PM Modi की कूटनीतिक पहल: मध्य-पूर्व में शांति के लिए 8 नेताओं से की बातचीत
भारत की कूटनीतिक सक्रियता
नई दिल्ली : मध्य-पूर्व में बढ़ते संघर्ष और अस्थिरता के बीच, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक कदम उठाया है। पिछले 48 घंटों में, उन्होंने कई प्रमुख वैश्विक नेताओं से फोन पर बात की है, ताकि क्षेत्र में शांति की बहाली की अपील की जा सके। ईरान और इजरायल के बीच चल रहे इस संघर्ष में, भारत की प्राथमिक चिंता वहां रह रहे लगभग एक करोड़ भारतीय प्रवासियों की सुरक्षा है। मोदी सरकार इस संकट में एक तटस्थ और शांतिपूर्ण मध्यस्थ की भूमिका निभा रही है।
खाड़ी देशों के साथ संवाद
पीएम मोदी ने यूएई के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान और सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान के साथ विस्तृत चर्चा की है। उन्होंने हालिया हमलों की कड़ी निंदा करते हुए क्षेत्र की संप्रभुता का सम्मान करने की आवश्यकता पर जोर दिया। प्रधानमंत्री ने इन नेताओं को वहां रह रहे भारतीयों की देखभाल के लिए धन्यवाद भी दिया। जॉर्डन के किंग और बहरीन के सुल्तान के साथ बातचीत में भी उन्होंने शांति के कूटनीतिक रास्तों पर विशेष ध्यान दिया है।
इजरायल से शांति की अपील
प्रधानमंत्री ने इजरायल के पीएम बेंजामिन नेतन्याहू से भी सीधी बातचीत की। इस चर्चा के दौरान, मोदी ने नागरिक सुरक्षा को प्राथमिकता देने और जल्द से जल्द सैन्य संघर्ष समाप्त करने की आवश्यकता पर बल दिया। भारत ने स्पष्ट किया है कि वह इस संघर्ष में किसी भी पक्ष का समर्थन नहीं करता, बल्कि क्षेत्र में स्थिरता लाने में गहरी रुचि रखता है। मोदी की यह पहल वैश्विक स्तर पर भारत की जिम्मेदार और शांतिप्रिय छवि को और मजबूत करती है।
प्रवासियों की सुरक्षा सर्वोपरि
खाड़ी क्षेत्र में लगभग एक करोड़ भारतीय प्रवासी रहते हैं, जिनकी सुरक्षा सरकार के लिए एक बड़ी चुनौती है। प्रधानमंत्री ने ओमान के सुल्तान, कुवैत के क्राउन प्रिंस और कतर के शेख तमीम बिन हमाद अल थानी से विशेष रूप से इस मुद्दे पर चर्चा की है। उन्होंने इन नेताओं से भारतीय समुदाय के हितों की रक्षा के लिए समर्थन मांगा है। विदेश मंत्री एस जयशंकर भी विभिन्न देशों के संपर्क में हैं ताकि संकट के समय भारतीयों को हर संभव सहायता मिल सके।
युद्ध का बढ़ता हुआ दायरा
मध्य-पूर्व में तनाव तब बढ़ा जब 28 फरवरी को इजरायल और अमेरिका ने मिलकर ईरान पर बड़ा हमला किया। इस कार्रवाई में ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई समेत कई शीर्ष सैन्य अधिकारी मारे गए। इस हमले का मुख्य उद्देश्य ईरान की मिसाइल और परमाणु क्षमताओं को नष्ट करना था। इसके जवाब में, ईरान ने भी इजरायल और अमेरिकी ठिकानों पर मिसाइल दागकर स्थिति को और अधिक गंभीर बना दिया है। इस खूनी संघर्ष में अब तक सैकड़ों जानें जा चुकी हैं।
भारत की कूटनीतिक रणनीति
भारत की वर्तमान कूटनीति पूरी तरह से तटस्थता और क्षेत्रीय स्थिरता पर आधारित है। प्रधानमंत्री मोदी ने जिन आठ देशों के नेताओं से बात की है, उन सभी ने हमलों की निंदा की है और कूटनीतिक प्रयासों को तेज करने पर सहमति जताई है। अमेरिका द्वारा अपने दूतावास बंद किए जाने के बाद भारत की सक्रियता और भी महत्वपूर्ण हो जाती है। मोदी सरकार का लक्ष्य है कि युद्ध की आग और न फैले और कूटनीति के जरिए शांति का रास्ता साफ हो सके।