सरकारी अस्पतालों में मुफ्त दवा वितरण में बिहार फिर नंबर-वन, लगातार 17 महीने से देश में अव्वल
पटना, 21 फरवरी (हि.स.)। सरकारी अस्पतालों में मरीजों को मुफ्त दवा उपलब्ध कराने के मामले में बिहार ने एक बार फिर देश में पहला स्थान हासिल किया है। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय, भारत सरकार की ओर से जारी ड्रग एंड वैक्सीन डिस्ट्रीब्यूशन मैनेजमेंट सिस्टम (डीवीडीएमएस) के केंद्रीय डैशबोर्ड की रैंकिंग में बिहार लगातार 17वें महीने शीर्ष स्थान पर बना हुआ है।
डीवीडीएमएस की ताजा रैंकिंग के अनुसार, जनवरी 2026 में बिहार को 80.89 अंक प्राप्त हुए हैं। इस प्रदर्शन के साथ बिहार ने राजस्थान को पीछे छोड़ते हुए अपना पहला स्थान बरकरार रखा है, जिसे 77.65 अंक मिले हैं। वहीं पंजाब 71.31 अंकों के साथ तीसरे स्थान पर रहा।
बिहार ने पहली बार सितंबर 2024 में 77.20 अंक हासिल कर देश में पहला स्थान प्राप्त किया था। तब से लेकर अब तक राज्य लगातार अपनी शीर्ष स्थिति बनाए हुए है, जो राज्य की स्वास्थ्य व्यवस्था की मजबूती और प्रभावी प्रबंधन को दर्शाता है।
सरकारी अस्पतालों में मरीजों को मुफ्त दवाएं उपलब्ध कराने की व्यवस्था की निगरानी डीवीडीएमएस केंद्रीय डैशबोर्ड के माध्यम से की जाती है। इस प्रणाली के तहत हर महीने राज्यों को अंक दिए जाते हैं, जो दवाओं की उपलब्धता, वितरण व्यवस्था और प्रबंधन की गुणवत्ता पर आधारित होते हैं। इस कसौटी पर बिहार लगातार 17 महीनों से खरा उतर रहा है।
देश के 29 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की इस रैंकिंग में निचले पायदान पर नागालैंड (28.21 अंक), लक्षद्वीप (29.46 अंक) और मणिपुर (31.02 अंक) रहे।
स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के अनुसार, मुफ्त दवा वितरण व्यवस्था को मजबूत करने के लिए राज्य में व्यापक कार्ययोजना लागू की गई है। इसके तहत आवश्यक दवा सूची (ईडीएल) का निर्धारण और नियमित अनुपालन, दवाओं के वितरण की तिथिवार निगरानी, रेफरल पॉलिसी लागू कर मरीजों को उचित संस्थानों तक पहुंचाना, डीवीडीएमएस पोर्टल के माध्यम से दवाओं की उपलब्धता की निगरानी, दवा भंडारपाल, अस्पताल प्रबंधक और प्रभारी के लिए सख्त जवाबदेही, आभा (आयुष्मान भारत हेल्थ अकाउंट) के माध्यम से मरीजों का पंजीकरण तथा दवाओं की समय पर आपूर्ति के लिए परिवहन व्यवस्था सुनिश्चित करना जैसे उपाय शामिल हैं। इन कदमों से अस्पतालों में दवाओं की उपलब्धता और प्रबंधन में उल्लेखनीय सुधार हुआ है।
पारदर्शिता बढ़ाने के लिए राज्य के सभी सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों में क्यूआर कोड की सुविधा शुरू की गई है। मरीज और उनके परिजन इस क्यूआर कोड को स्कैन कर अस्पताल में मुफ्त उपलब्ध दवाओं की जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।
बिहार में कुल 10,626 सरकारी स्वास्थ्य केंद्र कार्यरत हैं, जिनमें मेडिकल कॉलेज अस्पताल से लेकर प्राथमिक स्वास्थ्य उपकेंद्र तक शामिल हैं। इन स्वास्थ्य केंद्रों पर हर साल लगभग 6.5 करोड़ मरीज इलाज के लिए पहुंचते हैं और बड़ी संख्या में मरीजों को मुफ्त दवाएं उपलब्ध कराई जाती हैं। इससे गरीब और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के मरीजों को विशेष लाभ मिल रहा है।
राज्य के विभिन्न स्तर के अस्पतालों में मुफ्त उपलब्ध दवाओं की संख्या इस प्रकार है— मेडिकल कॉलेज अस्पताल में 611 प्रकार की दवाएं (ओपीडी 356, आईपीडी 255), जिला अस्पताल में 456 दवाएं (ओपीडी 287, आईपीडी 169), अनुमंडलीय अस्पताल में 313 दवाएं (ओपीडी 212, आईपीडी 101), सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में 309 दवाएं (ओपीडी 212, आईपीडी 97), प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में 294 दवाएं (ओपीडी 201, आईपीडी 93), शहरी पीएचसी में 180 दवाएं, अतिरिक्त पीएचसी में 193 दवाएं (ओपीडी 140, आईपीडी 53), हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर में 151 दवाएं और स्वास्थ्य उपकेंद्र में 97 प्रकार की दवाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं।
इस उपलब्धि पर प्रतिक्रिया देते हुए बिहार के स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय ने कहा कि सरकारी अस्पतालों में मुफ्त दवा वितरण के क्षेत्र में बिहार का प्रदर्शन पूरे देश के लिए एक मिसाल बन गया है। उन्होंने कहा कि लगातार 17 महीने तक पहला स्थान बनाए रखना इस बात का प्रमाण है कि राज्य की स्वास्थ्य व्यवस्था पारदर्शिता, दक्ष प्रबंधन और सतत निगरानी के साथ प्रभावी ढंग से कार्य कर रही है।
उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य विभाग इस उत्कृष्ट प्रदर्शन को आगे भी बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध है, ताकि राज्य के सभी जरूरतमंद मरीजों को बेहतर और मुफ्त स्वास्थ्य सुविधाएं मिलती रहें।------------
हिन्दुस्थान समाचार / गोविंद चौधरी