NASA का आर्टेमिस II मिशन: चांद और पृथ्वी की अद्भुत तस्वीरें साझा
आर्टेमिस II मिशन की तस्वीरें
नई दिल्ली: अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी NASA ने आर्टेमिस II मिशन के दौरान पृथ्वी और चांद की कुछ शानदार तस्वीरें सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर साझा की हैं। इन तस्वीरों के साथ NASA ने लिखा, “हेलो, चांद। यहां आकर बहुत अच्छा लगा।” इस मिशन के अंतरिक्ष यात्रियों ने चांद के ऐसे हिस्सों को देखा, जिन्हें पहले कभी इंसानी आंखों ने नहीं देखा था। उन्होंने इन अद्भुत दृश्यों को तस्वीरों और शब्दों में कैद किया है, जिन्हें हम आपके सामने प्रस्तुत कर रहे हैं।
आर्टेमिस II के दौरान अंतरिक्ष यात्रियों रीड वाइजमैन, विक्टर ग्लोवर, क्रिस्टीना कोच और जेरेमी हैनसन ने पृथ्वी और चांद के कई यादगार दृश्य कैमरे में कैद किए हैं और इन्हें लगातार साझा कर रहे हैं। इनमें पहली बार स्मार्टफोन से ली गई अंतरिक्ष तस्वीरें भी शामिल हैं।
ओरियन स्पेसक्राफ्ट में कुल 32 कैमरे और फोटो-वीडियो लेने वाले उपकरण लगे हुए हैं। इनमें से 15 कैमरे स्पेसक्राफ्ट पर स्थापित हैं, जो लॉन्च, सोलर एरे डिप्लॉयमेंट, चांद के चारों ओर यात्रा और अन्य महत्वपूर्ण क्षणों को रिकॉर्ड कर रहे हैं। शेष 17 हैंडहेल्ड उपकरण चारों एस्ट्रोनॉट्स के पास हैं, जिनमें निकॉन डी5 डीएसएलआर, निकॉन जेड9 मिररलेस कैमरा, गोप्रो और स्मार्टफोन शामिल हैं। ये सभी उपकरण इंजीनियरिंग, नेविगेशन, क्रू की निगरानी और चंद्रमा से संबंधित विज्ञान तथा आउटरीच गतिविधियों में सहायक हैं।
NASA के अनुसार, ओरियन स्पेसक्राफ्ट पर लगे बाहरी कैमरे सोलर एरे से लेकर केबिन के अंदरूनी दृश्य तक हर कोण से मिशन को कैद कर रहे हैं। एक विशेष ऑप्टिकल नेविगेशन कैमरा पृथ्वी और चांद की तस्वीरें लेकर स्पेसक्राफ्ट को गहरे अंतरिक्ष में अपनी स्थिति निर्धारित करने में मदद कर रहा है।
इस चार सदस्यीय चालक दल ने इन आधुनिक कैमरों की सहायता से पृथ्वी की ऐसी तस्वीरें ली हैं, जिनमें उत्तरी और दक्षिणी दोनों ओर ऑरोरा लाइट एक साथ दिखाई दे रही हैं। कुछ तस्वीरें स्मार्टफोन से ली गई हैं, जो अंतरिक्ष उड़ान के लिए पहली बार स्वीकृत हुई हैं।
आर्टेमिस II की कुछ प्रारंभिक तस्वीरें 1968 में अपोलो 8 मिशन के दौरान बिल एंडर्स द्वारा ली गई प्रसिद्ध ‘अर्थराइज’ (पृथ्वी उदय) की तस्वीर की याद दिलाती हैं। उस समय हैसलब्लैड फिल्म कैमरा और 250 मिमी लेंस का उपयोग किया गया था। आज आर्टेमिस II के अंतरिक्ष यात्रियों के पास 80-400 मिमी टेलीफोटो लेंस और बेहतर डिजिटल कैमरे उपलब्ध हैं, जिससे उच्च गुणवत्ता वाली तस्वीरें लेना आसान हो गया है। फिर भी, उड़ान की गति और समय के कारण ठीक वैसी ही तस्वीर दोबारा कैद करना चुनौतीपूर्ण रहा है।