×

देश का नया 'फूड बास्केट' बना मध्य प्रदेश, खाद्यान्न उत्पादन के गढ़ रहा नए कीर्तिमान

 


भोपाल, 21 सितम्बर (हि.स.)। कभी संसाधनों के अभाव, सिंचाई के संकट और मंद विकास के कारण 'बीमारू राज्य' कहलाने वाला मध्य प्रदेश आज आत्मनिर्भरता, कृषि समृद्धि और तीव्र आर्थिक प्रगति का पर्याय बन चुका है। प्रदेश सरकार के दूरदर्शी नेतृत्व और किसानों की अथक मेहनत के दम पर प्रदेश ने न केवल अपनी विकास दर 24 प्रतिशत दर्ज की है, बल्कि खाद्यान्न उत्पादन के नए कीर्तिमान रचते हुए देश के 'फूड-बास्केट' के रूप में नई पहचान स्थापित की है।

राज्य सरकार वर्ष 2026 को 'कृषक कल्याण वर्ष' और 'रोजगार आधारित कृषि उद्योग विकास वर्ष' के रूप में मना रही है, जिसका एकमात्र उद्देश्य तकनीक, नवाचार और वैज्ञानिक पद्धतियों के माध्यम से किसानों की आय में निरंतर वृद्धि करना है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का कहना है कि भारत की आत्मा गांवों में बसती है और गांवों की आत्मा किसानों में। जब किसान सशक्त होता है, तभी प्रदेश समृद्धि के शिखर को छूता है। मध्य प्रदेश की यह विकास यात्रा आज पूरे देश के लिए एक अनुकरणीय मॉडल बन चुकी है।

प्रदेश के कृषि मंत्री एदल सिंह कंषाना ने कहा है कि किसान का सशक्तीकरण ही प्रदेश के सर्वांगीण विकास की आधारशिला है। इसी संकल्प के साथ राज्य सरकार ने वर्ष 2026 को कृषक कल्याण वर्ष के रूप में मनाने का निर्णय लिया है। 'समृद्ध किसान-समृद्ध प्रदेश' की दिशा में कृषक कल्याण वर्ष-2026 में प्रदेश में कृषि विकास का बहु आयामी मॉडल निर्धारित किया गया है। इसके अंतर्गत विभिन्न बहुउद्देशीय गतिविधियों का समावेश किया गया है। मंत्री कंषाना ने कहा है कि कृषि विभाग द्वारा किसानों के कल्याण के लिए विभिन्न योजनाएं और गतिविधियां संचालित की गई हैं।

खाद्यान्न उत्पादन में देश में दूसरे स्थान पर मध्य प्रदेश

मध्य प्रदेश अब खाद्यान्न उत्पादन में देश में दूसरे स्थान पर पहुँच चुका है। गेहूं उत्पादन में पंजाब और हरियाणा जैसे पारंपरिक कृषि समृद्ध राज्यों को पीछे छोड़ते हुए प्रदेश देश का सबसे बड़ा गेहूं उत्पादक बन गया है। इस वर्ष गेहूं का उत्पादन बढ़कर 365.11 लाख मीट्रिक टन तक पहुँच गया है, जबकि उत्पादकता 3,780 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर दर्ज की गई है। देश के कुल गेहूं उत्पादन में मध्यप्रदेश का योगदान अट्ठारह प्रतिशत है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी प्रदेश के गेहूं की जबरदस्त धमक है। भारत से विदेशों को निर्यात होने वाले गेहूं में प्रदेश का हिस्सा 35 से 40 प्रतिशत है। प्राकृतिक मिठास वाले शरबती और ड्यूरम गेहूं की मांग जर्मनी, अमेरिका, यूके, इटली, दुबई और सऊदी अरब जैसे देशों में बनी हुई है। इसके साथ ही, मध्य प्रदेश देश का सबसे बड़ा प्रामाणिक बीज उत्पादक राज्य भी है, जहां तीन लाख से अधिक किसान बीज उत्पादक कंपनियों से जुड़े हैं।

आधुनिक तकनीक से फसल प्रबंधन

कृषि क्षेत्र को आधुनिक तकनीक से जोड़कर फसल प्रबंधन को अधिक सटीक, पारदर्शी और प्रभावी बनाया जा रहा है। राज्य सरकार की 'सारा' और 'उन्नति' एग्री-जीआईएस प्रणाली से उपग्रह चित्रों, ड्रोन सर्वेक्षण और खेतों की वास्तविक तस्वीरों का आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और मशीन लर्निंग से विश्लेषण किया जा रहा है। इससे फसल निगरानी और उत्पादन आंकलन को वैज्ञानिक आधार मिला है। 'उन्नति' प्लेटफॉर्म और 'सारा' एप्लिकेशन से तीन करोड़ से अधिक भूमि खंडों में बोई गई फसलों की डिजिटल मैपिंग की गई है। हाल के रबी और खरीफ सीजन में इस प्रणाली से 5.37 करोड़ से अधिक खेतों की तस्वीरों का विश्लेषण किया गया, जिससे रीयल-टाइम फसल पहचान संभव हुई है। इस तकनीकी पहल से फसल पहचान की सटीकता वर्ष 2022 के 66 प्रतिशत से बढ़कर वर्ष 2025 तक लगभग 85 प्रतिशत हो गई है। यह प्रणाली प्राकृतिक आपदाओं के समय फसल नुकसान का सटीक आकलन करने और किसानों को त्वरित मुआवजा दिलाने में भी अत्यंत उपयोगी सिद्ध हो रही है।

