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JNU में पीएम मोदी और अमित शाह के खिलाफ विवादित नारेबाजी

जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) में उमर खालिद और शरजील इमाम के समर्थकों ने पीएम मोदी और अमित शाह के खिलाफ विवादित नारेबाजी की। यह प्रदर्शन सुप्रीम कोर्ट के हालिया फैसले के विरोध में किया गया। प्रदर्शन के दौरान छात्रों ने 'मोदी-शाह की कब्र खुदेगी, जेएनयू की धरती पर' जैसे नारे लगाए। इस घटना पर बीजेपी नेताओं ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। जानें इस विवाद के पीछे की पूरी कहानी और इसके राजनीतिक निहितार्थ।
 

JNU में प्रदर्शन और विवादित नारे

JNU में पीएम मोदी और अमित शाह के खिलाफ नारेबाजी: सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को 2020 के दिल्ली दंगों से जुड़े यूएपीए मामले में छात्र कार्यकर्ता उमर खालिद और शरजील इमाम को छोड़कर अन्य पांच आरोपियों को जमानत दे दी। इस फैसले के खिलाफ खालिद और शरजील के समर्थकों ने जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) में विरोध प्रदर्शन किया, जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह के खिलाफ विवादित नारे लगाए गए।


मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, जेएनयू में सोमवार रात साबरमती हॉस्टल के बाहर भारी हंगामा हुआ। जेएनयू छात्र संघ (JNUSU) और वामपंथी संगठनों ने प्रशासन और केंद्र सरकार के खिलाफ मोर्चा खोला। परिसर में 'न्याय दो' और 'रिहाई दो' के नारे गूंजते रहे। इस दौरान एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ, जिसमें प्रदर्शनकारियों को विवादित नारे लगाते हुए सुना जा सकता है। वीडियो में 'मोदी-शाह की कब्र खुदेगी, जेएनयू की धरती पर' जैसे नारे लगाए जा रहे हैं।



दिल्ली के जेएनयू में पीएम मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के खिलाफ विवादित नारेबाजी पर बीजेपी नेता तरविंदर मारवाह ने कहा, “वे विदेशी ताकतों के इशारों पर नाच रहे हैं। हाल ही में दिल्ली में एक बम धमाका हुआ था। मैं इसकी कड़ी निंदा करता हूं और सरकार से अपील करता हूं कि उनके खिलाफ देशद्रोह का मामला दर्ज किया जाए।”


नारेबाज़ी पर ABVP (JNU यूनिट) के नेता मनीष चौधरी ने कहा, “JNU के पदाधिकारी और पुराने सदस्य अक्सर छात्रों को इकट्ठा करते हैं और सुप्रीम कोर्ट के फैसले के खिलाफ प्रदर्शन करवाते हैं। ये गतिविधियाँ भारत की सामाजिक सद्भाव को कमजोर करती हैं। मैं इन हरकतों की कड़ी निंदा करता हूं और प्रशासन से सख्त कार्रवाई की अपील करता हूं।”