NEET परीक्षा में गड़बड़ियों पर तमिलनाडु के मुख्यमंत्री की तीखी प्रतिक्रिया
विपक्षी नेताओं की गिरफ्तारी पर सी. जोसेफ विजय की आलोचना
नई दिल्ली में NEET परीक्षा में कथित अनियमितताओं और शिक्षा प्रणाली में सुधार की मांग को लेकर विपक्ष द्वारा किए गए प्रदर्शन के दौरान, कई नेताओं, जिनमें राहुल गांधी भी शामिल हैं, को हिरासत में लिया गया। इस पर तमिलगा वेट्री कझगम के प्रमुख और तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय ने केंद्र सरकार की कड़ी आलोचना की।
विजय ने इस कार्रवाई को लोकतंत्र के खिलाफ बताते हुए कहा कि शांतिपूर्ण तरीके से विरोध कर रहे जनप्रतिनिधियों के खिलाफ ऐसी कार्रवाई उचित नहीं है। उन्होंने सामाजिक मंच एक्स पर अपने संदेश में कहा कि युवाओं और छात्रों के समर्थन में आयोजित प्रदर्शन में शामिल नेताओं को हिरासत में लेना लोकतांत्रिक मूल्यों का उल्लंघन है.
TVK का विपक्ष के प्रदर्शन के प्रति समर्थन
विजय ने कहा कि उनकी पार्टी संसद परिसर में विपक्षी दलों द्वारा आयोजित विरोध प्रदर्शन का पूरा समर्थन करती है। उन्होंने बताया कि नीट परीक्षा को लेकर देशभर में छात्रों और अभिभावकों के बीच लंबे समय से असंतोष है, जिसे गंभीरता से लिया जाना चाहिए। उनका मानना है कि छात्रों के भविष्य से जुड़े मुद्दों पर राजनीति करने के बजाय स्थायी समाधान खोजना आवश्यक है.
इसलिए, उनकी पार्टी लगातार NEET प्रणाली को समाप्त करने की मांग करती रही है। टीवीके प्रमुख ने स्पष्ट किया कि उनका रुख हमेशा से नीट परीक्षा को समाप्त करने का रहा है। उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी केवल चुनावी लाभ के लिए ऐसे मुद्दों पर झूठे वादे नहीं करेगी। उनका यह बयान तमिलनाडु की राजनीति में चल रही बहस के बीच महत्वपूर्ण माना जा रहा है। विजय ने कहा कि नीट का सबसे अधिक प्रभाव छात्रों और उनके परिवारों पर पड़ा है, इसलिए इस विषय पर गंभीर और व्यावहारिक समाधान की आवश्यकता है.
शिक्षा को राज्य सूची में लाने की आवश्यकता
विजय ने सुझाव दिया कि यदि NEET जैसी केंद्रीकृत परीक्षाओं को समाप्त करना है, तो शिक्षा को फिर से राज्य सूची में शामिल किया जाना चाहिए। उनके अनुसार, यही सबसे स्थायी और प्रभावी समाधान होगा। उन्होंने यह भी कहा कि यदि संवैधानिक या कानूनी कारणों से ऐसा तुरंत संभव नहीं है, तो एक विशेष समवर्ती सूची बनाई जाए, जिसके तहत राज्यों को चिकित्सा शिक्षा सहित शिक्षा के क्षेत्र में अधिक अधिकार दिए जाएं।
विजय ने कहा कि उनकी पार्टी इस विचार को अपने गठन के प्रारंभिक दौर से ही सार्वजनिक रूप से रखती रही है और शिक्षा के अधिकार राज्यों को सौंपने की पक्षधर है.