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निवेश के नक्शे पर तेजी से उभर रहा मध्य प्रदेश, एआई-डिफेंस से लेकर नए सेक्टरों पर फोकस

 




भोपाल, 08 सितम्बर (हि.स.)। मध्य प्रदेश अब सिर्फ पारंपरिक उद्योगों के लिए निवेश की जमीन तैयार नहीं कर रहा, बल्कि नई अर्थव्यवस्था के उभरते क्षेत्रों में भी अपनी जगह बनाने की कोशिश में है। फूड प्रोसेसिंग और टेक्सटाइल जैसे स्थापित सेक्टरों के साथ आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई), डेटा, ड्रोन, डिफेंस, आईटी और साइंस सिटी जैसे क्षेत्रों पर सरकार का फोकस बढ़ा है। लक्ष्य साफ है कि प्रदेश की स्थानीय क्षमताओं और संसाधनों को निवेश, उत्पादन और रोजगार से जोड़कर औद्योगिक विकास का दायरा बड़े शहरों से आगे जिलों तक पहुंचाना।

मध्यप्रदेश निवेश के नए ठिकाने के तौर पर अपनी दावेदारी मजबूत कर रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की सरकार निवेश आकर्षित करने के लिए नीतिगत बदलावों से लेकर इंफ्रास्ट्रक्चर और कनेक्टिविटी तक कई स्तरों पर काम कर रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश में व्यापार सुगमता के लिए किए गए सुधारों को प्रदेश में भी लागू किया गया है। सरकार के मुताबिक, कई पुराने और अप्रासंगिक कानून खत्म किए गए हैं और 25 से ज्यादा नई नीतियां लागू की गई हैं। इन बदलावों का उद्देश्य निवेशकों के लिए कारोबारी माहौल आसान बनाना और उद्योगों की स्थापना की प्रक्रिया को गति देना है।

इसी सिलसिले में मुख्यमंत्री डॉ. यादव निवेशकों से संपर्क के लिए दुबई यात्रा पर हैं। उन्होंने यहां प्रमुख उद्योग समूहों के साथ कई महत्वपूर्ण वन-टू-वन और शासन-स्तरीय बैठकें कर निवेश के लिए आमंत्रित किया। उन्होंने कहा कि निवेशक बिना किसी संकोच के मध्य प्रदेश में निवेश करें। हमारी सरकार आपको कभी भी निराश नहीं होने देगी। उनका कहना है कि एआई-डेटा से डिफेंस और फूड प्रोसेसिंग तक हर सेक्टर में निवेश के लिए राज्य में अनुकूल वातावरण तैयार किया गया है।

एमएसएमई से रोजगार को मजबूती

मध्यप्रदेश की औद्योगिक अर्थव्यवस्था में एमएसएमई सेक्टर तेजी से महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। इस क्षेत्र से 1 करोड़ 10 लाख से अधिक लोग रोजगार से जुड़े हैं। दूसरी ओर, प्रदेश ने निर्यात के मोर्चे पर भी अपनी स्थिति मजबूत की है। मुख्यमंत्री ने दुबई यात्रा के दौरान बताया कि वर्ष 2026-27 में मध्यप्रदेश से 76 हजार करोड़ रुपए से अधिक का निर्यात हुआ है। सरकार का फोकस सिर्फ बड़े उद्योगों को प्रदेश में लाने तक सीमित नहीं है। स्थानीय उद्यमों को विस्तार के लिए जरूरी सुविधाएं और बेहतर कारोबारी वातावरण उपलब्ध कराने पर भी जोर दिया जा रहा है।

