×

राजस्थान के मिश्रोली में बेसाल्टिक ज्वाइंट्स से मिला भू-विरासत का खजाना

 






कोटा, 09 मई (हि.स.)। राजस्थान के झालावाड़ जिले के मिश्रोली कस्बे में दर्शनीय स्तम्भाकार बेसाल्टिक ज्वाइंट्स को विरासत का अटूट खजाना माना जा रहा है। भारतीय सांस्कृतिक निधि (इन्टेक) विशेषज्ञों के अनुसार, इस भू-विरासत का निर्माण 6.5 करोड़ वर्ष पहले यहां ज्वालामुखी लावे से हुआ था। देश में अन्य चार-पांच स्थानों पर ही ऐसी दुर्लभ संरचनायें पाई गई हैं। इस क्षेत्र में बेसाल्ट चट्टानों को कीमती भू-विरासत मानते हुये इसके निजी खनन पर रोक लगा दी गई है।

ये खूबसूरत दिखने वाले प्राकृतिक सघन स्तम्भ महीन दानेदार गहरे, काले एवं ग्रे रंग के पत्थर से लावा शीतलीकरण एवं मैन्यूफेक्चरिंग प्रक्रिया से निर्मित हुये हैं। ये चट्टाने 2 से 25 फीट लंबाई में हैं। इनकी बनावट चतुष्कोणीय से षटकोणीय तक है। इस दुर्लभ चट्टानी क्षेत्र को भारतीय सांस्कृतिक निधी (इन्टेक) ने भू-विरासत की सूची में शामिल किया है।

भू-वैज्ञानिक प्रो.सुरेश चौपान के अनुसार, जब गर्म लावा किसी नदी में बहता है और अचानक ठंडा होने पर यह सिकुड़ जाता है। जिससे यह षट्भुज आकार में खडे़ कॉलम की तरह दिखाई देता है। ऐसे पत्थर स्तम्भ के रूप में प्राकृतिक चट्टान की तरह दिखाई देते हैं। जिसे बेसाल्टिक स्तम्भ कहा जाता है।

देश में हजारों वर्ष पहले जहां-जहां ज्वालामुखी विस्फोट हुये, उसके आसपास कॉल्यूमनर बेसाल्ट की चट्टानें निर्मित हो गई। महाराष्ट्र में मुंबई, यवतमाल, कोल्हापुर व नांदेड में भी ऐसी दुर्लभ चट्टानें मौजूद हैं। वर्ष 2021 में यवतमाल जिले में सडक निर्माण के दौरान बेसाल्ट चट्टान के स्तम्भ का पता चला़। इसी तरह, वानी पंधकवाडा क्षेत्र के शबली पारदी गांव में भी ऐसी दुर्लभ चट्टान पायी गई। जिसे 6 करोड़ वर्ष पहले ज्वालामुखी के लावा से बनी चट्टान माना गया। कर्नाटक में सेंट मेरी द्वीप पर बेसाल्टिक चट्टान केें होने से यह क्षेत्र जियोे हेरिटेज के रूप में पर्यटक स्थल बना गया है। तेलंगाना के बेरीलाल गुडा गांव में भी प्राचीन बेसाल्टिक चट्टान सामने आई है। मध्यप्रदेश में इंदौर जिले की देपालपुर तहसील के गवासा गांव में भी बेसाल्ट चट्टानों की पांच लोकेशन को सुरक्षित रखा गया है। इसे एनएच-59 हाईवे पर गुजरात से इंदौर के बीच सडक निर्माण में उपयोग करने का प्रस्ताव है।

हिन्दुस्थान समाचार / अरविन्द