मप्र के गांवों की तरक्की का नया इंजन बना ऋण, इस साल के लिए ₹3.75 लाख करोड़ की ऋण क्षमता
-आरआईडीएफ से अब तक ₹42,664 करोड़ की मदद सिंचाई से सड़क, पानी से गोदाम तक पहुंची संस्थागत पूंजी-26 लाख हेक्टेयर सिंचाई, 17 हजार किमी सड़क और 29 लाख मीट्रिक टन भंडारण क्षमता को मिला आधार
डॉ. मयंक चतुर्वेदी
भोपाल, 07 सितंबर (हि.स.)। मध्य प्रदेश के गांव अब विकास के लिए सिर्फ सरकारी योजनाओं पर निर्भर रहने वाली अर्थव्यवस्था नहीं रह गए हैं। खेती की जरूरतों से लेकर सिंचाई, सड़क, पुल, पेयजल, गोदाम, प्रसंस्करण और ग्रामीण उद्यम तक, विकास के लिए संस्थागत ऋण की मांग और उपयोग दोनों बढ़ रहे हैं। नाबार्ड ने वित्तीय वर्ष 2026-27 में प्रदेश के प्राथमिकता क्षेत्र के लिए ₹3,75,384.29 करोड़ की ऋण क्षमता का अनुमान लगाया है। इसमें कृषि अकेले ₹2,08,743.78 करोड़ का हिस्सा रखती है।
दरअसल, यह आंकड़ा ग्रामीण मध्य प्रदेश में पूंजी की बदलती भूमिका को रेखांकित करता है। अब ऋण फसल चक्र की जरूरत पूरी करने का माध्यम होने के साथ ही ग्रामीण अर्थव्यवस्था में बुनियादी ढांचा और आय सृजित करने वाली परिसंपत्तियां खड़ी करने का जरिया भी बन रहा है।
कृषि सबसे आगे, ₹2.08 लाख करोड़ की संभावित जरूरत
नाबार्ड के राज्य फोकस पेपर 2026-27 के अनुसार कृषि क्षेत्र के लिए अनुमानित ₹2,08,743.78 करोड़ में ₹1,79,589.97 करोड़ फार्म क्रेडिट, ₹6,461.67 करोड़ कृषि अवसंरचना और ₹22,692.14 करोड़ कृषि संबद्ध गतिविधियों के लिए संभावित हैं। मतलब साफ है, अब खेती के साथ ही बराबर से पशुपालन, मत्स्य पालन, भंडारण, प्रसंस्करण और कृषि आधारित कारोबार भी ग्रामीण ऋण व्यवस्था का हिस्सा बन रहे हैं। यानी गांव में बैंकिंग की भूमिका फसल ऋण से आगे बढ़कर ग्रामीण अर्थव्यवस्था की पूरी मूल्य शृंखला तक पहुंच रही है।
आरआईडीएफ से बदली अधोसंरचना की तस्वीर
ग्रामीण विकास के लिए नाबार्ड के ग्रामीण बुनियादी ढांचा विकास कोष (आरआईडीएफ) की भूमिका भी महत्वपूर्ण रही है। राज्य में अब तक 3,761 परियोजनाएं मंजूर की गई हैं और इनके लिए ₹42,664 करोड़ की ऋण सहायता स्वीकृत हुई है। इनमें से 3,329 परियोजनाएं पूरी हो चुकी हैं। इस संबंध में राज्य स्तरीय बैंकर्स समिति के दस्तावेजों के अनुसार इन परियोजनाओं से करीब 26 लाख हेक्टेयर सिंचाई कवरेज, लगभग 17 हजार किलोमीटर सड़क, 55 हजार मीटर पुल, करीब 29 लाख मीट्रिक टन गोदाम क्षमता और लगभग 27 लाख ग्रामीण परिवारों को स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराने में मदद मिली है। स्वास्थ्य ढांचे में 348 स्वास्थ्य केंद्रों का भी उल्लेख है।
अब पैक्स सिर्फ ऋण समिति नहीं
