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NASA का अंतरिक्ष स्टेशन 2030 तक प्रशांत महासागर में गिराया जाएगा

NASA ने अपने अंतरिक्ष स्टेशन को 2030 तक प्रशांत महासागर में गिराने की योजना बनाई है। इस मिशन पर लगभग 1 अरब डॉलर खर्च होंगे। स्टेशन की उम्र पूरी हो चुकी है और इसके रखरखाव पर अरबों डॉलर खर्च हो रहे हैं। इसे नियंत्रित तरीके से गिराने की प्रक्रिया 2028 से शुरू होगी। जानें इसके गिरने की प्रक्रिया, मलबे का स्थान और भविष्य की योजनाओं के बारे में।
 

NASA का महत्वाकांक्षी मिशन


NASA: इस परियोजना पर नासा लगभग 1 अरब डॉलर (करीब 9500 करोड़ रुपये) खर्च करेगा। योजना के अनुसार, 2028 से इसे हटाने की प्रक्रिया शुरू होगी और 2030 तक इसे पूरी तरह से नष्ट कर दिया जाएगा।


अंतरिक्ष स्टेशन की स्थिति

यह अंतरिक्ष स्टेशन, जो पृथ्वी से 400 किलोमीटर की ऊंचाई पर स्थित है, अपनी निर्धारित उम्र पूरी कर चुका है। इसमें लगातार तकनीकी समस्याएं उत्पन्न हो रही हैं और इसके रखरखाव पर अरबों डॉलर खर्च हो रहे हैं। अब नासा चांद और मंगल पर अपने मिशनों पर ध्यान केंद्रित करना चाहता है, इसलिए इसे हटाने का निर्णय लिया गया है।


गिराने की प्रक्रिया

कैसे गिराया जाएगा इतना भारी स्टेशन?


लगभग 4.5 लाख किलोग्राम वजनी इस स्पेस स्टेशन को अचानक गिरने नहीं दिया जाएगा। 2028 से इसे कक्षा में रोकने की प्रक्रिया धीरे-धीरे समाप्त की जाएगी। इसके बाद, एक विशेष अंतरिक्ष यान की सहायता से इसे नियंत्रित तरीके से पृथ्वी के वायुमंडल में धकेला जाएगा। वायुमंडल में प्रवेश करते ही घर्षण के कारण इसमें भीषण आग लग जाएगी और इसका अधिकांश हिस्सा जलकर हवा में ही नष्ट हो जाएगा।


मलबे का स्थान

कहां गिरेगा इसका मलबा?


जलने के बाद भी इसके कुछ भारी टुकड़े बच सकते हैं, जो आबादी वाले क्षेत्रों में गिरकर नुकसान पहुंचा सकते हैं। इससे बचने के लिए, नासा ने प्रशांत महासागर के बीचों-बीच स्थित सुनसान क्षेत्र 'पॉइंट नीमो' को चुना है। इस स्थान के आसपास मानव गतिविधियां नहीं होती हैं और जहाजों के आने-जाने पर भी प्रतिबंध है। 1971 से अब तक लगभग 300 अंतरिक्ष मलबे यहां दफनाए जा चुके हैं, इसलिए इसे 'अंतरिक्ष का कब्रिस्तान' भी कहा जाता है।


भविष्य की योजनाएं

निजी कंपनियां और भारत संभालेंगे कमान


ISS पर अब तक 19 देशों के 250 से अधिक एस्ट्रोनॉट्स जा चुके हैं। इसके हटने के बाद भी अंतरिक्ष में गतिविधियां जारी रहेंगी। नासा की सहायता से कई निजी कंपनियां (जैसे ब्लू ओरिजिन और एक्सिओम) अपने खुद के वाणिज्यिक अंतरिक्ष स्टेशन बना रही हैं। चीन का स्टेशन पहले से ही कार्यरत है। इसके अलावा, भारतीय अंतरिक्ष एजेंसी 'इसरो' भी 2035 तक अपना खुद का भारतीय स्पेस स्टेशन स्थापित करने की योजना बना रही है।