पारंपरिक टूरिज्म से आगे बढ़ा मध्य प्रदेश, धार्मिक केंद्रों से ग्रामीण पर्यटन तक सैलानियों को लुभा रहे नए स्थल
भोपाल, 28 सितम्बर (हि.स.)। भारत का हृदय कहे जाने वाला मध्य प्रदेश, प्राकृतिक सौंदर्य और विभिन्न संस्कृतियों से परिपूर्ण है। प्रदेश आज देश और दुनिया के सैलानियों के लिए एक पसंदीदा टूरिस्ट डेस्टिनेशन बनकर उभरा है। राज्य के पर्यटन क्षेत्र ने हाल ही में सफलता का नया इतिहास रचा है। राज्य का पर्यटन अब केवल महाकाल, खजुराहो, कान्हा और पचमढ़ी जैसे पारंपरिक स्थलों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि नए धार्मिक केंद्रों, ग्रामीण पर्यटन, होम-स्टे, एडवेंचर और अनुभव आधारित पर्यटन ने इसकी पहुंच और दायरा दोनों बढ़ाया है। यही बदलाव आंकड़ों में भी नजर आ रहा है।
पर्यटन आंकड़ों के अनुसार प्रदेश में पर्यटन यात्राएं वर्ष 2024 में 13.33 करोड़ से बढ़कर वर्ष 2025 में 21.05 करोड़ तक पहुंच गईं। महज एक साल के भीतर 7.72 करोड़ यानी 57.9 प्रतिशत की अभूतपूर्व वृद्धि यह साबित करती है कि मध्य प्रदेश का प्राकृतिक, ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और आध्यात्मिक वैभव वैश्विक स्तर पर लोगों को आकर्षित कर रहा है। कुल पर्यटन यात्राओं में आधी से अधिक हिस्सेदारी उज्जैन-इंदौर अंचल की रही है। उज्जैन में 8.40 करोड़ और इंदौर में 2.81 करोड़ यात्राएं दर्ज की गईं, जो प्रदेश की कुल यात्राओं का लगभग 53.3 प्रतिशत हैं। इसके साथ ही पर्यटन के नक्शे पर पहली बार शामिल हुए नए धार्मिक केंद्रों जैसे कुबेरेश्वर धाम (1.50 करोड़), रतनगढ़ माता मंदिर (1 करोड़), बगलामुखी मंदिर, पीतांबरा पीठ और बागेश्वर धाम में ही लगभग 3.51 करोड़ श्रद्धालुओं की आवाजाही दर्ज हुई। महेश्वर, खजुराहो, सांची, पचमढ़ी और भोपाल जैसे पारंपरिक स्थलों पर भी पर्यटकों की संख्या में उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
प्रदेश के प्रमुख स्थलों तक पहुंच बनीं आसान
पर्यटन के इस बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए राज्य सरकार ने भोपाल, इंदौर, जबलपुर, रीवा, उज्जैन, ग्वालियर, सिंगरौली और खजुराहो को एक सुदृढ़ हवाई नेटवर्क से जोड़ा है। 'पीएम श्री पर्यटन वायु सेवा' और इसके बाद शुरू की गई 'पीएम श्री हेली पर्यटन सेवा' ने ओंकारेश्वर, पचमढ़ी, कान्हा और बांधवगढ़ जैसे प्रमुख स्थलों तक पहुंच को अत्यंत सुगम बना दिया है। कनेक्टिविटी में इस रणनीतिक सुधार के परिणामस्वरूप राज्य ने ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट, रीजनल टूरिज्म कॉन्क्लेव और मध्य प्रदेश ट्रैवल मार्ट के माध्यम से 10,968 करोड़ रुपये से अधिक का निजी निवेश आकर्षित किया है।
ग्रामीण पर्यटन ने बदली प्रदेश की तस्वीर
मध्य प्रदेश की ग्रामीण पर्यटन और 'होम-स्टे' परिकल्पना ने ग्रामीण अर्थव्यवस्था की तस्वीर बदल दी है। प्रदेश में 63 पर्यटन ग्राम विकसित किए गए हैं और 470 से अधिक पंजीकृत होम-स्टे संचालित हो रहे हैं। विशेष रूप से छिंदवाड़ा जिले के सावरवानी और धूसावानी जैसे पर्यटन ग्रामों में महिलाएं आगे आकर होम-स्टे का सफल संचालन कर रही हैं। यहां सास-बहू, मां-बेटी और देवरानी-जेठानी की जोड़ियां मिलकर पर्यटकों की मेज़बानी कर रही हैं, जिससे वे न केवल आर्थिक रूप से सशक्त हो रही हैं, बल्कि स्थानीय संस्कृति, व्यंजनों और लोककलाओं को भी बढ़ावा मिल रहा है। सावरवानी के 'मड हाउस' मॉडल और जनजातीय बालिकाओं द्वारा गाइडिंग की इस पहल को अन्य राज्यों से आए अध्ययन समूहों द्वारा खूब सराहा जा रहा है।
