खूंटी में सड़क हादसों से बढ़ी चिंता, दो महीने में 32 लोगों की मौत
खूंटी, 07 मार्च (हि.स.)। झारखंड के खूंटी जिले में लगातार बढ़ रही सड़क दुर्घटनाओं ने लोगों की चिंता बढ़ा दी है। आंकड़ों के अनुसार इस वर्ष 3 जनवरी से 5 मार्च के बीच जिले के विभिन्न थाना क्षेत्रों में हुए अलग-अलग सड़क हादसों में 32 लोगों की मौत हो चुकी है। मृतकों में 29 लोग आदिवासी समुदाय से जुड़े बताए जा रहे हैं, जिससे स्थानीय स्तर पर चिंता और भी बढ़ गई है।
पुलिस के अनुसार, जिले के अलग-अलग इलाकों में तेज रफ्तार, लापरवाही और नशे की हालत में वाहन चलाना सड़क दुर्घटनाओं की प्रमुख वजह बन रहा है। कई मामलों में बाइक चालक नशे में वाहन चलाते हुए नियंत्रण खो देते हैं, जिससे गंभीर हादसे हो जाते हैं।
तोरपा के सामाजिक कार्यकर्ता संतोष जायसवाल और धर्मेन्द्र कुमार का कहना है कि सड़क हादसों के बढ़ते मामलों के पीछे शराब का सेवन एक बड़ा कारण बनकर सामने आ रहा है। उनके अनुसार, कई चालक शराब पीकर बाइक या अन्य वाहन चलाते हैं और वाहन पर नियंत्रण खो बैठते हैं। खासकर रात के समय और ग्रामीण सड़कों पर ऐसी घटनाएं अधिक देखने को मिल रही हैं।
इसके अलावा तेज रफ्तार, हेलमेट का उपयोग नहीं करना, सड़क सुरक्षा नियमों की अनदेखी और खराब सड़क व्यवस्था भी दुर्घटनाओं की वजह बन रही है। ग्रामीण क्षेत्रों में अक्सर लोग बिना हेलमेट के बाइक चलाते हैं और कई बार एक ही बाइक पर तीन-तीन लोग सवार हो जाते हैं, जिससे हादसों की संभावना बढ़ जाती है।
मुरहू थाना क्षेत्र के राजा कुंजला ग्राम समिति के अध्यक्ष और भाजपा के पूर्व जिलाध्यक्ष काशीनाथ महतो तथा ओम प्रकाश कश्यप ने कहा कि सड़क सुरक्षा को लेकर व्यापक जागरूकता अभियान चलाने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि पुलिस और प्रशासन को नियमित रूप से वाहन जांच अभियान चलाकर शराब पीकर वाहन चलाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करनी चाहिए।
इस संबंध में जिला परिवहन पदाधिकारी हरि शंकर बारीक ने बताया कि सड़क दुर्घटनाओं को रोकने के लिए लगातार अभियान चलाए जा रहे हैं और लोगों से यातायात नियमों का पालन करने की अपील की जा रही है। उन्होंने कहा कि पंचायत स्तर पर सड़क सुरक्षा समितियों का गठन किया जाएगा और सड़क सुरक्षा मित्रों को जागरूकता अभियान में लगाया जाएगा, ताकि ग्रामीण क्षेत्रों में भी लोगों को यातायात नियमों के प्रति जागरूक किया जा सके।
सेवानिवृत्त शिक्षक पंचम साहू ने कहा कि सड़क हादसों को रोकने के लिए प्रशासन और आम लोगों को मिलकर ठोस कदम उठाने होंगे। यदि लोग स्वयं सावधानी बरतें और यातायात नियमों का पालन करें तो कई दुर्घटनाओं को रोका जा सकता है।
उल्लेखनीय है कि सड़क हादसों में जान गंवाने वालों में 3 जनवरी को रोशन डोडराय, 4 जनवरी को माणिक पाहन, 8 जनवरी को सुशील प्रवीण तिरु और सुनील भेंगरा, 12 जनवरी को भरत उरांव, 13 जनवरी को एक अज्ञात व्यक्ति, 17 जनवरी को रवि मुंडा, 20 जनवरी को गुसलु बडिंग और मंगल सोय, 23 जनवरी को टीपला होरो और एतवारी, 25 जनवरी को मसीह कच्छप, 29 जनवरी को बंधन देवी, 30 जनवरी को रसिक भेंगरा, 31 जनवरी को रवि मुंडा शामिल हैं।
इसी प्रकार से 1 फरवरी को लोर सिंह मुंडा, 2 फरवरी को किश्तोमणि देवी, 11 फरवरी को महतो होरो, 16 फरवरी को हुए हादसे में इस्तानिस्लास कुजूर, ग्रेगोरी बिलुंग और संधू मुंडा, 21 फरवरी को चितरंजन कुंडू और बिमल कंडुलना, 22 फरवरी को सुनील सोय मुर्मू, 23 फरवरी को टिपना मुंडा, 27 फरवरी को प्रदीप महतो और संदीप प्रजापति, 28 फरवरी को पुरन प्रसाद पूर्ति और मदिराय मुंडा, 4 मार्च को रमेश उरांव और मुन्ना उरांव तथा 5 मार्च को रोशन भेंगरा सड़क हादसे का शिकार हो गए हैं।--------------
हिन्दुस्थान समाचार / अनिल मिश्रा