एआई, डेटा, ड्रोन और डिफेंस पर नई रणनीति

दुनिया की अर्थव्यवस्था तेजी से तकनीक आधारित हो रही है। इसी बदलाव को देखते हुए मध्यप्रदेश ने भी भविष्य के सेक्टरों पर नजरें टिकाई हैं। एआई, डेटा, ड्रोन और डिफेंस जैसे क्षेत्रों को नई औद्योगिक संभावनाओं के तौर पर देखा जा रहा है। डिफेंस सेक्टर में इसकी तस्वीर जबलपुर में नजर आती है। अगस्त में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने जबलपुर स्थित वाहन कारखाने में टी-सीरीज टैंक ओवरहाल परियोजना की आधारशिला रखी। मिनी रत्न रक्षा सार्वजनिक क्षेत्र उपक्रम आर्मर्ड व्हीकल निगम लिमिटेड (एवीएनएल) की इस इकाई में टी-72 और टी-90 टैंकों की मरम्मत के लिए अत्याधुनिक सुविधाएं विकसित की जाएंगी। इससे सेना को मरम्मत किए गए टैंक समय पर उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी।

एआई मिशन से 50 हजार रोजगार का लक्ष्य

मध्यप्रदेश की नई औद्योगिक रणनीति में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को खास जगह दी गई है। सरकार चरणबद्ध तरीके से ‘स्टेट एआई मिशन’ लॉन्च कर रही है। इसका लक्ष्य प्रदेश में एआई से जुड़े 50 हजार से अधिक रोजगार के अवसर तैयार करना और सरकारी कामकाज में एआई के इस्तेमाल को बढ़ावा देना है। एमपी ई-सेवा और संपदा 2.0 जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म्स में भी एआई आधारित तकनीकों को शामिल किया जा रहा है। रियल टाइम ट्रैकिंग और चेहरे की पहचान जैसी तकनीकों के इस्तेमाल से सरकारी सेवाओं को अधिक तेज और प्रभावी बनाने की कोशिश की जा रही है। यानी एआई को प्रदेश में सिर्फ तकनीक के तौर पर नहीं, बल्कि रोजगार, सुशासन और नई अर्थव्यवस्था के आधार के रूप में विकसित करने की दिशा में कदम बढ़ाए जा रहे हैं।

जमीन, बिजली और पानी को निवेश की ताकत बनाने की कोशिश

निवेशकों को आकर्षित करने में मध्यप्रदेश की सबसे बड़ी ताकतों में पर्याप्त जमीन, लैंड बैंक, बिजली और पानी की उपलब्धता को गिना जा रहा है। प्रदेश में सरप्लस बिजली और पर्याप्त जल संसाधन हैं। ग्रीन एनर्जी के क्षेत्र में भी राज्य का विस्तार हो रहा है। उद्योगों के लिए सिर्फ जमीन उपलब्ध होना पर्याप्त नहीं होता। बिजली, पानी, परिवहन, कनेक्टिविटी और बुनियादी ढांचा भी उतना ही महत्वपूर्ण है। सरकार का कहना है कि इन क्षेत्रों में क्षमता बढ़ाने के साथ उद्योगों के लिए कारोबारी माहौल को आसान बनाया गया है।

बड़े शहरों से जिलों तक उद्योग पहुंचाने की तैयारी

सरकार अब औद्योगिक विकास को बड़े शहरों तक सीमित नहीं रखना चाहती। रीजनल इंडस्ट्री कॉन्क्लेव को इसके लिए महत्वपूर्ण माध्यम बनाया गया है। मुख्यमंत्री के अनुसार, कॉन्क्लेव के जरिए स्थानीय संसाधनों और औद्योगिक संभावनाओं को निवेश से जोड़ने के अवसर मिले हैं। अब अगला फोकस जिला स्तर पर औद्योगिक गतिविधियों के विस्तार का है। प्रत्येक जिले की स्थानीय क्षमता और उपलब्ध संसाधनों की पहचान कर उन्हें उद्योग, निवेश और रोजगार के अवसरों में बदलने की योजना है। इससे औद्योगिक विकास का दायरा भोपाल, इंदौर जैसे बड़े शहरों से आगे छोटे शहरों और जिलों तक पहुंचाने की कोशिश होगी।

