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NIA का कश्मीर में जमात-ए-इस्लामी के खिलाफ बड़ा अभियान

राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने कश्मीर में प्रतिबंधित संगठन जमात-ए-इस्लामी के खिलाफ एक बड़ा अभियान चलाया है। इस कार्रवाई में मध्य और दक्षिण कश्मीर के कई इलाकों में छापेमारी की गई है। अधिकारियों का कहना है कि यह कार्रवाई अलगाववादी गतिविधियों को फिर से सक्रिय करने के प्रयासों की जांच के तहत की जा रही है। जानें इस अभियान के पीछे की वजह और क्या है ताजा स्थिति।
 

जमात-ए-इस्लामी के ठिकानों पर छापेमारी

श्रीनगर: राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने सोमवार को प्रतिबंधित संगठन जमात-ए-इस्लामी कश्मीर के खिलाफ एक बड़ा अभियान चलाया। इस दौरान मध्य और दक्षिण कश्मीर के विभिन्न क्षेत्रों में छापेमारी की गई। यह कार्रवाई जम्मू-कश्मीर में अलगाववादी और राष्ट्र-विरोधी गतिविधियों को फिर से सक्रिय करने के प्रयासों की जांच के तहत की गई है।


एनआईए की टीमों ने जम्मू-कश्मीर पुलिस और अर्धसैनिक बलों के सहयोग से श्रीनगर के लाल बाजार और शोपियां जिले के विभिन्न स्थानों पर एक साथ तलाशी अभियान चलाया। छापेमारी के दौरान शोपियां के ज़ैनापोरा में एक व्यक्ति के घर की भी जांच की गई।


सूत्रों के अनुसार, यह व्यक्ति कथित तौर पर जमात-ए-इस्लामी से जुड़ा रहा है और शोपियां जिले का अमीर-ए-जमात भी रह चुका है। उसका जामिया सिराज-उल-उलूम, इमाम साहिब से भी संबंध बताया जा रहा है। इसके अलावा, शोपियां के इमाम साहिब क्षेत्र में स्थित जमात-ए-इस्लामी से संबद्ध सिराज-उल-उलूम संस्थान में भी तलाशी अभियान चलाया गया।


अधिकारियों के अनुसार, यह कार्रवाई एनआईए की उस जांच का हिस्सा है जिसमें जम्मू-कश्मीर में अलगाववाद और भारत-विरोधी प्रचार को बढ़ावा देने के लिए जमात-ए-इस्लामी की गतिविधियों को फिर से सक्रिय करने के प्रयासों की जांच की जा रही है। उल्लेखनीय है कि फरवरी 2024 में केंद्र सरकार ने गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (UAPA), 1967 की धारा 3(1) के तहत ‘जमात-ए-इस्लामी जम्मू-कश्मीर’ पर अगले पांच वर्षों के लिए प्रतिबंध बढ़ा दिया था।


सरकारी एजेंसियों का आरोप है कि जमात-ए-इस्लामी आतंकवाद को बढ़ावा देने, अलगाववादी विचारधारा का समर्थन करने और जम्मू-कश्मीर में राष्ट्र-विरोधी गतिविधियों को हवा देने में शामिल रही है। अंतिम समाचार मिलने तक कई स्थानों पर तलाशी अभियान जारी था।