जम्मू-कश्मीर में रेलवे विस्तार ने बदली कनेक्टिविटी की तस्वीर, नए युग की हुई शुरुआत
जम्मू, 06 सितंबर (हि.स.)। जम्मू-कश्मीर में रेलवे नेटवर्क अब अपनी उस चरम सीमा पर पहुंच चुका है, जहां जम्मू और कश्मीर घाटी के बीच सीधे रेल संपर्क का सपना हकीकत बन गया है। अगस्त तक यह परियोजना पूरी तरह चालू हो चुकी है और कश्मीर को देश के बाकी रेल नेटवर्क से ऑल-वेदर कनेक्टिविटी मिल रही है।
उधमपुर-श्रीनगर-बारामूला रेल लिंक यानी यूएसबीआरएल के पूरा होने के बाद जम्मू संभाग और कश्मीर घाटी के बीच रेल कनेक्टिविटी में बड़ा बदलाव आया है। 272 किलोमीटर लंबी यूएसबीआरएल परियोजना उधमपुर, रियासी, रामबन, श्रीनगर, अनंतनाग, पुलवामा, बडगाम और बारामूला जिलों से होकर गुजरती है। इस पूरे रेल कॉरिडोर की सबसे बड़ी उपलब्धि यह है कि अब जम्मू तवी से श्रीनगर तक सीधी यात्री रेल सेवा उपलब्ध है। अप्रैल में श्रीनगर-कटरा वंदे भारत सेवा को जम्मू तवी तक बढ़ाया गया और इसे 20 कोच तक विस्तारित किया गया। नियमित सेवा 2 मई से शुरू हुई। इससे जम्मू, कटरा और श्रीनगर के बीच यात्रियों, पर्यटकों, श्रद्धालुओं, व्यापारियों और स्थानीय लोगों को बिना ट्रेन बदले यात्रा की सुविधा मिली है।
उधमपुर से कश्मीर घाटी तक रेल नेटवर्क:-
जम्मू-कश्मीर में रेलवे विस्तार का महत्वपूर्ण चरण उधमपुर-श्रीनगर-बारामूला रेल लिंक रहा है। उधमपुर-कटरा रेल सेक्शन को 2014 में चालू किया गया था। इसके बाद कटरा से बनिहाल और आगे कश्मीर घाटी को जोड़ने के लिए कठिन पहाड़ी इलाकों में बड़े पैमाने पर सुरंगों, पुलों और अत्याधुनिक रेल ढांचे का निर्माण किया गया। यूएसबीआरएल में 36 प्रमुख सुरंगें और 943 पुल हैं जबकि लगभग 119 किलोमीटर हिस्सा सुरंगों से होकर गुजरता है। इस परियोजना की खासियत केवल रेल लाइन बिछाना नहीं है बल्कि हिमालय के बेहद चुनौतीपूर्ण भूगोल के बीच सुरक्षित और सालभर चलने वाली रेल कनेक्टिविटी तैयार करना है। परियोजना के तहत लगभग 215 किलोमीटर सड़क नेटवर्क भी तैयार किया गया है जिसमें स्थानीय आबादी के इस्तेमाल वाली सड़कें शामिल हैं।
दुनिया का सबसे ऊंचा रेलवे आर्च ब्रिज:-
जम्मू-कश्मीर के रेलवे नेटवर्क की चर्चा अब चिनाब रेल ब्रिज के बिना पूरी नहीं होती। रियासी जिले में चिनाब नदी पर बना यह पुल नदी तल से करीब 359 मीटर ऊंचा और 1,315 मीटर लंबा है। इसे दुनिया का सबसे ऊंचा रेलवे आर्च ब्रिज बताया गया है। यह पुल यूएसबीआरएल का महत्वपूर्ण हिस्सा है और इसके जरिए रेल लाइन गहरी घाटियों और दुर्गम पहाड़ी क्षेत्र को पार करती है। इसी तरह अंजी खड्ड रेल पुल भारत का पहला केबल-स्टेड रेलवे ब्रिज है। यह 473 मीटर लंबा पुल है और इसमें 193 मीटर ऊंचा मुख्य पाइलन है। इन दोनों पुलों ने जम्मू-कश्मीर में रेलवे इंजीनियरिंग को देश ही नहीं बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी पहचान दिलाई है।
