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सरस मेला: पहले ही दिन 20 लाख 28 हजार से अधिक के उत्पादों की हुई खरीद-बिक्री

 








पटना, 21 सितंबर (हि.स.)। ग्रामीण शिल्पकारों एवं उद्यमियों का महाकुंभ बिहार सरस मेला ज्ञान भवन, पटना में पूरी भव्यता के साथ जारी है। मेले में बिहार सहित 15 राज्यों की स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी हुनरमंद महिलाएं अपने-अपने प्रदेश के हुनर, शिल्प, संस्कृति और पारंपरिक व्यंजनों से आगंतुकों को रूबरू करा रही हैं।

बिहार सरस मेला का शुभारंभ हाेते ही मेले को लेकर पटना वासियों में जबरदस्त उत्साह देखने को मिला। पहले दिन 20 सितंबर को 24 हजार से अधिक लोगों ने मेले का भ्रमण किया और विभिन्न राज्यों के उत्पादों का लुत्फ उठाया। पहले दिन ही मेले में 20 लाख 28 हजार रुपये से अधिक के उत्पादों की खरीद-बिक्री हुई है, जो ग्रामीण महिला उद्यमियों के लिए एक बड़ी सफलता है। यह आंकड़ा दर्शाता है कि शहरी उपभोक्ता ग्रामीण उत्पादों, विशेषकर हस्तनिर्मित, जैविक और पारंपरिक उत्पादों को कितना पसंद कर रहे हैं।

सरस मेले के दूसरे दिन ज्ञान भवन सभागार में बिहार ग्रामीण जीविकोपार्जन प्रोत्साहन समिति (जीविका) और अर्न्स्ट एंड यंग संस्था के तत्वावधान में क्रेता-विक्रेता (बॉयर्स एंड सेलर्स मीट) संवाद का आयोजन किया गया। इस संवाद का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण उत्पादों को बड़े बाजार, ब्रांडिंग और स्थायी विपणन से जोड़ना था। इस संवाद कार्यक्रम में बिहार के विशिष्ट खाद्य पदार्थों जैसे - सुगंधित गोविंद भोग चावल, सोनाचूर चावल, मिथिला का सुप्रसिद्ध मखाना, मिलेट्स (मोटे अनाज), केला चिप्स और पाउडर, हल्दी, जीरा एवं मिर्च पाउडर समेत कई उत्पादों के उत्पादन, गुणवत्ता संवर्धन, विपणन और ब्रांडिंग पर गहन चर्चा हुई।

कार्यक्रम में उत्पादक दीदियों के साथ ही देश की प्रतिष्ठित कंपनियों और संस्थाओं के प्रतिनिधियों ने बतौर क्रेता भाग लिया। इनमें वसंत इम्पेक्स, डीटीपीसी, ड्यूलक्राफ्ट प्राइवेट लिमिटेड, फ्लिपक्राफ्ट, विजया वेंचर्स और नोबेल संस्था के प्रतिनिधि प्रमुख रूप से शामिल थे।

क्रेताओं ने उत्पादों की गुणवत्ता, पैकेजिंग और निरंतर आपूर्ति को लेकर अपने सुझाव दिए और भविष्य में बड़े ऑर्डर के लिए रुचि दिखाई। माैके पर बतौर विशेषज्ञ महुआ रॉय चौधरी, कार्यक्रम समन्वयक, जीविका, डॉ. राकेश कुमार सिंह, राज्य परियोजना प्रबंधक, जीविका एवं माधवी चौधरी, जिला परियोजना प्रबंधक, जीविका उपस्थित रहीं।

विशेषज्ञों ने कहा कि बिहारिका ब्रांड के माध्यम से जीविका उत्पादों को अब राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पहचान मिलेगी।

सरस मेले में बिहार की मधुबनी पेंटिंग, बावन बूटी, सुजनी कला, सिक्की शिल्प, टेराकोटा, भागलपुरी सिल्क, तो वहीं राजस्थान की लाख की चूड़ियां, गुजरात का बंधेज, महाराष्ट्र की पैठणी, गोवा का हस्तशिल्प , पश्चिम बंगाल का जूट शिल्प, असम का बांस शिल्प और दक्षिण भारतीय मसालों के स्टॉल लोगों के आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं।

जीविका दीदियों द्वारा ही संचालित “शिल्पग्राम महिला उत्पादक समूह लिमिटेड स्टॉल पर राज्य भर से जीविका दीदियों द्वारा बनाये गए परिधान एवं शिल्प को एकत्रित कर प्रदर्शनी सह बिक्री हो रही हैl “मधुग्राम महिला उत्पादक समूह लिमिटेड” के स्टॉल पर शुद्ध एवं पौष्टिक मधु की बिक्री की जा रही है l जीविका दीदियों के अन्य स्टॉल के उत्पाद भी आकर्षण के खास केंद्र बने हुए हैं l

फूड कोर्ट में जीविका दीदी की रसोई के स्टॉल पर लिट्टी-चोखा समेत देशी व्यंजन, अन्य स्टाल पर अचार, पापड़, चाट, आयुर्वेदिक पाचक आदि पारंपरिक व्यंजनों का लोग आनंद ले रहे हैं। व्यंजनों के स्टॉल पर आगंतुक देशी व्यंजनों का स्वाद तो चख ही रहे हैं घर के लिए भी विभिन्न प्रकार के अचार, पापड़, दनवरी, अदवरी, सत्तू, मखाना, कतरनी चावल, चुड़ा और गुड़ का रवा जैसे देशी व्यंजन ले जा रहे हैंl प्राकृतिक सूखे फूल, बोनसाई, सेकुलुन ऑक्सीजन, जैविक रस हल्दी और पर्यावरण को शुद्ध रखने वाले पौधे भी आगंतुकों को खूब लुभा रहे हैंl

मेले में आने वाले आगंतुक अंजली शुक्ला ने कहा कि सरस मेला का आयोजन एक ही छत के नीचे पूरे भारत की संस्कृति को देखने का अद्भुत अवसर है और यहाँ के उत्पाद शुद्ध, जैविक और किफायती हैं।

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हिन्दुस्थान समाचार / चंदा कुमारी