ग्रामीण वित्तीय व्यवस्था में सहकारी संस्थाओं को भी नई भूमिका दी जा रही है। नाबार्ड के दस्तावेजों के अध्ययन से सामने आया है, नई बहुउद्देशीय प्राथमिक कृषि साख समितियों यानी एम-पैक्स के गठन और मौजूदा पैक्स को बहुउद्देशीय बनाने पर जोर है। इन समितियों को ऋण वितरण से आगे बढ़ाकर डेयरी, मत्स्य पालन, कस्टम हायरिंग सेंटर, जनऔषधि केंद्र, कॉमन सर्विस सेंटर और भंडारण जैसी गतिविधियों से जोड़ा जा रहा है। इसका उद्देश्य गांव में ही वित्तीय और कारोबारी गतिविधियों का ऐसा आधार तैयार करना है, जो किसानों और ग्रामीण उद्यमियों को स्थानीय स्तर पर सुविधाएं उपलब्ध करा सके।
ऋण का नया मतलब है, संपत्ति निर्माण
किसान को बीज और खाद के लिए मिला ऋण एक मौसम की जरूरत पूरी करता है। वहीं सिंचाई व्यवस्था, गोदाम, प्रसंस्करण इकाई, डेयरी, मत्स्य पालन या ग्रामीण उद्यम में निवेश लंबे समय तक आय का आधार तैयार करता है। यही ग्रामीण ऋण व्यवस्था के बदलते स्वरूप का सबसे महत्वपूर्ण पहलू है। नाबार्ड के अनुसार 2026-27 के लिए प्रदेश की कुल प्राथमिकता क्षेत्र ऋण क्षमता पिछले वर्ष के अनुमान से करीब 20 प्रतिशत अधिक है। कृषि के साथ एमएसएमई और अन्य प्राथमिकता क्षेत्रों में बढ़ती ऋण क्षमता ग्रामीण तथा अर्धशहरी अर्थव्यवस्था में पूंजी की बढ़ती जरूरत को भी दर्शाती है।
गांव अब पूंजी उपभोक्ता के स्थान पर विकास के निवेशक
रुपए 3.75 लाख करोड़ की संभावित ऋण क्षमता और आरआईडीएफ के तहत रााशि 42,664 करोड़ की सहायता ग्रामीण मध्य प्रदेश में वित्तीय गतिविधियों के बढ़ते पैमाने को सामने रखती है। सड़क, सिंचाई, पानी और भंडारण जैसी सुविधाओं के निर्माण से कृषि उत्पादकता और बाजार तक पहुंच का आधार मजबूत होता है, जबकि कृषि ऋण ग्रामीण परिवारों और उद्यमों को उत्पादन के लिए पूंजी उपलब्ध कराता है। ऐसे में फिलहाल नजर यही आ रहा है कि भाजपा की डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में चल रही राज्य सरकार बदलते मध्य प्रदेश में ग्राम विकास की कहानी कह रही है, जिसमें संस्थागत पूंजी, अधोसंरचना और निवेश के जरिए ग्रामीण अर्थव्यवस्था को निरंतर विस्तारित किया जा रहा है।
ग्रामीण मध्य प्रदेश के 8 बड़े आंकड़े
-2026-27 प्राथमिकता क्षेत्र ऋण क्षमता ₹3,75,384.29 करोड़ ।
-कृषि क्षेत्र की संभावित ऋण क्षमता ₹2,08,743.78 करोड़ ।
-आरआईडीएफ स्वीकृत सहायता ₹42,664 करोड़ ।
-आरआईडीएफ परियोजनाएं मंजूर 3,761 ।
-पूरी हो चुकी परियोजनाएं 3,329 ।
-सिंचाई कवरेज 26 लाख हेक्टेयर ।
-ग्रामीण सड़क 17,000 किमी ।
-गोदाम क्षमता 29 लाख मीट्रिक टन ।
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हिन्दुस्थान समाचार / डॉ. मयंक चतुर्वेदी