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मप्र के डिंडौरी जिले में जल संरक्षण बना जनआंदोलन, ग्रामीणों ने कम लागत में तैयार किया अनोखा मॉडल

 






- प्लास्टिक बोतलों से ‘टपक सिंचाई’ का नवाचार, 3,500 फलदार पौधों का किया रोपण

भोपाल, 11 मई (हि.स.) । मध्य प्रदेश के डिंडौरी जिले में जल संरक्षण को जनआंदोलन का स्वरूप देते हुए उल्लेखनीय कार्य किए जा रहे हैं। जनजातीय बाहुल्य डिंडौरी जिले में ग्रामीणों ने जल संरक्षण को सामाजिक जिम्मेदारी के रूप में स्वीकार करते हुए अभिनव प्रयास प्रारंभ किए हैं।

जिला कलेक्टर अंजू पवन भदौरिया का कहना है कि जिला प्रशासन द्वारा जल चौपाल, जल जागरूकता रैली, कलश यात्रा और नुक्कड़ नाटक जैसे जनजागरण कार्यक्रमों के माध्यम से आमजन को जल संरक्षण के प्रति जागरूक किया गया। ग्रामीणों ने इसे केवल सरकारी अभियान न मानकर अपनी प्राथमिकता और चुनौती के रूप में स्वीकार किया और जनसहभागिता से जल संरक्षण के अनेक नवाचार विकसित किए।

कम संसाधनों में तैयार हुआ जल संरक्षण का प्रभावी मॉडल

जनसंपर्क अधिकारी आरआर पटेल ने सोमवार को जानकारी देते हुए बताया कि ने बताया कि जनजातीय बाहुल्य क्षेत्र डिंडौरी जिले में सीमित संसाधनों के बावजूद स्थानीय समुदाय ने जल संरक्षण एवं पौधों के संरक्षण के लिए कम लागत वाला प्रभावी मॉडल विकसित किया। विगत वर्ष विकसित भारत-रोजगार एवं आजीविका मिशन (ग्रामीण) (वीबी-जी-राम-जी) अंतर्गत 700 स्व-सहायता समूह के सदस्यों के यहां एक बगिया मां के नाम योजना के तहत 3,500 फलदार पौधों का रोपण हुआ। स्व-सहायता समूहों की सदस्यों द्वारा प्रत्येक पौधे के लिए पानी की अनुपयोगी प्लास्टिक की बोतलों और घड़ों के माध्यम से टपक सिंचाई मॉडल तैयार किया गया। इसके माध्यम से कम पानी में पौधों को नियमित सिंचाई उपलब्ध कराई जा रही है, जिससे जल संरक्षण के साथ ही पौधों का संरक्षण भी सुनिश्चित हुआ है।

उद्यानिकी विभाग द्वारा रोपित नर्सरियां और अन्य गैर शासकीय संस्थाओं द्वारा किए जा रहे फलदार पौधों के रोपण में भी इस मॉडल को अपनाया गया है। जिले के बालक-बालिका छात्रावासों और आंगनबाड़ी केंद्रों में लगाए गए पौधों के संरक्षण के लिये भी यह नवाचार प्रभावी रूप से लागू किया गया है। देखते ही देखते यह मॉडल पूरे जिले में एक अभियान का रूप ले चुका है और जनसामान्य सक्रिय रूप से इससे जुड़कर जल एवं पर्यावरण संरक्षण में योगदान दे रहे हैं। प्लास्टिक की बोतलों के पुनः उपयोग के माध्यम से विकसित इस मॉडल ने अभिनव उदाहरण प्रस्तुत किये है।

शैक्षणिक परिसरों में जल संरक्षण के विशेष प्रयास

जनसंपर्क अधिकारी ने बताया कि जनजातीय कार्य विभाग द्वारा संचालित शैक्षणिक संस्थानों एवं छात्रावास परिसरों में भी जल संरक्षण के इस मॉडल को प्रभावी रूप से लागू किया गया है। डिंडौरी जिले में संचालित 1,352 प्राथमिक विद्यालय, 453 माध्यमिक विद्यालय, 66 हाईस्कूल, 62 हायर सेकेंडरी स्कूल, 3 कन्या शिक्षा परिसरों और 4 एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालयों एवं 139 छात्रावासों व आश्रम शालाओं में कार्यरत विभागीय शासकीय अमले के द्वारा भी जलसंवर्धन अभियान के मॉडल को अपनाकर कार्य किया गया।

जल संरक्षण के लिये किए गए प्रमुख नवाचार

- शासकीय भवनों में वॉटर हार्वेस्टिंग सिस्टम स्थापित किए गए।

- परिसर में सोकपिट निर्माण कर जल संचयन को बढ़ावा दिया गया।

- विद्यालय एवं छात्रावास परिसरों की किचन गार्डन गतिविधियों में जल संरक्षण मॉडल अपनाया गया।

- रसोई एवं स्नानागार से निकलने वाले पानी को नालियों के माध्यम से पौधों तक पहुंचाने की व्यवस्था की गई।

- जहां पाइपलाइन या जल निकासी संभव नहीं थी, वहां मिट्टी में गड़े घड़ों एवं प्लास्टिक बोतलों के माध्यम से ड्रिप इरिगेशन व्यवस्था विकसित की गई।

- विभाग द्वारा जल संरक्षण एवं जल संवर्धन अभियान के अंतर्गत 10,000 से अधिक संरचनाएं तैयार कर, अभियान में सहभागिता सुनिश्चित की गई।

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हिन्दुस्थान समाचार / उम्मेद सिंह रावत