यूएसबीआरएल के पूरी तरह चालू होने के बाद कटरा से श्रीनगर की यात्रा का समय लगभग तीन घंटे तक रह गया है। इससे पहले सड़क मार्ग पर मौसम, ट्रैफिक और पहाड़ी रास्तों की स्थिति के कारण यात्रा समय काफी बदल जाता था और कई बार आठ से दस घंटों का सफर दो से तीन दिनों में बदल जाता था। रेल सेवा ने जम्मू-कश्मीर को एक भरोसेमंद वैकल्पिक परिवहन माध्यम दिया है। विशेष रूप से सर्दियों में भारी बर्फबारी, बारिश या भूस्खलन के कारण सड़क संपर्क प्रभावित होने की स्थिति में ऑल-वेदर रेल कनेक्टिविटी बेहद महत्वपूर्ण साबित हो हुई है। इसी वजह से यूएसबीआरएल को केवल यात्री सुविधा नहीं बल्कि जम्मू-कश्मीर की आर्थिक और रणनीतिक कनेक्टिविटी के लिए भी महत्वपूर्ण परियोजना माना जा रहा है।
वंदे भारत के साथ मिल रही आधुनिक सुविधाएं:-
मौजूदा समय में जम्मू-कश्मीर के यात्रियों को वंदे भारत जैसी आधुनिक ट्रेन सेवा का लाभ मिल रहा है। जम्मू तवी से श्रीनगर तक विस्तारित वंदे भारत सेवा में 20 कोच हैं। इससे यात्रियों को तेज, आरामदायक और सीधी यात्रा का विकल्प मिला है। रेलवे के अनुसार इस सेवा से पर्यटन, व्यापार, तीर्थयात्रा और स्थानीय आवागमन को बढ़ावा मिला है। रेल नेटवर्क के विद्युतीकरण की दिशा में भी बड़ा काम हुआ है। कश्मीर घाटी में पहली इलेक्ट्रिक ट्रेन फरवरी 2024 में चली थी और यूएसबीआरएल का पूरा रेल प्रोजेक्ट ओवरहेड इलेक्ट्रिफिकेशन के साथ तैयार किया गया है। इससे भविष्य में अधिक आधुनिक और ऊर्जा-कुशल रेल संचालन की संभावनाएं बढ़ी हैं।
जम्मू तवी, कटरा और अन्य स्टेशनों का हो रहा कायाकल्प:-
रेलवे की ओर से केवल नई रेल लाइन और ट्रेनों पर ही ध्यान नहीं दिया जा रहा, बल्कि स्टेशनों के आधुनिकीकरण पर भी काम चल रहा है। अमृत भारत स्टेशन योजना के तहत जम्मू तवी, श्री माता वैष्णो देवी कटरा, उधमपुर और बडगाम जैसे महत्वपूर्ण स्टेशनों के पुनर्विकास की प्रक्रिया जारी है। इसका उद्देश्य यात्रियों को बेहतर सुविधाएं, आधुनिक यात्री क्षेत्र और बेहतर स्टेशन इंफ्रास्ट्रक्चर उपलब्ध कराना है।
किसानों और कारोबारियों को हुआ फायदा:-
रेलवे कनेक्टिविटी का असर केवल यात्रियों तक सीमित नहीं है। यूएसबीआरएल के चलते कश्मीर के सेब, ड्राई फ्रूट्स, पश्मीना, हस्तशिल्प और अन्य उत्पादों को देश के बड़े बाजारों तक पहुंचाना आसान हुआ है। रेलवे के अनुसार इससे स्थानीय किसानों, छोटे कारोबारियों और अन्य क्षेत्र को नए बाजारों तक पहुंच बनाने में मदद मिल रही है। इसके अलावा जम्मू-कश्मीर में माल ढुलाई और लॉजिस्टिक नेटवर्क को मजबूत करने के लिए गुड्स कंसोलिडेशन टर्मिनल जैसी सुविधाओं पर भी काम किया जा रहा है। अगस्त की सरकारी जानकारी के अनुसार सांबा जिले में एक बड़ा प्रोजेक्ट चालू किया गया है जबकि कठुआ, अनंतनाग और जम्मू में अन्य जीसीटी के लिए सैद्धांतिक मंजूरी दी गई है।