मध्य प्रदेश प्राकृतिक और सांस्कृतिक धरोहर का भी अनूठा केंद्र है। राज्य का लगभग 30 प्रतिशत भाग वनाच्छादित है, जहां 12 राष्ट्रीय उद्यान, 24 वन्यजीव अभयारण्य और 9 टाइगर रिजर्व मौजूद हैं। खजुराहो, साची और भीमबेटका जैसे यूनेस्को विश्व धरोहर स्थलों के अलावा वर्ष 2025 में भगोरिया नृत्य, गोंड चित्रकला और नर्मदा परिक्रमा को अमूर्त सांस्कृतिक विरासत में शामिल किया गया। साथ ही, ग्वालियर किला, ओरछा, भेड़ाघाट और चंदेरी सहित 15 अन्य स्थल यूनेस्को की टेंटेटिव लिस्ट में जगह बना चुके हैं।
फिल्म पर्यटन के क्षेत्र में भी अग्रणी
फिल्म पर्यटन के क्षेत्र में भी मध्यप्रदेश अग्रणी बनकर उभरा है। ‘पंचायत’, ‘स्त्री’ और ‘लापता लेडीज’ जैसी फिल्मों ने प्रदेश के विभिन्न स्थलों को नई पहचान दिलाई है। पारदर्शी फिल्म नीति के कारण राज्य में अब तक 502 से अधिक फिल्मों और वेब सीरीज की शूटिंग हो चुकी है, जिससे करीब 1,200 करोड़ रुपये का निवेश और 1.5 लाख रोजगार के अवसर पैदा हुए हैं। इसके अलावा, स्काईडाइविंग, पेंच मोगली ट्रेक, तवा-मढ़ई साइकिलिंग और ओरछा में रिवर राफ्टिंग जैसे रोमांचक नवाचार पर्यटकों को अनूठा अनुभव प्रदान कर रहे हैं।
मध्य प्रदेश ने पर्यटन के क्षेत्र में नवाचार, उत्कृष्ट कार्य और सतत विकास के दम पर राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी अलग पहचान बनाई है। वर्ष 2025 में प्रदेश को पर्यटन क्षेत्र में बेहतर प्रदर्शन के लिए कई प्रतिष्ठित सम्मान मिले। इनमें सर्वश्रेष्ठ राज्य पर्यटन बोर्ड और गोल्डन बैनयन अवॉर्ड (हेरिटेज टूरिज्म बेस्ट स्टेट) जैसे पुरस्कार शामिल हैं।
विरासत पर्यटन के क्षेत्र में भी प्रदेश को खास पहचान मिली। वर्सटाइल एक्सीलेंस ट्रैवल अवॉर्ड्स (वीटा) 2025 में मध्य प्रदेश को ‘लीडिंग हेरिटेज टूरिस्ट डेस्टिनेशन’ के रूप में मान्यता दी गई। वहीं, नई दिल्ली में आयोजित एसएटीटीई 2025 में प्रदेश को ‘बेस्ट स्टेट टूरिज्म अवॉर्ड’ से सम्मानित किया गया। इन उत्कृष्ट प्रयासों, नवाचारों और जिम्मेदार पर्यटन मिशन के बल पर मध्य प्रदेश को लगातार दूसरे वर्ष प्रतिष्ठित 'बेस्ट स्टेट टूरिज्म अवॉर्ड' (एसएटीटीई 2026), 'स्कॉच गोल्ड अवॉर्ड 2026' और 'लीडिंग टूरिज्म डेस्टिनेशन अवॉर्ड 2026' जैसे राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय सम्मानों से नवाजा गया है।
विरासत और आधुनिकता के संगम से पर्यटन को नई पहचान देने की तैयारी
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि मध्य प्रदेश की पहचान सिर्फ देश के नक्शे पर ‘भारत का हृदय’ होने तक सीमित नहीं है। अपनी ऐतिहासिक विरासत के संरक्षण और नवाचार आधारित नीतियों के जरिए प्रदेश अब वैश्विक पर्यटन मानचित्र पर भी अपनी मजबूत पहचान बना रहा है। मुख्यमंत्री ने आगामी पर्यटन परियोजनाओं की रूपरेखा साझा करते हुए कहा कि प्रदेश की प्राकृतिक खूबसूरती और पुरातात्विक विरासत को आधुनिक सुविधाओं से जोड़ा जा रहा है। उनका जोर ऐसे पर्यटन मॉडल पर है, जहां प्राचीनता की विरासत और आधुनिकता की सुविधाएं साथ मिलकर पर्यटकों को नया अनुभव दें और मध्यप्रदेश में पर्यटन के नए दौर की शुरुआत हो।
