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देवघर का आम्रपाली आम पहुंचा दुबई, अंतरराष्ट्रीय बाजार में मिली नई पहचान

 




देवघर, 07 जुलाई (हि.स.)। झारखंड के देवघर जिले के लिए यह ऐतिहासिक उपलब्धि है कि यहां के बागानों में उत्पादित प्रसिद्ध आम्रपाली आम ने अंतरराष्ट्रीय बाजार में अपनी पहचान बनानी शुरू कर दी है। देवघर से निर्यात की गई आम्रपाली आम की पहली खेप संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के दुबई स्थित प्रतिष्ठित लुलु रिटेल स्टोर तक सफलतापूर्वक पहुंच गई है, जहां इसकी बिक्री भी शुरू हो चुकी है। इसे जिले के किसानों, विशेषकर महिला किसानों के लिए बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है।

देवघर से करीब एक टन आम्रपाली आम को अंतरराष्ट्रीय गुणवत्ता मानकों के अनुरूप विशेष पैकेजिंग के साथ दुबई भेजा गया। निर्यात से पहले विशेषज्ञों की निगरानी में आमों की गुणवत्ता, आकार, रंग, मिठास, परिपक्वता और ताजगी की जांच की गई। इसके बाद ग्रेडिंग और चयन की प्रक्रिया पूरी कर आधुनिक पैकेजिंग के माध्यम से उन्हें इस तरह तैयार किया गया कि लंबी दूरी के परिवहन के दौरान उनकी गुणवत्ता, स्वाद और प्राकृतिक सुगंध सुरक्षित बनी रहे। अंतरराष्ट्रीय बाजार में स्वीकार्यता के लिए गुणवत्ता, स्वच्छता और आकर्षक पैकेजिंग को महत्वपूर्ण माना जाता है और देवघर के आम इन मानकों पर खरे उतरे हैं।

यह पहला अवसर है जब देवघर जिले के किसानों, विशेषकर महिला स्वयं सहायता समूहों (एसएचजी) और महिला कृषकों द्वारा उत्पादित किसी फल को सीधे अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंच मिली है। इससे न केवल महिला किसानों के परिश्रम को वैश्विक पहचान मिली है, बल्कि यह भी साबित हुआ है कि आधुनिक तकनीक, प्रशिक्षण और बेहतर विपणन व्यवस्था के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों की महिलाएं भी विश्वस्तरीय कृषि उत्पाद तैयार कर सकती हैं।

इस सफलता के पीछे मोहनपुर आजीविका महिला किसान प्रोड्यूसर कंपनी (एफपीओ) की महत्वपूर्ण भूमिका रही। संस्था से जुड़ी महिला किसानों ने वैज्ञानिक पद्धति से आम्रपाली आम की खेती की। बागों के रखरखाव, पोषक तत्व प्रबंधन, सिंचाई, कीट एवं रोग नियंत्रण, समय पर तुड़ाई, ग्रेडिंग, पैकिंग और गुणवत्ता परीक्षण तक प्रत्येक चरण में आधुनिक कृषि तकनीकों का पालन किया गया। इसी का परिणाम है कि उत्पाद अंतरराष्ट्रीय निर्यात के लिए आवश्यक गुणवत्ता मानकों पर खरा उतरा।

पूरी प्रक्रिया में कृषि एवं प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (एपीईडीए) का भी महत्वपूर्ण सहयोग रहा। एपीईडीए ने किसानों और एफपीओ को निर्यात संबंधी मानकों, गुणवत्ता नियंत्रण, फाइटोसैनिटरी आवश्यकताओं, ग्रेडिंग, पैकेजिंग, भंडारण और विपणन का प्रशिक्षण दिया। साथ ही आवश्यक प्रमाणन, निर्यात संबंधी औपचारिकताओं और विदेशी बाजारों से संपर्क स्थापित करने में भी सहयोग किया। इससे किसानों को निर्यात प्रक्रिया और वैश्विक बाजार की मांग को समझने का अवसर मिला।

