऊंचाई पर, यानी लो अर्थ ऑर्बिट (LEO) में होते हैं, वे प्राकृतिक तरीके से समाप्त हो सकते हैं। इस ऊंचाई पर वातावरण का हल्का घर्षण सैटेलाइट की गति को धीरे-धीरे कम करता है। 400 से 600 किलोमीटर की ऊंचाई वाले सैटेलाइट्स आमतौर पर 5 से 10 साल में जलकर नष्ट हो जाते हैं, जबकि अधिक ऊंचाई पर मौजूद सैटेलाइट्स को इसमें कई दशक लग सकते हैं।
कंट्रोल्ड डीऑर्बिट प्रक्रिया
बड़े और भारी सैटेलाइट्स को यूं ही गिरने देना सुरक्षित नहीं होता। ऐसे में एजेंसियां कंट्रोल्ड डीऑर्बिट का सहारा लेती हैं। बचे हुए ईंधन की मदद से सैटेलाइट को धीमा किया जाता है और उसे निर्धारित दिशा में वायुमंडल में प्रवेश कराया जाता है। इससे यह सुनिश्चित किया जाता है कि इसके टुकड़े किसी आबादी वाले इलाके में न गिरें और नुकसान न हो।
पॉइंट नेमो: अंतरिक्ष का कब्रिस्तान
दुनिया के अधिकांश बड़े सैटेलाइट्स और स्पेस स्टेशन को 'पॉइंट नेमो' नामक स्थान पर गिराया जाता है। यह दक्षिणी प्रशांत महासागर का सबसे निर्जन क्षेत्र है, जो किसी भी भूमि से हजारों किलोमीटर दूर है। यहां अब तक सैकड़ों स्पेसक्राफ्ट गिराए जा चुके हैं। भविष्य में इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन को भी यहीं गिराने की योजना है, क्योंकि यहां मानव जीवन को कोई खतरा नहीं होता।
अंतरराष्ट्रीय नियम और भविष्य की चुनौतियाँ
संयुक्त राष्ट्र के दिशा-निर्देशों के अनुसार, हर सैटेलाइट को मिशन समाप्त होने के बाद निर्धारित समय में सुरक्षित तरीके से नष्ट करना आवश्यक है। पहले यह सीमा 25 साल थी, लेकिन अब कई देश इसे घटाकर 5 साल कर रहे हैं। स्पेस डेब्री तेजी से बढ़ रही है, इसलिए आने वाले समय में सैटेलाइट डिजाइन और डिस्पोजल नियम और सख्त होने की संभावना है।