OECD की रिपोर्ट: भारत की अर्थव्यवस्था में तेजी, वैश्विक संकट के बावजूद मजबूत स्थिति
भारत की आर्थिक वृद्धि के सकारात्मक संकेत
आर्थिक सहयोग एवं विकास संगठन (OECD) ने अपनी नवीनतम आर्थिक आउटलुक रिपोर्ट में भारत की अर्थव्यवस्था के लिए उत्साहजनक भविष्यवाणी की है। रिपोर्ट के अनुसार, भारत 2025-26 में 7.6 प्रतिशत, 2026-27 में 6.1 प्रतिशत और 2027-28 में 6.4 प्रतिशत की जीडीपी वृद्धि हासिल कर सकता है। इस प्रकार, भारत लगातार दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ने वाली बड़ी अर्थव्यवस्था बना रहेगा।
वैश्विक संकट के बावजूद भारत की स्थिति
वैश्विक संकट के बीच भी भारत की मजबूत स्थिति
रिपोर्ट में उल्लेख किया गया है कि पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष ने वैश्विक अर्थव्यवस्था की मजबूती को चुनौती दी है। होर्मुज़ जलडमरूमध्य में जहाजों की आवाजाही में रुकावट और ऊर्जा ढांचे को नुकसान के कारण तेल और ऊर्जा की कीमतों में वृद्धि हुई है। इससे उर्वरकों सहित कई आवश्यक वस्तुओं की वैश्विक आपूर्ति प्रभावित हुई है, जिससे लागत में वृद्धि और महंगाई पर दबाव बना है।
चीन की विकास दर में कमी
चीन की विकास रफ्तार में आएगी नरमी
OECD के अनुसार, चीन की आर्थिक वृद्धि आने वाले वर्षों में धीमी हो सकती है। रिपोर्ट में कहा गया है कि चीन की जीडीपी वृद्धि 2025 में 5 प्रतिशत रहने के बाद 2026 में घटकर 4.4 प्रतिशत और 2027 में 4.3 प्रतिशत तक पहुंच सकती है। उपभोक्ता सब्सिडी समाप्त होने, ऊर्जा आयात की बढ़ती लागत, रियल एस्टेट क्षेत्र में समायोजन और निवेश की गति में कमी इसके प्रमुख कारण हैं।
वैश्विक अर्थव्यवस्था में अनिश्चितता
दुनिया की अर्थव्यवस्था पर बनी रहेगी अनिश्चितता
रिपोर्ट के अनुसार, वैश्विक जीडीपी वृद्धि 2026 में 2.9 प्रतिशत रहने का अनुमान है, जबकि 2027 में यह 3 प्रतिशत तक पहुंच सकती है। प्रौद्योगिकी आधारित निवेश और प्रभावी टैरिफ दरों में धीरे-धीरे कमी से वैश्विक विकास को सहारा मिलने की संभावना है। हालांकि, पश्चिम एशिया का मौजूदा संकट वैश्विक मांग और निवेश के लिए अनिश्चितता पैदा कर रहा है।
ऊर्जा बाजार में सुधार की उम्मीद
ऊर्जा बाजार सामान्य होने की उम्मीद
OECD ने अपनी भविष्यवाणी इस धारणा पर आधारित की है कि ऊर्जा बाजार में मौजूदा व्यवधान अस्थायी रहेगा और 2026 के मध्य से ऊर्जा कीमतों में धीरे-धीरे कमी आएगी। यदि ऐसा होता है, तो वैश्विक महंगाई पर दबाव कम होगा और आर्थिक गतिविधियों को गति मिलेगी। इस स्थिति में, भारत की मजबूत घरेलू मांग, निवेश और आर्थिक सुधार उसे अन्य प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं की तुलना में बेहतर प्रदर्शन करने में मदद कर सकते हैं।