NEET परीक्षा में धोखाधड़ी रोकने के लिए सरकार के नए कदम
नीट परीक्षा में सुधार की आवश्यकता
सरकार को तकनीकी, प्रशासनिक और कानूनी सुधारों के साथ आगे बढ़ना चाहिए ताकि नीट जैसी परीक्षाएं मेरिट का प्रतीक बनें, न कि विवाद का। छात्रों का भविष्य दांव पर है, ऐसे में आधी-अधूरी कोशिशें पर्याप्त नहीं हो सकती। पूर्ण सुधार से ही विश्वास बहाल होगा।
राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) और केंद्र सरकार ने NEET-UG 2026 की पुनर्परीक्षा से पहले 'टेलीग्राम' ऐप पर अस्थायी प्रतिबंध लगाने का निर्णय लिया है। यह कदम बढ़ती डिजिटल धोखाधड़ी और पेपर लीक की समस्या को देखते हुए उठाया गया है। यह निर्णय सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 69A के तहत लिया गया है, जो सार्वजनिक व्यवस्था के हित में है। एनटीए के अनुसार, पेपर लीक गिरोह टेलीग्राम चैनलों का उपयोग फर्जी पेपर बेचने और अभ्यर्थियों को ठगने के लिए कर रहे थे।
यह प्रतिबंध 22 जून तक प्रभावी रहेगा, जो परीक्षा के दिन और उसके तुरंत बाद को कवर करता है। इसके साथ ही, टेलीग्राम के मैसेज एडिटिंग फीचर को भी 30 जून तक निष्क्रिय कर दिया गया है ताकि फर्जी सबूत न बनाए जा सकें। यह निर्णय पिछले मई में हुए पेपर लीक कांड के बाद आया है, जिसके कारण परीक्षा रद्द करनी पड़ी और इस मामले की सीबीआई जांच चल रही है।
हालांकि, यदि इस समस्या का विश्लेषण किया जाए तो यह कदम लीक रोकने में कितना प्रभावी साबित होगा? नीट जैसी राष्ट्रीय स्तर की परीक्षा में पेपर लीक एक पुरानी समस्या है, जो छात्रों के भविष्य और मेरिट को प्रभावित करती है। 'टेलीग्राम' ऐप की कुछ विशेषताएं, जैसे एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन और बड़े ग्रुप/चैनल, इसे धोखेबाजों के लिए आकर्षक बनाती हैं।
सरकार का यह कदम तात्कालिक रूप से लीक की संभावना को कम कर सकता है। प्रतिबंध के दौरान ऐसे चैनल एक्सेसिबल नहीं रहेंगे, जिससे रीयल-टाइम शेयरिंग रुक सकती है। लेकिन स्वतंत्र नजरिये से देखें तो यह पूरी तरह प्रभावी नहीं है। पेपर लीक मुख्य रूप से स्रोत (पेपर सेटर्स, प्रिंटिंग प्रेस, ट्रांसपोर्ट) से शुरू होता है, न कि सिर्फ सोशल मीडिया से।
इस कदम से 15 करोड़ से अधिक भारतीय यूजर्स प्रभावित होंगे, जो वैध संचार के लिए इस ऐप का उपयोग करते हैं। विपक्षी नेता राहुल गांधी समेत कई लोगों ने इसे आलोचना का विषय बनाया है। यह कदम डिजिटल स्वतंत्रता और परीक्षा सुरक्षा के बीच संतुलन की चुनौती को उजागर करता है।
तो सवाल उठता है कि लीक रोकने के लिए सरकार को क्या कदम उठाने चाहिए? इस ऐप पर प्रतिबंध अस्थायी राहत है, लेकिन स्थायी समाधान के लिए बहुआयामी रणनीति जरूरी है। जैसे कि स्रोत-स्तरीय सुरक्षा: पेपर सेटिंग, प्रिंटिंग और ट्रांसपोर्ट को पूरी तरह डिजिटल और बायोमेट्रिक निगरानी में रखें।
सरकार पूर्ण गारंटी नहीं दे सकती, लेकिन बेहतर तैयारी से जोखिम को न्यूनतम किया जा सकता है। अगर फिर भी लीक होता है, तो जिम्मेदारी एनटीए, शिक्षा मंत्रालय, MeitY और संबंधित राज्य एजेंसियों की होगी। ऐसे में सीबीआई या विशेष जांच टीम तुरंत सक्रिय होनी चाहिए।
सरकार को इस संदर्भ में ऐसा कानून बनाना चाहिए जहाँ दोषी पाए जाने पर, चाहे वो कोई भी हो, कठोर कार्रवाई हो। इस कानून में अभ्यर्थियों को मुआवजा और पुनर्परीक्षा का अधिकार मिलना चाहिए।
टेलीग्राम प्रतिबंध एक आवश्यक लेकिन अपर्याप्त कदम है। यह परीक्षा की अखंडता बचाने की दिशा में सकारात्मक है, परंतु इस उद्योग के जड़ों (भ्रष्टाचार, कमजोर सुरक्षा और माफिया नेटवर्क) को नहीं छूता।