डिजिटल दौर में संस्कारों की अलख, सूरत स्कूल में विद्यार्थियों को भेंट की गई रामायण
सूरत, 19 जून (हि.स.)। डिजिटल युग में जहां बच्चों का अधिकांश समय मोबाइल और सोशल मीडिया के बीच गुजर रहा है, वहीं सूरत महानगरपालिका संचालित एक विद्यालय ने शिक्षा के साथ संस्कारों का समन्वय करने की अनूठी पहल की है। वेरियाव स्थित प्राथमिक विद्यालय में कक्षा-8 के विद्यार्थियों को भारतीय संस्कृति और जीवन मूल्यों से जोड़ने के उद्देश्य से वाल्मीकि कृत रामायण पुस्तिका का वितरण किया गया।
सूरत महानगरपालिका की नगर प्राथमिक शिक्षा समिति संचालित कविश्री रमेश पारेख प्राथमिक विद्यालय क्रमांक-316, ताड़वाड़ी-वेरियाव में आयोजित कार्यक्रम के दौरान एक दानदाता के सहयोग से कक्षा-8 में अध्ययनरत लगभग 100 विद्यार्थियों को रामायण की प्रतियां भेंट की गईं।
विद्यालय द्वारा विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास के लिए पिछले कई वर्षों से विशेष प्रयास किए जा रहे हैं। इसी कड़ी में गत वर्ष कक्षा-8 के विद्यार्थियों को श्रीमद्भगवद्गीता भेंट की गई थी।
गीता के माध्यम से विद्यार्थियों तक कर्मयोग, कर्तव्यनिष्ठा और जीवन मूल्यों का संदेश पहुंचाने का प्रयास किया गया था। इस परंपरा को आगे बढ़ाते हुए इस वर्ष रामायण का वितरण किया गया, ताकि विद्यार्थी भगवान श्रीराम के आदर्श जीवन, माता-पिता की सेवा, सत्यनिष्ठा, वचनपालन, त्याग और आदर्श मानव जीवन के मूल्यों को समझ सकें। कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों को रामायण के आध्यात्मिक, नैतिक और सांस्कृतिक महत्व की विस्तृत जानकारी दी गई। वक्ताओं ने कहा कि रामायण केवल एक धार्मिक ग्रंथ नहीं, बल्कि जीवन जीने की कला सिखाने वाला महान ग्रंथ है। इसमें वर्णित आदर्श आज भी उतने ही प्रासंगिक हैं जितने प्राचीन काल में थे।
विद्यालय के शिक्षकों ने बताया कि शिक्षा का उद्देश्य केवल परीक्षा में अच्छे अंक प्राप्त करना नहीं, बल्कि एक अच्छे और जिम्मेदार नागरिक का निर्माण करना भी है। रामायण और गीता जैसे ग्रंथ विद्यार्थियों में संवेदनशीलता, अनुशासन, कर्तव्यनिष्ठा, बड़ों के प्रति सम्मान तथा समाज के प्रति जिम्मेदारी की भावना विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
इस अवसर पर उपस्थित अतिथियों ने विद्यार्थियों को नियमित अध्ययन करने तथा भारतीय संस्कृति और संस्कारों से जुड़े रहने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि यदि बच्चे बचपन से ही ऐसे प्रेरणादायी ग्रंथों का अध्ययन करेंगे तो उनके व्यक्तित्व में सकारात्मक परिवर्तन आएगा और वे भविष्य में संस्कारी एवं जिम्मेदार नागरिक बन सकेंगे।
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हिन्दुस्थान समाचार / यजुवेंद्र दुबे