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महाशिवरात्रि : नागा संतों ने पेशवाई निकाल बाबा विश्वनाथ के चौखट पर टेका मत्था

 








-पेशवाई में शामिल नागा संतों, बाल और महिला नागा संतों के साथ पीठाधीश्वर आचार्य पर पूरे राह पुष्पवर्षा, स्वर्णिम दरबार में संतों ने धर्मध्वजा अर्पित किया

वाराणसी, 26 फरवरी (हि.स.)। महाशिवरात्रि पर्व पर बुधवार को विभिन्न अखाड़ों के नागा संतों ने पूरे शान शौकत के साथ पेशवाई (शोभायात्रा) निकाल आदि योगी काशी पुराधिपति के स्वर्णिम दरबार में मत्था टेका। पेशवाई में शामिल नागा संतों, बाल और महिला नागा संतों के साथ पीठाधीश्वर आचार्य महामंडलेश्वर, महंतों पर पूरे राह लाखों श्रद्धालु पुष्पवर्षा कर बाबा विशेशर के गणों के प्रति आस्था और अनुराग जताते रहे।

हर-हर महादेव के कालजयी उद्घोष के बीच काशी विश्वनाथ धाम के गेट नंबर चार पर नागा संतों के पहले दल पर वाराणसी परिक्षेत्र के कमिश्नर कौशल राज शर्मा, पुलिस कमिश्नर मोहित अग्रवाल, जिलाधिकारी एस राजलिंगम और मंदिर न्यास के सीईओ विश्वभूषण मिश्र ने पुष्प वर्षा किया। श्री पंचदशनाम जूना अखाड़े के पीठाधीश्वर आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी अवधेशानंद गिरि, अखाड़े के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष प्रेम गिरि महाराज, निरंजनी के आचार्य महामंडलेश्वर कैलाशानंद महाराज, आनंद अखाड़े के आचार्य महामंडलेश्वर बालकानंद गिरि महाराज, काशी सुमेरुपीठ के पीठाधीश्वर शंकराचार्य स्वामी नरेंद्रानंद सरस्वती, अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष रवींद्र पुरी महाराज कीअगुआई में हनुमानघाट से निकली राजसी पेशवाई में सनातन की आध्यात्मि​क छटा दिखी।

इसके पहले जूना अखाड़े के संतों ने धार्मिक अनुष्ठान के बाद आराध्य देव को खिचड़ी का भोग लगाया। भस्म भभूत लेपे संत भाला निशान लेकर पेशवाई में शामिल हुए। पेशवाई में श्री पंचदशनाम जूना अखाड़े के पीठाधीश्वर आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी अवधेशानंद गिरि, अखाड़े के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष प्रेम गिरि महाराज, महिला संत रथों, बग्घी, घोड़े और अन्य वाहनों पर सवार हुई। उनके आगे डमरू बजाते हुए युवा, बैंडबाजे की धुन के साथ आगे बढ़े। जूना अखाड़े नागा संतों के स्वागत के लिए मार्ग में नागरिकों की कतार जुटी रही। लोग हर-हर महादेव के उद्घोष के बीच नागा संतों पर अनवरत पुष्प वर्षा करते रहे। पेशवाई में शामिल नागा संत गदा- तलवार, भाला आदि पारम्परिक शस्त्रों का करतब दिखाते हुए चल रहे थे।

जूना अखाड़े की पेशवाई के दौरान बाल नागा संत का पारम्परिक शस्त्र प्रदर्शन लोगों में आकर्षण का केन्द्र रहा। इस दौरान दर्जनों नागा संत विशाल डमरू भी बजाते रहे। लोग नागा संतों का पैर छूकर अशीर्वाद लेने के बाद हर-हर महादेव का उद्घोष करते रहे। पेशवाई में दशाश्वमेध घाट से आवाहन अखाड़ा के नागा संत जूना अखाड़े के दल में गोदौलिया चौराहे पर मिले। इसके बाद दल धीरे-धीरे काशी विश्वनाथ के दरबार की ओर बढ़ते रहे। मंदिर के गेट नंबर चार से दरबार में पहुंचे संतों, महामंडलेश्वर, श्रीमहंत, महंत और सभापति ने डमरू की निनाद और शंखनाद के बीच शाही अंदाज में 144 साल बाद महाकुंभ के अंतिम अमृत स्नान और 60 वर्षों बाद त्रिग्रही योग में अपने आराध्य काशी विश्वनाथ का दर्शन पूजन किया। नागा संतों के इस दल में सात अखाड़े शामिल रहे। बाबा के दरबार में दर्शन पूजन के बाद संतों ने धर्मध्वजा अर्पित किया।

नागा संतों के दर्शन के पहले मंदिर में कमिश्नर ने व्यवस्था को परखा

महाशिवरात्रि पर्व पर नागा संतों के राजसी दर्शन से पहले वाराणसी परिक्षेत्र के कमिश्नर कौशल राज शर्मा, पुलिस कमिश्नर मोहित अग्रवाल ने काशी विश्वनाथ मंदिर समेत पूरे क्षेत्र का निरीक्षण किया। सभी व्यवस्थाओं का निरीक्षण कर अफसरों ने लाइन में लगे श्रद्धालुओं से वार्ता की। उनसे व्यवस्थाओं को बनाये रखने में सहयोग की अपील की। नागा साधुओं के दल के काशी विश्वनाथ धाम पहुंचने पर अधिकारियों ने उन पर पुष्प वर्षा किया।

बाबा के दर्शन के लिए सतों में दिखी व्याकुलता

महाशिवरात्रि पर्व पर काशीपुराधिपति के दर्शन के लिए नागा संतों के साथ उनके महामंडलेश्वरों, श्री महंतों में भी व्याकुलता दिखी। प्रयागराज महाकुंभ से लौटने के बाद संत इसी दिन की प्रतीक्षा में रहे। काशी विश्वनाथ मंदिर में पूजा-अर्चना करने के बाद, निरंजनी अखाड़े के आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी कैलाशानंद गिरि महाराज ने पत्रकारों से बातचीत के दौरान बताया कि महाशिवरात्रि के अवसर पर, सभी पांच अखाड़ों ने महादेव की पूजा-अर्चना की और महाकुंभ की 'पूर्णाहुति' के लिए विधि विधान से 'अभिषेक' किया।

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हिन्दुस्थान समाचार / श्रीधर त्रिपाठी