खरमास समाप्त, 15 अप्रैल से 25 जुलाई तक 29 शुभ मुहूर्त में होंगे मांगलिक आयोजन : पं. राम कृष्ण शर्मा
लखनऊ, 14 अप्रैल (हि.स.)। ज्योतिष गणना और ग्रह नक्षत्र के चलते मंगलवार 14 अप्रैल को दिन में 11:45 बजे से सूर्य अपनी उच्च राशि मेष में प्रवेश कर जाएंगे, इसी के साथ खरमास समाप्त हो जाएगा। इस संयोग को मेष संक्रांति भी कहते हैं। ग्रह नक्षत्र के बदलने के बाद अगले दिन 15 अप्रैल से विवाह, सगाई और गृह एवं अन्य शुभ मुहूर्त प्रारंभ हो जाएंगे। यह जानकारी हिन्दुस्थान समाचार से खास बातचीत में पंडित एवं ज्योतिषाचार्य राम कृष्ण शर्मा ने दी।
उन्होंने कहा कि इस वर्ष अधिक ज्येष्ठ मास 17 मई से 15 जून तक रहेगा। अधिक मास में विवाह जैसे मांगलिक कार्य वर्जित होते है। 25 जुलाई को देवशयनी एकादशी होगी और चातुर्मास प्रारम्भ होगा। जिसके चलते विवाह कार्य रुक जाएंगे। इस अवधि में यानी 15 अप्रैल से 25 जुलाई के बीच कुल 29 मुहूर्त (दिन) तिथियां ही मांगलिक कार्य आयोजनों के लिए श्रेष्ठ हैं। हालांकि पंचांग एवं ग्रह नक्षत्र के चलते कुछ शुभ मुहूर्त इन तिथियों के अलावा भी मिलने पर मांगलिक कार्य के लिए विचारे जा सकते हैं।
ज्योतिषाचार्य राम कृष्ण शर्मा ने बताया कि इसके बाद 20 नवम्बर 2026 से देवोत्थान एकादशी के बाद विवाह कार्य फिर से प्रारंभ होंगे। जो 6 दिसम्बर तक हैं। हालांकि इसके अलावा भी कुछ तिथियां आचार्यों द्वारा विशेष ग्रह गोचर के रूप विचारी जा सकती हैं, लेकिन यह तिथियां शुभ मुहूर्त में शामिल नहीं होती है, इनकी परिस्थिति और परिणाम परिणय बंधन पर भी देखने को मिलता है। इसलिए इन मुहूर्त से बचना चाहिए।
विवाह के लिए शुभ मुहूर्त
अप्रैल- 15, 20, 21, 25, 26, 27, 28, 29
मई- 1, 3, 5, 6, 7, 8, 13 व 14
जून- 21, 22, 23, 24, 25, 26, 27 व 29
जुलाई- 1, 6, 7, 11 व 12
नवम्बर- 21, 24, 25 व 26
दिसम्बर- 2, 3, 4, 5 व 6
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हिन्दुस्थान समाचार / मोहित वर्मा