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अंबाजी के त्रिशूलिया घाट पर स्थापित होगा 16 फीट ऊंचा ‘अखंड शक्ति त्रिशूल’

 




गांधीनगर, 14 जनवरी (हि.स.)। उत्तराखंड के उत्तरकाशी स्थित लगभग 1500 वर्ष पुराने अखंड शक्ति त्रिशूल से प्रेरित होकर अंबाजी के प्रसिद्ध त्रिशूलिया घाट पर 16 फीट ऊंचा और करीब 600 किलो वजन वाला दिव्य ‘अखंड शक्ति त्रिशूल’ स्थापित किया जाएगा। यह स्थापना शक्ति परंपरा के पुनर्जागरण का प्रतीक बनेगी।

यह पवित्र कार्य श्री आरासुरी अंबाजी माता देवस्थान ट्रस्ट के मार्गदर्शन और सहयोग से तथा जय भोले ग्रुप अहमदाबाद के सहयोग से संपन्न किया जा रहा है। पूरे आयोजन में भक्ति, श्रद्धा और सेवा भाव की झलक देखने को मिलेगी।

17 जनवरी को होंगे दर्शन प्रारंभबनासकांठा जिला कलेक्टर एवं देवस्थान ट्रस्ट के चेयरमैन मिहिर पटेल 17 जनवरी को इस अखंड शक्ति त्रिशूल का विधिवत उद्घाटन करेंगे। श्रद्धालु 21 जनवरी तक प्रतिदिन दोपहर 3 बजे से शाम 8 बजे तक इसके दर्शन कर सकेंगे। दर्शन स्थल अहमदाबाद इंजीनियर्स, सी-1 बी, 4318, रोड नं. 4-यू, फेज-4, जीआईडीसी रहेगा।

उत्तरकाशी के दिव्य त्रिशूल की प्रतिकृतिस्थापित होने वाला यह त्रिशूल उत्तरकाशी के विश्वनाथ मंदिर के पास भागीरथी नदी तट पर स्थित माता आदिशक्ति के पवित्र अखंड शक्ति त्रिशूल की प्रतिकृति है। यह केवल एक शिल्प नहीं बल्कि शक्ति, आस्था और आध्यात्मिक चेतना का प्रतीक है।

देवी महात्म्य से जुड़ी कथादेवी महात्म्य के अनुसार, जब असुरों के अत्याचार से त्रिलोक व्याकुल हो गया था, तब ब्रह्मा, विष्णु और महेश के तेज से अठारह भुजाओं वाली माता जगदंबा का प्राकट्य हुआ। भगवान शिव द्वारा अर्पित दिव्य त्रिशूल से माता ने महिषासुर का वध कर धर्म और सत्य की स्थापना की थी।

त्रिशूलिया घाट का विशेष महत्वअंबाजी का त्रिशूलिया घाट धार्मिक और आध्यात्मिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। यह मार्ग माता अंबाजी के दर्शन को जाने वाले श्रद्धालुओं के रास्ते में स्थित है, जहां पहुंचने का मार्ग थोड़ा कठिन और चढ़ाई वाला है। मान्यता है कि यहां माता की विशेष कृपा और रक्षा शक्ति विद्यमान है।

यात्रियों में बढ़ेगा आत्मविश्वासत्रिशूलिया घाट पर इस दिव्य त्रिशूल की स्थापना से यात्रियों में आत्मविश्वास, निर्भयता और आध्यात्मिक शक्ति की भावना विकसित होगी। इससे अंबाजी का पवित्र यात्रा मार्ग और अधिक सुरक्षित व आशीर्वादमय बनेगा।

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हिन्दुस्थान समाचार / यजुवेंद्र दुबे