झारखंड : मौत का दूसरा नाम बनी रामगढ़ की चुट्टूपालू घाटी, हर सफर में सताता है खौफ
-5 वर्षों में सिर्फ रामगढ़ थाने में दर्ज हुए ढाई हजार से अधिक मामले
रामगढ़, 01 अक्टूबर (हि.स.)। झारखंड अपनी खूबसूरत वादियों के लिए काफी प्रसिद्ध है। लेकिन इन खूबसूरत वादियों में चार चांद लगाने वाली घाटियां लोगों को अपने खौफनाक मंजर का भी दृश्य दिखाती रहती है।
ऐसा ही एक घाटी रांची-पटना राष्ट्रीय राजमार्ग 33 पर भी स्थित है। रामगढ़ जिले की चुट्टूपालू घाटी अपने अंदर खूबसूरत दृश्य को समेटे हुए हैं। लेकिन इस रास्ते से गुजरने वाले हर राहगीर को मौत का डर भी सताता रहता है। रांची की ओर से आने वाली गाड़ियां कब अनियंत्रित हो जाती हैं, और कब पलक झपकते मौत की घाटी में समा जाती है, इसका पता किसी को नहीं चल पाता। कई बार ट्रक और ट्रेलर मौत बनकर छोटे और बड़े वाहनों को रौंदते हुए निकल जाते हैं।
इस घाटी में मौत का नंगा नाच अक्सर होता रहता है। हालात ऐसे हैं कि चुट्टूपालू घाटी में दुर्घटनाओं को रोकने के लिए एनएचएआई की टीम, रामगढ़ जिला प्रशासन की टीम और यहां तक कि पुलिस पदाधिकारी भी हजारों बार प्रयास कर चुके हैं। लेकिन उन हजारों प्रयासों का नतीजा शून्य ही है। जब भी कोई नया आईडिया एनएचएआई की टीम अप्लाई करती है, तब तक घाटी के दूसरे स्थान पर कोई बड़ा हादसा हो जाता है। 5 किलोमीटर लंबी चुट्टूपालू घाटी से गुजरकर हर यात्री राहत की सांस लेता है।
जिला प्रशासन की ओर से भी कई उपायुक्तों ने इस घाटी में दुर्घटना को रोकने के लिए प्रयास किए। लेकिन नतीजा शून्य ही रहा। पुलिस प्रशासन की ओर से वरीय अधिकारियों ने भी एनएचएआई और यहां तक कि केंद्रीय पथ निर्माण मंत्री तक को पत्र लिखा। लेकिन सुधार की गुंजाइश शायद प्रकृति ने ही तय नहीं कर रखी है।
चुट्टूपालू घाटी में गाड़ियों की स्पीड और उनका ब्रेक आपस में तालमेल बना नहीं पाते हैं। टोल प्लाजा पार करने के बाद जैसे ही गाड़ियां रामगढ़ की ओर बढ़ती है, चुट्टपालू घाटी की शुरुआत हो जाती है। एक किलोमीटर चलने के बाद सड़क का ढलान ड्राइवर को एक्सीलेटर से पैर हटाने पर मजबूर कर देता है। साथ ही गाड़ियों की स्पीड अचानक बढ़ जाती है। इसके बाद गाड़ी का ब्रेक भी काम करना बंद कर देता है। यही वजह है कि ओवरलोडेड और भारी वाहन इस घाटी में आउट ऑफ कंट्रोल हो जाते हैं।
एनएचएआई की टीम के द्वारा हर दुर्घटना के बाद समीक्षा की जाती है। जिला प्रशासन भी समीक्षा में उन कारणों का पता लगा है, जिससे गाड़ियां आउट ऑफ कंट्रोल होती हैं। हजारों दुर्घटनाओं के बाद भी सभी की एक ही कहानी सामने आती है, जिसमें ब्रेक फेल होना आम समस्या है।
