ISRO के PSLV-C62 मिशन में तकनीकी बाधा: क्या होगी अगली कार्रवाई?
नई दिल्ली में ISRO का नया मिशन
नई दिल्ली: भारत के विश्वसनीय पोलर सैटेलाइट लॉन्च व्हीकल (PSLV) के एक महत्वपूर्ण मिशन में सोमवार को एक अप्रत्याशित तकनीकी समस्या उत्पन्न हुई। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने बताया कि प्रक्षेपण के बाद रॉकेट के तीसरे चरण में एक असामान्य विचलन देखा गया, जिससे मिशन के परिणामों में अनिश्चितता आ गई है।
ISRO प्रमुख का बयान
ISRO के अध्यक्ष डॉ. वी. नारायणन ने कहा कि मिशन से संबंधित सभी टेलीमेट्री और उड़ान डेटा का गहन विश्लेषण किया जा रहा है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि इस समय मिशन को न तो पूरी तरह सफल और न ही असफल घोषित किया गया है। उनके अनुसार, "मिशन अपेक्षित प्रक्षेप पथ पर आगे नहीं बढ़ सका," लेकिन अंतिम निष्कर्ष केवल विश्लेषण के बाद ही साझा किया जाएगा।
PSLV-C62 का महत्व
PSLV का 64वां मिशन, PSLV-C62, सोमवार सुबह 10:18 बजे श्रीहरिकोटा के सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से लॉन्च किया गया। इस मिशन के तहत पृथ्वी अवलोकन उपग्रह EOS-N1 सहित कुल 16 उपग्रहों को कक्षा में स्थापित करने की योजना थी। यह उड़ान विशेष रूप से महत्वपूर्ण मानी जा रही थी क्योंकि 2025 में PSLV की पिछली उड़ान विफल रही थी, और C62 को उसकी वापसी मिशन के रूप में देखा जा रहा था।
तीसरे चरण में गड़बड़ी
ISRO के अनुसार, लॉन्च के प्रारंभिक मिनट पूरी तरह से योजना के अनुसार चले। रॉकेट के पहले और दूसरे चरण ने सामान्य प्रदर्शन किया, लेकिन तीसरे चरण के दौरान एक विचलन दर्ज किया गया। PSLV के तीसरे चरण में किसी भी बड़ी गड़बड़ी से पूरे मिशन के उद्देश्यों पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है।
2025 की विफलता की यादें
यह ध्यान देने योग्य है कि 2025 में भी PSLV का एकमात्र प्रक्षेपण तीसरे चरण में आई समस्या के कारण असफल हो गया था। उस समय ISRO ने विफलता विश्लेषण समिति का गठन किया था, लेकिन उसके निष्कर्ष सार्वजनिक नहीं किए गए। ऐसे में C62 मिशन में फिर से तीसरे चरण से जुड़ी समस्या सामने आना चिंता का विषय है।
विदेशी उपग्रहों और स्टार्टअप्स पर प्रभाव
यदि मिशन को अंततः असफल घोषित किया जाता है, तो यह 64 PSLV उड़ानों में पांचवीं विफलता होगी। हालांकि, यह रिकॉर्ड अंतरराष्ट्रीय मानकों पर खराब नहीं माना जाएगा, लेकिन इसका व्यापक प्रभाव हो सकता है। इस मिशन में ब्राजील, नेपाल और ब्रिटेन जैसे देशों के उपग्रह शामिल थे, साथ ही हैदराबाद की स्टार्टअप कंपनी ध्रुवा स्पेस के सात उपग्रह भी इसी रॉकेट पर थे।
भविष्य की योजनाओं पर संभावित प्रभाव
PSLV को भारत की वाणिज्यिक अंतरिक्ष योजनाओं की रीढ़ माना जाता है। ISRO उद्योग-निर्मित पहले PSLV को लॉन्च करने की तैयारी कर रहा है। ऐसे में PSLV-C62 के अंतिम परिणाम का असर न केवल ISRO, बल्कि निजी अंतरिक्ष स्टार्टअप्स और अंतरराष्ट्रीय साझेदारों पर भी पड़ सकता है। फिलहाल, सभी की नजरें ISRO के आधिकारिक निर्णय पर टिकी हैं।