मप्र के 'मोबाइल कोर्ट' नवाचार ने बदली राजस्व विवादों के समाधान की तस्वीर, मौके पर सुलझ रहे जमीनों के झगड़े
भोपाल, 28 सितम्बर (हि.स.)। जमीन से जुड़े विवाद अकसर लोगों को तहसील, एसडीएम और दूसरे सरकारी कार्यालयों के चक्कर लगाने को मजबूर कर देते हैं। लेकिन मध्य प्रदेश के गुना जिले में राजस्व विभाग का ‘मोबाइल कोर्ट’ नवाचार इसी सोच को बदलने का काम कर रहा है। प्रशासनिक अमला लोगों को कार्यालय बुलाने के बजाय उनके गांव और विवादित स्थल तक पहुंचकर मामलों का निराकरण कर रहा है। इस पहल को राष्ट्रीय स्तर पर भी पहचान मिल चुकी है।
गुना में यह नवाचार वर्ष 2025 में कलेक्टर किशोर कुमार कन्याल के मार्गदर्शन में शुरू किया गया। इसका उद्देश्य जमीन से जुड़े विवादों का मौके पर पहुंचकर निराकरण करना और ग्रामीणों को अनावश्यक रूप से सरकारी कार्यालयों के चक्कर लगाने से राहत देना है। गुना जिला प्रशासन की इस पहल को अब राष्ट्रीय स्तर पर भी पहचान मिली है। नई दिल्ली में हाल ही में (26 सितंबर 2026 को) आयोजित 109वें स्कोच समिट-2026 में मोबाइल कोर्ट नवाचार को ‘फाउंडेशन ऑफ इनक्लूसिव ग्रोथ’ श्रेणी में स्कोच अवार्ड से सम्मानित किया गया।
424 से अधिक भूमि संबंधी मामलों का निराकरण
जिला प्रशासन के अनुसार मोबाइल कोर्ट के माध्यम से अब तक 424 से अधिक भूमि संबंधी मामलों का निराकरण किया जा चुका है। इस पहल की खासियत यह है कि राजस्व और पुलिस विभाग के अधिकारी मौके पर पहुंचते हैं। वहां संबंधित भूमि, कब्जे अथवा विवाद की स्थिति को देखते हुए पक्षकारों की मौजूदगी में कार्रवाई की जाती है। लंबे समय से चल रहे विवादों को आपसी सहमति से सुलझाने का प्रयास भी किया जाता है। इससे लोगों को अपनी समस्या लेकर बार-बार सरकारी कार्यालयों तक जाने की जरूरत कम होती है।
कार्यालय नहीं, अब विवाद की जगह पर पहुंचता है अमला
मोबाइल कोर्ट का मूल विचार प्रशासन को आमजन के दरवाजे तक पहुंचाने का है। सामान्य तौर पर भूमि विवाद में संबंधित व्यक्ति को आवेदन देने से लेकर सुनवाई और मौके की जांच तक कई स्तरों पर अधिकारियों के संपर्क में रहना पड़ता है। ग्रामीण क्षेत्रों में सरकारी कार्यालय तक पहुंचना भी कई लोगों के लिए समय और खर्च का विषय होता है। मोबाइल कोर्ट में प्रशासन इस प्रक्रिया का एक बड़ा हिस्सा मौके पर ही पूरा करने का प्रयास करता है। राजस्व अधिकारी विवादित भूमि की स्थिति देखते हैं, संबंधित पक्षकारों को सुनते हैं और आवश्यक राजस्व कार्रवाई करते हैं। जरूरत के अनुसार पुलिस की मौजूदगी भी रहती है। इससे विवाद के कारण उत्पन्न होने वाली कानून-व्यवस्था की स्थिति को भी नियंत्रित करने में मदद मिलती है।
मोबाइल कोर्ट के जरिए कार्रवाई का एक उल्लेखनीय मामला 2025 में सामने आया था। सीमा पर तैनात सैनिक मनोज धाकड़ की पैतृक जमीन पर पड़ोसियों द्वारा कब्जा किए जाने की शिकायत सामने आई थी। सैनिक ने गुना कलेक्टर को ई-मेल के जरिए शिकायत भेजी। इसके बाद एसडीएम और तहसीलदार के नेतृत्व में प्रशासनिक टीम ने संबंधित गांव में मोबाइल कोर्ट लगाकर कार्रवाई की और जमीन को कब्जामुक्त कराया।
जुलाई 2026 में कुंभराज तहसील में मोबाइल कोर्ट के जरिए एक आवेदक नन्नूलाल पुत्र मानसिंह मीणा, निवासी ग्राम मोहनपुर, को उसकी भूमि का विधिवत कब्जा दिलाया गया। राजस्व टीम ने मौके पर पहुंचकर आवश्यक कार्रवाई पूरी की। इसके साथ ही प्रशासन ने बताया था कि कुंभराज तहसील में मोबाइल कोर्ट के तहत प्राप्त सभी लंबित आवेदनों का निराकरण कर दिया गया है और उस समय कोई आवेदन शेष नहीं था।
विवाद खत्म करने के साथ सहमति पर भी जोर
मोबाइल कोर्ट की कार्यप्रणाली में केवल प्रशासनिक आदेश जारी करना ही उद्देश्य नहीं है। जहां संभव हो, वहां विवाद के दोनों पक्षों के बीच आपसी सहमति कायम कराने की कोशिश भी की जाती है। भूमि से जुड़े कई मामले लंबे समय तक इसलिए चलते रहते हैं क्योंकि दोनों पक्ष अपने-अपने दावे पर कायम रहते हैं। मौके पर अधिकारियों की मौजूदगी और सभी पक्षों को सुनने से ऐसे मामलों में समाधान की गुंजाइश बनती है। जिला प्रशासन के अनुसार समयबद्ध निराकरण से भूमि संबंधी विवादों को कम करने के साथ कानून-व्यवस्था बनाए रखने में भी सहायता मिलती है।
राष्ट्रीय मंच पर गुना के प्रयोग की पहचान
लगातार सामने आ रहे परिणामों के बीच मोबाइल कोर्ट को स्कोच अवार्ड मिलना इस पहल की राष्ट्रीय पहचान के रूप में सामने आया है। 17 सितंबर को जिला प्रशासन के इस नवाचार को अवार्ड के लिए शॉर्टलिस्ट किए जाने की जानकारी सामने आई थी और 26 सितंबर को नई दिल्ली में आयोजित समारोह में इसे सम्मान मिला।
गुना कलेक्टर किशोर कुमार कन्याल का कहना है कि ‘मोबाइल कोर्ट’ नवाचार ने भूमि विवादों के निराकरण की प्रक्रिया को नया स्वरूप दिया है। इस पहल का उद्देश्य प्रशासन को आमजन के द्वार तक पहुंचाना है। भूमि विवादों के निपटारे के लिए यह व्यवस्था प्रभावी तरीके से काम कर रही है। इसमें राजस्व और पुलिस की टीम विवादित स्थल पर पहुंचकर दोनों पक्षों को सुनती है और उपलब्ध राजस्व अभिलेखों के आधार पर कार्रवाई करती है। जहां संभव होता है, वहां पक्षकारों की आपसी सहमति से विवाद सुलझाया जाता है। इससे लोगों को बार-बार सरकारी कार्यालयों के चक्कर लगाने से राहत मिल रही है।
---------------
हिन्दुस्थान समाचार / मुकेश तोमर