देवघर का आम्रपाली आम अपने विशिष्ट स्वाद, प्राकृतिक मिठास, कम रेशेदार गूदे, आकर्षक रंग और लंबे समय तक ताजगी बनाए रखने की क्षमता के कारण पहले से ही झारखंड सहित देश के विभिन्न हिस्सों में लोकप्रिय रहा है। अब दुबई जैसे अंतरराष्ट्रीय बाजार में इसकी मौजूदगी इस बात का संकेत है कि झारखंड के बागवानी उत्पाद वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धा करने की क्षमता रखते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि गुणवत्ता और नियमित आपूर्ति बनाए रखने पर भविष्य में देवघर का आम्रपाली आम अंतरराष्ट्रीय बाजार में एक मजबूत ब्रांड के रूप में स्थापित हो सकता है।

उपायुक्त सौरभ कुमार भुवानिया ने इस उपलब्धि पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि यह केवल एक टन आम के निर्यात तक सीमित नहीं है, बल्कि जिले के किसानों के आर्थिक सशक्तीकरण, महिला उद्यमिता और कृषि क्षेत्र के विकास की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि है। उन्होंने कहा कि इससे किसानों को उनकी उपज का बेहतर मूल्य मिलेगा, आय बढ़ेगी और कृषि को लाभकारी व्यवसाय के रूप में विकसित करने में मदद मिलेगी। उन्होंने विश्वास जताया कि इस सफलता के बाद अधिक से अधिक किसान निर्यातोन्मुख खेती से जुड़ेंगे और अंतरराष्ट्रीय बाजार की आवश्यकताओं के अनुरूप उत्पादन करेंगे।

उपायुक्त ने कहा कि जिला प्रशासन किसानों को आधुनिक कृषि तकनीकों, उन्नत बागवानी, गुणवत्ता सुधार, मूल्य संवर्धन, पैकेजिंग, कोल्ड चेन और विपणन से जोड़ने के लिए लगातार प्रयास कर रहा है। किसानों को प्रशिक्षण, तकनीकी सहायता और बाजार उपलब्ध कराने की दिशा में विभिन्न योजनाएं संचालित की जा रही हैं। उन्होंने बताया कि प्रशासन का उद्देश्य किसानों को केवल स्थानीय मंडियों तक सीमित न रखकर राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजारों से जोड़ना है।

उन्होंने कहा कि आम्रपाली आम के सफल निर्यात के बाद अब जिले के अन्य कृषि एवं बागवानी उत्पादों को भी वैश्विक बाजार तक पहुंचाने की दिशा में योजनाबद्ध प्रयास किए जाएंगे। सब्जियां, फल, मसाले, शहद और प्रसंस्कृत खाद्य उत्पादों की निर्यात संभावनाओं का भी अध्ययन किया जा रहा है।

कृषि विशेषज्ञों के अनुसार इस तरह के निर्यात से किसानों को स्थानीय बाजार की तुलना में बेहतर मूल्य मिलेगा, जिससे उनकी आय में वृद्धि होगी। साथ ही ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे, महिला स्वयं सहायता समूहों की आर्थिक स्थिति मजबूत होगी और युवाओं का रुझान वैज्ञानिक एवं व्यावसायिक कृषि की ओर बढ़ेगा। विशेषज्ञों का यह भी मानना है कि यदि देवघर के आम्रपाली आम को भविष्य में भौगोलिक संकेतक (जीआई) टैग, प्रभावी ब्रांडिंग और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर व्यापक प्रचार-प्रसार का लाभ मिलता है, तो यह विदेशी बाजारों में और अधिक लोकप्रिय हो सकता है।

देवघर से आम्रपाली आम की पहली अंतरराष्ट्रीय खेप का दुबई पहुंचना केवल एक निर्यात उपलब्धि नहीं, बल्कि झारखंड की कृषि क्षमता, महिला किसानों की मेहनत, वैज्ञानिक खेती और सरकारी संस्थाओं के समन्वित प्रयासों का भी प्रमाण है। कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि यह सफलता राज्य में कृषि निर्यात को नई दिशा देने के साथ किसानों की आय बढ़ाने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

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हिन्दुस्थान समाचार / Anup Kumar Roy