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RSS ने CJP के आंदोलन को बताया देशद्रोही, छात्रों को सही दिशा में ले जाने की अपील

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) ने कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के आंदोलन को संविधान के खिलाफ और देशद्रोही बताया है। संघ ने इस आंदोलन का अध्ययन करने की अपील की है। आरएसएस के सहसरकार्यवाह अतुल लिमये ने छात्रों के गुस्से को समझते हुए कहा कि यह आंदोलन एक राजनीतिक उद्देश्य के तहत संचालित किया गया था। उन्होंने अराजकतावादियों से सावधान रहने की आवश्यकता पर जोर दिया और छात्रों को सही दिशा में ले जाने की अपील की। जानें इस मुद्दे पर और क्या कहा गया।
 

RSS का CJP आंदोलन पर बयान

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) ने कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) द्वारा चलाए जा रहे आंदोलन को संविधान के खिलाफ और देशद्रोही करार दिया है। संघ ने बीजेपी के संगठनों से इस आंदोलन का गहन अध्ययन करने का अनुरोध किया है। यह बयान आरएसएस के सहसरकार्यवाह अतुल लिमये ने महाराष्ट्र के छत्रपति संभाजीनगर में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) के कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए दिया।


छात्रों का गुस्सा और CJP का राजनीतिक मकसद

लिमये ने कहा कि नीट-यूजी पेपर लीक के कारण छात्रों में जो प्रारंभिक गुस्सा था, वह स्वाभाविक था, लेकिन CJP के नेतृत्व में जो विरोध प्रदर्शन हुआ, वह एक बड़े राजनीतिक उद्देश्य के साथ योजनाबद्ध तरीके से किया गया। उन्होंने यह भी कहा कि इस आंदोलन के माध्यम से वामपंथी वैकल्पिक राजनीति की सोच को सफलतापूर्वक परखा गया।


अराजकतावादियों से सतर्क रहने की आवश्यकता

डॉक्टर भीमराव अंबेडकर के ऐतिहासिक 'ग्रामर ऑफ एनार्की' भाषण का उल्लेख करते हुए, अतुल लिमये ने कहा कि अंबेडकर ने पहले ही अराजकतावादियों के प्रति चेतावनी दी थी। उन्होंने कहा कि अब समय आ गया है कि इस चेतावनी को समझा जाए और देश के लिए हानिकारक अराजकतावादी ताकतों से सावधानी बरती जाए।


छात्रों का झुकाव देश के हित की ओर

लिमये ने कहा कि पेपर लीक से उत्पन्न छात्र आंदोलन शिक्षा प्रणाली में सुधार के लिए था, लेकिन यह गलत हाथों में चला गया। उन्होंने ABVP से आग्रह किया कि वह छात्र शक्ति को सही दिशा में ले जाने का प्रयास करे। उन्होंने यह भी कहा कि छात्रों का झुकाव स्वाभाविक रूप से देश के हित की ओर होता है।


CJP की विचारधारा पर उठाए सवाल

अतुल लिमये ने सामाजिक कार्यकर्ताओं से CJP के प्रदर्शन की बारीकी से जांच करने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि CJP आंदोलन को एक केस स्टडी के रूप में देखना चाहिए और इसके तरीकों, समर्थन प्रणाली और विचारधारा को विस्तार से समझना आवश्यक है। उन्होंने बताया कि CJP के नेता अभिजीत दिपके को भारत लौटने पर प्रारंभिक समर्थन नहीं मिला।