पिछले 5 वर्षों में सिर्फ रामगढ़ थाने में ढाई हजार से अधिक सड़क दुर्घटना के मामले दर्ज किए गए हैं। यह दुर्घटना सिर्फ चुट्टूपालू घाटी में ही हुआ है। बस, ट्रक, मोटरसाइकिल, कार, ट्रेलर जैसी गाड़ियां तास की पत्तों की तरह यहां बिखरते हुए लोगों ने देखा है। इन दुर्घटनाओं में जान माल की भारी क्षति भी होती है। कोविड के दौरान वर्ष 2020 और 2021 में इस घाटी में दुर्घटना नहीं के बराबर हुई। लेकिन वर्ष 2022 में जैसे ही यातायात शुरू हुआ, इस घाटी में 415 दुर्घटनाएं हुई, जिसमें 167 लोगों की मौतें हुई। वर्ष 2023 में इस घाटी में दुर्घटनाओं की संख्या बढ़कर 523 हुई। इन दुर्घटनाओं में भी 192 लोगों की जान गई। वर्ष 2024 में 487 सड़क दुर्घटनाओं में 123 लोगों की जान चली गई। वर्ष 2025 में रामगढ़ थाने में 683 हादसे हुए, जिसमें 253 लोगों की जान चली गई। वर्ष 2026 में 9 महीने बीत चुके हैं और चुट्टूपालु घाटी में लगभग 400 सड़क दुर्घटना हो चुकी है। इसमें 113 लोगों की जान जा चुकी हैं।
क्या कहते हैं रामगढ़ उपायुक्त ऋतुराज
रामगढ़ जिला उपायुक्त ऋतुराज ने बताया कि सड़क दुर्घटना रामगढ़ जिले के लिए एक अभिशाप की तरह है। चुट्टूपालू घाटी में जब भी सड़क हादसे होते हैं वह बेहद हृदय विदारक होते हैं। कई बार ऐसा होता है जब लोगों की लाशे उठाने में भी पुलिस पदाधिकारी का कलेजा दहल जाता है। इस घाटी के एलाइनमेंट को सुधारने के लिए प्रयास किया जा रहा है। एनएचएआई के प्रोजेक्ट डायरेक्टर और उनके वरीय अधिकारियों को भी घाटी के एलाइनमेंट को सुधार करने के लिए कहा गया है। कई प्रोजेक्ट एनएचएआई के तरफ से बनाए भी गए हैं, ताकि जल्द ही घाटी में दुर्घटना के संभावनाओं को काम किया जा सके। उस पर जिला प्रशासन भी काफी गंभीरता से प्रयास कर रहा है।
क्या कहते हैं रामगढ़ एसपी मुकेश कुमार लुनायत
रामगढ़ एसपी मुकेश कुमार लुनायत ने कहा कि एनएचएआई के द्वारा पहले बनाए गए इस प्रोजेक्ट में कई खामियां हैं। जिसकी वजह से घाटी में भारी वाहनों का ब्रेक फेल हो जाता है। जितनी बार भी दुर्घटनाएं हुई है, पुलिस प्रशासन ने जांच की है और हर बार यही समस्या सामने आई है। कई बार तो एनएचएआई के अधिकारियों पर भी प्राथमिकी दर्ज कर दी गई है। लेकिन इसका निदान करना बेहद आवश्यक है। पुलिस प्रशासन का सहयोग भी जिला प्रशासन को है और एनएचएआई के अधिकारियों के साथ भी लगातार पत्राचार हो रहा है।
क्या कहते हैं एनएचएआई के प्रोजेक्ट डायरेक्टर
एनएचएआई के प्रोजेक्ट डायरेक्टर अमित रौशन ने कहा कि चुट्टूपालू घाटी में दुर्घटना रोकने के लिए काफी सारे प्रयास किए गए हैं। रामगढ़ जिला प्रशासन के निर्देश पर रीजिड बैरियर को भी तोड़ा गया है। साथ ही स्पीड को कम करने के लिए ब्रेकर्स भी लगाए गए हैं। इसके अलावा घाटी में रौशनी के लिए लाइट भी लगाए गए हैं। कई स्थानों पर कमियां हैं, जिसे पूरा करने का प्रयास किया जा रहा है।
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हिन्दुस्थान समाचार / अमितेश प्रकाश