900 साल पुराने वरखड़ी वृक्ष के नीचे विराजमान हैं मां चेहर, भक्तों की आस्था का अनोखा धाम
महेसाणा, 14 अगस्त (हि.स.)। गुजरात के महेसाणा जिले के जोताना तहसील के मरतौली गांव स्थित चेहर माताजी धाम वर्षों से श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र बना हुआ है। यहां माताजी के प्राचीन स्थानक के साथ करीब 900 वर्ष पुराना वरखड़ी का वृक्ष आज भी मजबूती से खड़ा है। इसी वृक्ष के नीचे माताजी के चरणों का छोटा मंदिर बना हुआ है, जहां श्रद्धालु दर्शन कर स्वयं को धन्य मानते हैं।
मंदिर से जुड़ी लोकमान्यता के अनुसार, सिंध प्रदेश के हालड़ी क्षेत्र में शेखावत सिंह राठौड़ के घर वसंत पंचमी के दिन मां चेहर भवानी केशुड़ा के पेड़ के नीचे पालने में कन्या के रूप में स्वयं प्रकट हुई थीं। इसके बाद माताजी कांकरज के नगर, तेरवाड़ा और पाटण होते हुए मरतौली पहुंचीं, ऐसी मान्यता है।
स्थानीय मान्यता के अनुसार, मरतौली में रबारी समाज को अपना परचा देने के बाद माताजी वरखड़ी के वृक्ष के नीचे फूल का गोला बनकर अंतर्ध्यान हो गई थीं। आज भी इसी स्थान पर माताजी के चरणों की पूजा की जाती है।
हजारों श्रद्धालुओं को प्रसाद, फिर भी नहीं खत्म हुए लड्डू
मंदिर से जुड़ा वर्ष 1996 में रामनवमी के दौरान आयोजित सप्तचंडी यज्ञ का प्रसंग भी श्रद्धालुओं के बीच विशेष आस्था का विषय है। मान्यता के अनुसार उस दौरान हजारों श्रद्धालुओं को प्रसाद के रूप में लड्डू वितरित किए गए, लेकिन लड्डू समाप्त नहीं हुए। मंदिर से जुड़े लोगों के अनुसार इस चमत्कारी प्रसंग की स्मृति में पांच लड्डू और चुनरी आज भी सुरक्षित रखी गई है।
2009 से प्रतिदिन नि:शुल्क भोजन प्रसाद
मंदिर परिसर में धर्मशाला और भोजनशाला की भी व्यवस्था है। वर्ष 2009 से प्रतिदिन दोपहर 11 से 2 बजे और शाम 7 से 9 बजे तक श्रद्धालुओं को नि:शुल्क भोजन प्रसाद कराया जाता है। मंदिर के पुजारी का कहना है की महेसाणा से करीब 21 किलोमीटर दूर स्थित श्री चेहर माताजी धाम आज केवल आस्था का केंद्र ही नहीं, बल्कि सेवा, लोकपरंपरा और धार्मिक विरासत का भी महत्वपूर्ण स्थल बन चुका है।
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हिन्दुस्थान समाचार / यजुवेंद्र दुबे