प्रदेश में बीते करीब 8 महीने में गोदरेज जैसी बड़ी-बड़ी कंपनियों की इकाइयों के लोकार्पण और भूमिपूजन किए गए हैं। साथ ही पिछले साल अगस्त में भूमिपूजन के बाद 13 महीने में सीहोर में दुनिया की सबसे बड़ी ट्रांसफॉर्मर निर्माण फैक्ट्री प्रारंभ हो गई है। इस यूनिट में हर साल 365 ट्रांसफॉर्मर तैयार होंगे और 2 हजार लोगों को रोजगार मिलेगा।

एयर कनेक्टिविटी से निवेश और पर्यटन को सहारा

निवेश और पर्यटन के विस्तार में बेहतर एयर कनेक्टिविटी को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। भोपाल और इंदौर से अंतरराष्ट्रीय उड़ानों का संचालन हो रहा है। इसके अलावा प्रदेश में चार नए एयरपोर्ट विकसित करने की तैयारी है। ग्वालियर और जबलपुर भी एयर कनेक्टिविटी के लिहाज से तैयार हैं और भविष्य में यहां से अंतरराष्ट्रीय उड़ानें शुरू करने की संभावनाएं हैं। सड़क, रेल और हवाई संपर्क के विस्तार को उद्योग, व्यापार, निवेश और पर्यटन के लिए महत्वपूर्ण आधार माना जा रहा है।

महाकाल लोक के बाद पर्यटन में बढ़ी गतिविधियां

औद्योगिक निवेश के साथ पर्यटन को भी मध्यप्रदेश की अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण आधार बनाया जा रहा है। महाकाल लोक के निर्माण के बाद उज्जैन में श्रद्धालुओं की संख्या में अभूतपूर्व वृद्धि हुई है। सरकार के अनुसार, इस वर्ष प्रदेश में करीब 14 करोड़ बाहरी पर्यटक आए हैं। पर्यटन में बढ़ती गतिविधियों का असर होटल, परिवहन, खान-पान, हस्तशिल्प, स्थानीय उत्पाद, फूड प्रोसेसिंग और सेवा क्षेत्र पर भी पड़ रहा है। इससे रोजगार और निवेश के नए अवसर बनने की उम्मीद है।

30 लाख करोड़ से ज्यादा के निवेश प्रस्ताव

मध्यप्रदेश के निवेश अभियान का सबसे बड़ा मंच फरवरी 2025 में भोपाल में आयोजित दो दिवसीय ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट रहा। इसमें 60 देशों के उद्योगपतियों ने भाग लिया और 300 से अधिक कंपनियों के एमडी व सीईओ ने प्रदेश में निवेश की संभावनाओं पर चर्चा की। समिट के दौरान 30 लाख करोड़ रुपए से अधिक के निवेश के एमओयू साइन हुए। आयोजन में 25 हजार से अधिक रजिस्ट्रेशन हुए।

स्थानीय क्षमता से ग्लोबल निवेश तक

मध्यप्रदेश की निवेश रणनीति अब पारंपरिक उद्योगों से आगे बढ़कर नई अर्थव्यवस्था के क्षेत्रों तक पहुंच रही है। फूड प्रोसेसिंग, टेक्सटाइल, आईटी, एआई, डेटा, ड्रोन, डिफेंस और पर्यटन जैसे क्षेत्रों में निवेश की संभावनाएं तलाशने के साथ जमीन, बिजली, पानी, ग्रीन एनर्जी, इंफ्रास्ट्रक्चर और एयर कनेक्टिविटी को निवेश की ताकत के रूप में विकसित करने की कोशिश है।

सरकार की रणनीति का अगला चरण इन संसाधनों को केवल उपलब्ध सुविधाओं के रूप में रखने के बजाय उन्हें औद्योगिक निवेश और रोजगार के इंजन में बदलने का है। यही वजह है कि मध्यप्रदेश अब निवेश के लिए केवल जमीन और संसाधनों की उपलब्धता का दावा नहीं कर रहा, बल्कि स्थानीय क्षमता को निवेश से, निवेश को उत्पादन से और उत्पादन को रोजगार से जोड़ने की दिशा में अपनी नई औद्योगिक तस्वीर पेश कर रहा है।

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हिन्दुस्थान समाचार / उम्मेद सिंह रावत