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मुर्शिदाबाद में जगत सेठ की ऐतिहासिक राजबाड़ी आधिकारिक पर्यटन सूची में शामिल, रोचक है परिवार का इतिहास

 




कभी बंगाल के नवाबों से लेकर मुगल सल्तनत तक था जगत सेठ परिवार का दबदबा

प्लासी युद्ध के रणनीतिकारों में रहे शामिल

मुर्शिदाबाद, 31 अगस्त (हि.स.)।

बंगाल के इतिहास में धन, सत्ता और राजनीति के सबसे प्रभावशाली नामों में शामिल जगत सेठ परिवार की ऐतिहासिक विरासत एक बार फिर चर्चा में है। मुर्शिदाबाद जिला प्रशासन ने अपने आधिकारिक पर्यटन पोर्टल पर जगत सेठ के निवास स्थान को ऐतिहासिक पर्यटन स्थल की श्रेणी में सूचीबद्ध किया है। जिला प्रशासन की वेबसाइट पर इस स्थान की तस्वीरें और पर्यटन संबंधी जानकारी भी उपलब्ध कराई गई है।

जगत सेठ का नाम बंगाल के एक अत्यंत शक्तिशाली जैन व्यापारी और बैंकिंग परिवार से जुड़ा रहा है। मुर्शिदाबाद जिला प्रशासन भी अपने आधिकारिक विवरण में जगत सेठ को एक प्रभावशाली जैन परिवार के रूप में वर्णित करता है।

इस परिवार की जड़ें राजस्थान के नागौर क्षेत्र से जुड़ी मानी जाती हैं। ऐतिहासिक विवरणों के अनुसार परिवार के पूर्वज हीरानंद साह व्यापार और वित्तीय गतिविधियों के सिलसिले में पटना पहुंचे। बाद में परिवार के सदस्य बंगाल आए और धीरे-धीरे उनकी आर्थिक शक्ति इतनी बढ़ गई कि वे मुगल और बंगाल के नवाबी शासन की वित्तीय व्यवस्था में महत्वपूर्ण स्थान रखने लगे।

परिवार के इतिहास में फतेहचंद का नाम विशेष रूप से महत्वपूर्ण माना जाता है। ऐतिहासिक पारिवारिक विवरणों के अनुसार उन्हें मुगल शासन के दौरान “जगत सेठ” की उपाधि प्रदान की गई। इसके बाद यह उपाधि परिवार की पहचान बन गई और आने वाली पीढ़ियों में परिवार के प्रमुख के साथ जुड़ती चली गई।

बंगाल में नवाबी दौर के दौरान जगत सेठ परिवार केवल व्यापारी नहीं था। परिवार का प्रभाव खजाने, मुद्रा, बैंकिंग और बड़े वित्तीय लेन-देन तक फैला हुआ था। आधिकारिक संग्रहालय विवरण के अनुसार जगत सेठ परिवार बंगाल के नवाबी काल में टकसाल और खजाने के खातों से भी जुड़ा हुआ था।

मुर्शिदाबाद के महिमापुर इलाके में जगत सेठ परिवार का विशाल आवास और वित्तीय केंद्र था। उस समय मुर्शिदाबाद बंगाल की राजनीतिक और आर्थिक राजधानी के रूप में अत्यंत महत्वपूर्ण था। ऐसे में जगत सेठ परिवार का महिमापुर स्थित आवास केवल एक निजी राजबाड़ी नहीं, बल्कि उस दौर की आर्थिक और राजनीतिक गतिविधियों का महत्वपूर्ण केंद्र माना जाता था।

पुराने सरकारी ऐतिहासिक विवरणों में भी महिमापुर स्थित जगत सेठ के आवास का उल्लेख मिलता है। यहां प्लासी के युद्ध के बाद अंग्रेज अधिकारियों और तत्कालीन बंगाल की राजनीति से जुड़े महत्वपूर्ण लोगों की बैठकों का भी जिक्र मिलता है।

1757 की प्लासी की लड़ाई भारतीय इतिहास का एक बड़ा मोड़ थी। इस संघर्ष ने बंगाल में अंग्रेज ईस्ट इंडिया कंपनी की शक्ति बढ़ाने का रास्ता तैयार किया। जगत सेठ परिवार उस समय की राजनीतिक साजिशों और सत्ता परिवर्तन की घटनाओं से जुड़ा हुआ था।