जम्मू-कश्मीर में अभी और होगा रेलवे का विस्तार:-
जम्मू-कश्मीर में रेलवे विस्तार का अगला चरण भी महत्वपूर्ण है। जम्मू-रियासी से पुंछ तक लगभग 190 किलोमीटर नई रेल लाइन के लिए फाइनल लोकेशन सर्वे को मंजूरी दी गई है और फील्ड सर्वे शुरू किया गया है। इसके अलावा जम्मू से श्री माता वैष्णो देवी कटरा के बीच 78 किलोमीटर अतिरिक्त लाइन के लिए भी सर्वे को मंजूरी मिली है। इन परियोजनाओं का उद्देश्य भविष्य में बढ़ते यात्री और माल यातायात को संभालना तथा जम्मू संभाग के दूरदराज और सीमावर्ती इलाकों तक रेल कनेक्टिविटी को बढ़ाना है।
कश्मीर घाटी में भी काजीगुंड-श्रीनगर-बडगाम के 118 किलोमीटर रेल सेक्शन की डबलिंग और बारामूला-उड़ी 40 किलोमीटर नई रेल लाइन के डीपीआर तैयार किए गए हैं। इन परियोजनाओं के आगे बढ़ने से घाटी में रेल नेटवर्क की क्षमता और सीमा दोनों बढ़ेंगी।
कुल मिलाकर जम्मू-कश्मीर में रेलवे अब केवल जम्मू तवी, उधमपुर और कटरा तक सीमित परिवहन व्यवस्था नहीं रह गई है। यूएसबीआरएल के पूरा होने से जम्मू से श्रीनगर तक सीधी रेल कनेक्टिविटी, आधुनिक वंदे भारत सेवा, पूर्ण विद्युतीकरण, अत्याधुनिक सुरंगें और विश्वस्तरीय पुलों के साथ प्रदेश की परिवहन व्यवस्था में बड़ा बदलाव आया है। आने वाले वर्षों में जम्मू-पुंछ रेल लाइन, अतिरिक्त ट्रैक और स्टेशन आधुनिकीकरण जैसी परियोजनाएं आगे बढ़ती हैं तो रेलवे जम्मू-कश्मीर के पर्यटन, व्यापार, कृषि, रोजगार और सीमावर्ती क्षेत्रों की कनेक्टिविटी में और महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है
उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने कहा है कि कश्मीर से कन्याकुमारी रेल लिंक का पूरा होना जम्मू-कश्मीर के लिए राष्ट्रीय एकता, आर्थिक विकास और बुनियादी ढांचे के विकास के एक नए युग में एक अहम मील का पत्थर है। उनका कहना है कि कश्मीर को कन्याकुमारी से जोड़ने का सपना पूरा होना और विश्व स्तरीय वंदे भारत ट्रेनों की शुरुआत भारतीय रेलवे के नए युग की पहचान हैं।
केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने घोषणा की है कि जम्मू रेलवे स्टेशन पर प्लेटफॉर्म का काम पूरा होने के बाद सितंबर में जम्मू और श्रीनगर के बीच सीधी वंदे भारत ट्रेन सेवा शुरू हो जाएगी। जम्मू स्टेशन पर काम पूरा होते ही जम्मू और श्रीनगर के बीच तीसरी वंदे भारत ट्रेन जल्द ही शुरू होगी। सीधी सेवा शुरू करने के लिए जम्मू स्टेशन पर प्लेटफॉर्म 5 और 6 का काम सितंबर में पूरा हो रहा है। डॉ. सिंह ने पहाड़ों से होकर गुजरने वाले रेल रूट को दुनिया की एक बड़ी तकनीकी उपलब्धि बताया है।
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हिन्दुस्थान समाचार / बलवान सिंह