रसायन मुक्त खेती पर फोकस

पर्यावरण-हितैषी और प्राकृतिक कृषि की दिशा में कदम बढ़ाते हुए राज्य सरकार रसायन मुक्त खेती को प्रोत्साहित कर रही है। देश में हो रही कुल जैविक खेती में 27 प्रतिशत से अधिक की भागीदारी के साथ मध्यप्रदेश पूरे देश में प्रथम स्थान पर है। राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन के अंतर्गत प्रदेश के 1,513 क्लस्टरों में 1.89 लाख किसानों को जोड़ा गया है, और प्राकृतिक खेती करने वाले किसानों के लिए देसी गोपालन पर 900 रुपये प्रतिमाह अनुदान का प्रावधान किया गया है। इसका प्रत्यक्ष उदाहरण खरगोन के जैविक विशेषज्ञ अविनाश दांगी हैं, जो अपने 54 एकड़ खेत और 40 गोवंश के साथ पूरी तरह जैविक खेती कर रहे हैं और उनके उत्पाद देश के 13 राज्यों में सप्लाई हो रहे हैं। इसी तरह, सफेद मूसली की खेती करने वाले अनिल वर्मा जैसे किसानों ने राज्य सरकार के सहयोग से अपनी आर्थिक स्थिति को मजबूत किया है।

कृषि क्षेत्र में नई ऊंचाइयों को छू रहा प्रदेश

उद्यानिकी और फसलों के विविधीकरण के क्षेत्र में भी मध्य प्रदेश नई ऊंचाइयों को छू रहा है। प्रदेश टमाटर, धनिया और लहसुन के उत्पादन में देश में प्रथम स्थान पर है। प्रदेश में 1.27 लाख से अधिक हेक्टेयर में टमाटर की खेती की जा रही है, जिसका संभावित उत्पादन 36.94 लाख मीट्रिक टन है। अनूपपुर जिले में ही 15 हजार किसानों ने रिकॉर्ड 1.40 लाख मीट्रिक टन टमाटर की पैदावार की है। इसके साथ ही, 'रानी दुर्गावती श्रीअन्न प्रोत्साहन योजना' के तहत कोदो-कुटकी उगाने वाले जनजातीय किसानों को तय मूल्य के अतिरिक्त 1,000 रुपये प्रति क्विंटल की प्रोत्साहन राशि डीबीटी के माध्यम से दी जा रही है। देश के कुल मोटे अनाज (मिलेट्स) उत्पादन में प्रदेश की हिस्सेदारी 12.17 प्रतिशत है, जिससे मध्यप्रदेश मिलेट्स उत्पादन में देश में तीसरे स्थान पर पहुँच गया है।

पारदर्शी और किसान-हितैषी व्यवस्थाएं लागू

राज्य सरकार ने किसानों को हर स्तर पर संबल देने के लिए पारदर्शी और किसान-हितैषी व्यवस्थाएं लागू की हैं। उर्वरक वितरण में लंबी कतारों, कालाबाजारी और बिचौलियों की भूमिका को समाप्त करने के लिए डिजिटल 'ई-विकास' प्रणाली पूरे प्रदेश में लागू की गई है। सोयाबीन उत्पादकों को न्यूनतम समर्थन मूल्य का लाभ देने के लिए भावांतर भुगतान योजना के तहत 9 लाख से अधिक किसानों का पंजीयन किया गया है। इस वर्ष 7.62 लाख से अधिक किसानों से 51.75 लाख मीट्रिक टन धान की खरीदी कर 9,485 करोड़ रुपये से अधिक का भुगतान किया जा चुका है। इसके अतिरिक्त, पराली प्रबंधन के लिए रीपर, बेलर और हैप्पी सीडर जैसे 7,000 कृषि यंत्रों पर सब्सिडी दी जा रही है तथा स्वाइल हेल्थ कार्ड वितरण में भी मध्य प्रदेश देश में शीर्ष पर है।

गौरतलब है कि 15 जुलाई से 13 नवंबर 2026 तक आयोजित किए जा रहे बलराम कृषि महोत्सव के माध्यम से मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव राज्य के विभिन्न जिलों में किसानों से सीधा संवाद कर रहे हैं और उन्हें आधुनिक कृषि यंत्रों, ड्रोन तकनीक तथा जल संरक्षण के प्रति जागरूक कर रहे हैं। निरंतर सात बार 'कृषि कर्मण पुरस्कार' प्राप्त कर चुका मध्य प्रदेश आज पारंपरिक खेती की सीमाओं को लांघकर हाई-टेक, वैज्ञानिक और निर्यात-उन्मुख कृषि की ओर तेजी से बढ़ रहा है।

---------------

हिन्दुस्थान समाचार / उम्मेद सिंह रावत