संग्रहालय के आधिकारिक विवरण के अनुसार, जगत सेठ का संबंध उस षड्यंत्र से भी बताया गया है, जिसके परिणामस्वरूप नवाब सिराजुद्दौला को सत्ता से हटाया गया और बाद में उनकी हत्या हुई। इतिहासकारों के अनुसार जगत सेठ परिवार, मीर जाफर और अंग्रेजों के बीच बनी राजनीतिक-आर्थिक समझ के पीछे वित्तीय शक्ति एक महत्वपूर्ण कारक थी।

विडंबना यह रही कि जिस राजनीतिक बदलाव में परिवार की भूमिका रही, वही अंग्रेजी सत्ता के मजबूत होने के बाद धीरे-धीरे उस पुराने भारतीय बैंकिंग तंत्र और परिवार के प्रभाव में गिरावट का कारण भी बना।

प्लासी के बाद अंग्रेज ईस्ट इंडिया कंपनी की शक्ति लगातार बढ़ती गई। बंगाल की पुरानी नवाबी व्यवस्था कमजोर होती गई और सत्ता के साथ-साथ वित्तीय व्यवस्था भी बदलने लगी। जिस परिवार की आर्थिक शक्ति कभी बंगाल की राजनीति को प्रभावित करती थी, उसका प्रभाव धीरे-धीरे कम होता चला गया।

व्यापक ऐतिहासिक संदर्भों में परिवार की अंतिम प्रमुख वंश-परंपरा के समाप्त होने का उल्लेख 20वीं सदी के शुरुआती दौर तक मिलता है, हालांकि परिवार के अंतिम वंशज और संपत्ति के उत्तराधिकार से जुड़े विवरणों पर अलग-अलग स्रोतों में भिन्न जानकारी मिलती है। इसलिए इसे केवल एक तारीख या एक घटना से जोड़कर देखना उचित नहीं होगा।

जगत सेठ की ऐतिहासिक संपत्ति के पतन की कहानी केवल राजनीतिक और आर्थिक नहीं है। पुराने सरकारी ऐतिहासिक दस्तावेजों के अनुसार महिमापुर स्थित पुराने जगत सेठ भवन का बड़ा हिस्सा समय के साथ भागीरथी नदी के कटाव में नष्ट हो गया। पुराने जैन मंदिर को भी भारी नुकसान पहुंचा।

आज जो कुछ बचा है, वह उस विशाल अतीत की याद दिलाता है। पुराने विवरणों में भवन के अवशेष, मंदिर और अन्य संरचनाओं के नुकसान का उल्लेख मिलता है। यही कारण है कि जगत सेठ की राजबाड़ी आज केवल एक इमारत नहीं, बल्कि बंगाल के बदलते इतिहास और समय के प्रभाव की जीवित कहानी बन गई है।

जगत सेठ के ऐतिहासिक आवास के एक हिस्से को अब हाउस ऑफ़ जगत सेठ म्यूजियम के रूप में संरक्षित किया गया है। भारत सरकार से जुड़े म्यूज़ियम ऑफ़ इंडिया पोर्टल के अनुसार इस संग्रहालय की स्थापना 1980 में हुई थी और यहां जगत सेठ परिवार से जुड़ी कई ऐतिहासिक वस्तुएं संरक्षित हैं।

संग्रहालय में पुराने सिक्के, बंगाल की मशहूर मलमल, बहुमूल्य वस्त्र, सोने और चांदी के धागों से बनी बनारसी साड़ियां तथा परिवार के निजी उपयोग की कई वस्तुएं संग्रहित हैं।

संग्रहालय के बारे में उपलब्ध विवरणों में भवन के भूमिगत हिस्से और एक कथित गुप्त सुरंग का भी उल्लेख है, जिसने इस ऐतिहासिक स्थान के प्रति लोगों की जिज्ञासा को और बढ़ाया है।

मुर्शिदाबाद जिला प्रशासन ने जगत सेठ हाउस को अपनी आधिकारिक वेबसाइट के हिस्टोरिक पर्यटन वर्ग में शामिल किया है। वेबसाइट पर हाउस ऑफ जगत सेठ को मुर्शिदाबाद के अन्य प्रमुख ऐतिहासिक स्थलों—हजारदुआरी, कथगोला, नसीपुर राजबाड़ी और सिराजुद्दौला के मकबरे—के साथ पर्यटन सूची में रखा गया है।

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हिन्दुस्थान समाचार / संतोष विश्वकर्मा