☰
×

ISRO ने NVS-03 सैटेलाइट का सफलतापूर्वक लॉन्च किया

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने NVS-03 सैटेलाइट को सफलतापूर्वक लॉन्च किया है, जो भारत के NavIC नेविगेशन सिस्टम को सशक्त बनाएगा। यह सैटेलाइट 1,500 किलोमीटर तक सटीक लोकेशन और नेविगेशन सेवाएं प्रदान करेगा। इसके साथ ही, ISRO ने एक नई स्वदेशी एटॉमिक क्लॉक भी अंतरिक्ष में भेजी है। जानें इस सैटेलाइट की विशेषताएँ और इसके महत्व के बारे में।
 

ISRO की नई उपलब्धि

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा में स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से रात 11:51 बजे GSLV-F18 रॉकेट के माध्यम से NVS-03 सैटेलाइट को सफलतापूर्वक लॉन्च किया गया। इसरो के अनुसार, यह उपग्रह लगभग 2,250 किलोग्राम वजनी है और यह रॉकेट से अलग होकर अपनी निर्धारित जियोसिंक्रोनस ट्रांसफर ऑर्बिट (GTO) में पहुंच गया।


NavIC को मजबूती देने वाला सैटेलाइट

यह सैटेलाइट भारत के नेविगेशन सिस्टम NavIC को और अधिक सशक्त बनाने में सहायक होगा। इसके साथ ही, इसरो ने स्पेस एप्लीकेशंस सेंटर द्वारा विकसित तीसरी स्वदेशी रूबिडियम परमाणु घड़ी (एटॉमिक क्लॉक) को भी सफलतापूर्वक अंतरिक्ष में भेजा है, जिससे भारत की नेविगेशन सेवाओं में सुधार होगा।


महत्वपूर्ण विशेषताएँ

यह विशेष सैटेलाइट पूरे भारत और सीमा से 1,500 किलोमीटर दूर तक सटीक लोकेशन और नेविगेशन की सुविधा प्रदान करेगा। इसकी आवश्यकता को समझने के लिए, 1999 के कारगिल युद्ध का उदाहरण लिया जा सकता है, जब भारत ने अमेरिकी GPS से सैन्य क्षेत्र की लोकेशन जानकारी मांगी थी, लेकिन अमेरिका ने मना कर दिया था।


NavIC मिशन का हिस्सा

यह सैटेलाइट नेविगेशन विद इंडियन कॉन्स्टेलेशन (NavIC) मिशन के तहत लॉन्च की गई है। NavIC भारत का अपना क्षेत्रीय सैटेलाइट नेविगेशन सिस्टम है, जिसे ISRO ने विकसित किया है। जबकि GPS वैश्विक स्तर पर कार्य करता है, NavIC केवल भारत के आसपास 1500 किमी के क्षेत्र में सीमित है।


NavIC का उद्देश्य

NavIC का उद्देश्य GPS को प्रतिस्थापित करना नहीं है, बल्कि विदेशी प्रणालियों पर भारत की निर्भरता को कम करना है। इसमें स्वदेशी एटॉमिक क्लॉक तकनीक का उपयोग किया गया है, जो L1, L5 और S बैंड पर सेवाएं प्रदान करने में सक्षम है। L1 बैंड के जुड़ने से NavIC को सपोर्ट करने वाले उपकरणों की संख्या बढ़ाने में मदद मिल सकती है।


NVS-03 सैटेलाइट की जानकारी

NVS-03, नेक्स्ट जनरेशन के नेविगेशन सैटेलाइट सिस्टम का तीसरा सैटेलाइट है। इसे IRNSS श्रृंखला के लिए नेविगेशन सेवाओं की निरंतरता बनाए रखने के उद्देश्य से विकसित किया गया है। इस सैटेलाइट में स्वदेशी एटॉमिक क्लॉक के साथ-साथ बाहरी एटॉमिक क्लॉक भी शामिल हैं। रिपोर्टों के अनुसार, इसमें मौजूदा L5/S सिग्नलों के अलावा L1 सिग्नल भी शामिल हैं।


GSLV-F18 रॉकेट की उड़ान

GSLV-F18, भारत के जियोसिंक्रोनस सैटेलाइट लॉन्च व्हीकल (GSLV) की 20वीं उड़ान है। यह रॉकेट NVS-03 सैटेलाइट को जियोसिंक्रोनस ट्रांसफर ऑर्बिट में स्थापित करेगा और इसे SHAR के दूसरे लॉन्च पैड से लॉन्च किया गया है।