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महानंदा लीफ चायपत्ती बन रही किशनगंज की पहचान, इस सीजन एक लाख किलो उत्पादन

 


किशनगंज, 03 जून (हि.स.)। बिहार में किशनगंज जिले की जीविका दीदियों द्वारा संचालित महानंदा टी फैक्ट्री जिले की नई पहचान बनती जा रही है।

इस सत्र में अब तक फैक्ट्री में एक लाख किलो महानंदा लीफ चायपत्ती का उत्पादन किया जा चुका है। इसके लिए करीब 5 लाख 22 हजार किलोग्राम हरे चाय पत्ते की खरीद किसानों से की गई है। महानंदा जीविका महिला एग्रो प्रोड्यूसर कंपनी लिमिटेड (एफपीसी) द्वारा पोठिया स्थित टी प्रोसेसिंग एवं पैकेजिंग इकाई में चाय उत्पादन का कार्य किया जा रहा है।

बुधवार को जीविका की जिला परियोजना प्रबंधक (डीपीएम) अनुराधा चंद्रा ने बताया कि एफपीसी के निदेशक मंडल ने इस सीजन 10 लाख किलो चायपत्ती उत्पादन का लक्ष्य निर्धारित किया है। लक्ष्य प्राप्ति के लिए तेजी से काम किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि जीविका दीदियों द्वारा उत्पादित महानंदा लीफ चायपत्ती अब किशनगंज की पहचान बन रही है। पिछले सीजन में फैक्ट्री में डेढ़ लाख किलो चायपत्ती का उत्पादन हुआ था, जिसकी पूरी बिक्री हो चुकी है।

उन्होंने कहा कि चायपत्ती की बिक्री जीविका सामुदायिक संगठन, संकुल संघ, किसान उत्पादक समूह और ग्रामीण बाजारों के माध्यम से की जा रही है। इसके अलावा महानंदा लीफ चायपत्ती ऑनलाइन प्लेटफॉर्म अमेजन पर भी उपलब्ध है। पिछले सीजन में चायपत्ती बिक्री से करीब 2.83 करोड़ रुपये की आय हुई थी। फैक्ट्री के संचालन से स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी बढ़े हैं। वर्तमान में इकाई में 45 लोगों को प्रत्यक्ष रोजगार मिला है, जिनमें 21 महिलाएं और 24 पुरुष शामिल हैं।

उन्होंने कहा कि कर्मियों को 10 हजार से 40 हजार रुपये तक मासिक वेतन दिया जा रहा है। एफपीसी से जुड़े करीब 1800 किसानों से चाय पत्तों की खरीद की जा रही है। 45 किसान संग्रहकों के माध्यम से पत्ते फैक्ट्री तक पहुंचाए जाते हैं और किसानों को सात दिनों के भीतर भुगतान उनके बैंक खातों में कर दिया जाता है।

बिहार सरकार ने अप्रैल 2025 में पोठिया स्थित टी प्रोसेसिंग एवं पैकेजिंग इकाई का संचालन जीविका को सौंपा था। इसके बाद महानंदा जीविका महिला एग्रो प्रोड्यूसर कंपनी लिमिटेड द्वारा फैक्ट्री का संचालन किया जा रहा है, जिससे किसानों की आय बढ़ने के साथ-साथ महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण को भी नई मजबूती मिली है।

हिन्दुस्थान समाचार / धर्मेन्द्र सिंह