पर्यटन, संस्कृति एवं धार्मिक न्यास एवं धर्मस्व राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) धर्मेंद्र भाव सिंह लोधी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में पर्यटन देश के तेजी से विकसित हो रहे क्षेत्रों में शामिल हुआ है। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश की प्राकृतिक सुंदरता, आध्यात्मिक स्थलों, समृद्ध वन्य जीवन और गौरवशाली विरासत ने इसे देश-दुनिया के यात्रियों के लिए आकर्षण का केंद्र बनाया है। उन्होंने कहा कि पर्यटकों की लगातार बढ़ती संख्या से मध्यप्रदेश की वैश्विक पहचान मजबूत हो रही है।
ट्रैवल मार्ट से पर्यटन कारोबारियों को एक मंच पर लाने की पहल
अपर मुख्य सचिव पर्यटन, संस्कृति, गृह एवं धार्मिक न्यास एवं धर्मस्व तथा मध्यप्रदेश टूरिज्म बोर्ड के प्रबंध संचालक शिव शेखर शुक्ला ने कहा कि मध्यप्रदेश में आने वाले अतिथियों का स्वागत और उन्हें बेहतर अनुभव देना प्रदेश के लिए गर्व की बात है। उन्होंने कहा कि पर्यटन उद्योग से जुड़े विभिन्न हितधारकों को एक मंच पर लाने का प्रयास ‘मध्य प्रदेश ट्रैवल मार्ट’ के जरिए साकार हुआ है। आयोजन में टूर ऑपरेटर, होटलियर और अन्य हितधारकों के बीच संवाद के साथ नई साझेदारियों और सहयोग की संभावनाएं बनीं। उन्होंने टूर ऑपरेटरों और होटल कारोबारियों से अधिक से अधिक पर्यटकों को मध्यप्रदेश भेजने का आग्रह किया।
पर्यटन में नया प्रयोग, अब ‘देखने’ नहीं ‘अनुभव करने’ आएंगे पर्यटक
पर्यटन विभाग के सचिव एवं बोर्ड के प्रबंध संचालक डॉ. इलैयाराजा टी. ने कहा कि अवॉर्ड मिलना मध्यप्रदेश के पर्यटन इकोसिस्टम को मजबूत करने के लगातार प्रयासों का प्रमाण है। प्रदेश अब पर्यटन को केवल दर्शनीय स्थलों तक सीमित रखने के बजाय अनुभव, रोमांच, संस्कृति और स्थानीय अवसरों से जोड़कर एक व्यापक टूरिज्म इकोसिस्टम विकसित कर रहा है। विरासत और प्रकृति के संरक्षण के साथ सतत, जिम्मेदार और अनुभव आधारित पर्यटन पर जोर है।
डॉ. इलैयाराजा के मुताबिक बुनियादी ढांचे, कनेक्टिविटी, पर्यटक सुविधाओं और नवाचार में लगातार सुधार से मध्य प्रदेश विरासत, वन्यजीव, आध्यात्मिक और ईको-टूरिज्म के प्रमुख गंतव्य के रूप में उभर रहा है। वाइल्डलाइफ, ईको, ग्रामीण, हेरिटेज, सांस्कृतिक एवं जनजातीय, वेलनेस, एडवेंचर, मेडिकल, गोल्फ और अनुभव आधारित पर्यटन को बढ़ावा दिया जा रहा है। लक्ष्य सिर्फ पर्यटकों की संख्या बढ़ाना नहीं, बल्कि नए डेस्टिनेशन विकसित करना, पर्यटक अनुभव बेहतर करना, स्थानीय आर्थिक अवसर पैदा करना और सतत एवं समावेशी पर्यटन व्यवस्था तैयार करना है।
इसी सोच के तहत फॉर्सिथ ट्रेक, पेंच मोगली ट्रेक, तवा-मढ़ई साइकिलिंग, पचमढ़ी मानसून मैराथन, ओरछा में बेतवा रिवर राफ्टिंग और पेंच मोनोलिथ्स ट्रेल जैसे नए अनुभव पर्यटकों को आकर्षित कर रहे हैं। उज्जैन को स्काई डाइविंग हब के रूप में विकसित किया जा रहा है। वर्ष 2022 से अब तक 1,200 से अधिक लोग 10 हजार फीट की ऊंचाई से स्काईडाइविंग का अनुभव ले चुके हैं।
आध्यात्मिक पर्यटन भी प्रदेश की बड़ी ताकत है। महाकालेश्वर और ओंकारेश्वर जैसे दो ज्योतिर्लिंगों के अलावा चित्रकूट, मैहर, दतिया, सलकनपुर समेत कई धार्मिक स्थल हैं। नर्मदा परिक्रमा आध्यात्मिक और सांस्कृतिक विरासत को करीब से अनुभव करने का अवसर देती है। वहीं खजुराहो इंटरनेशनल डांस फेस्टिवल, तानसेन समारोह, लोकरंग और भगोरिया जैसे आयोजन प्रदेश की जीवंत सांस्कृतिक परंपराओं को पर्यटन से जोड़ रहे हैं। ‘द बीटिंग हार्ट ऑफ इंडिया’ के रूप में मध्य प्रदेश अब यात्रियों के साथ कॉरपोरेट लीडर्स, इवेंट प्लानर्स और निवेशकों के लिए भी नए अवसर तैयार कर रहा है।
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हिन्दुस्थान समाचार / उम्मेद सिंह रावत