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गुजरात के मोरबी में कांतिलाल अमृतिया का कमाल, बंजर जमीन को 10 लाख पेड़ों से बना दिया ‘नमो वन’

 




गांधीनगर, 25 मई (हि.स.)। गुजरात के मोरबी में राज्य के श्रम, कौशल विकास और रोजगार राज्य मंत्री कांतिलाल अमृतिया ने पर्यावरण संरक्षण की दिशा में अनोखी मिसाल पेश की है। मच्छू डैम-2 के किनारे स्थित 1200 बीघा बंजर जमीन को उन्होंने मात्र आठ महीनों में हरियाली से भरकर विशाल ‘नमो वन’ में बदल दिया। यहां दस लाख से अधिक पौधे लगाए गए, जो अब तेजी से पेड़ों का रूप ले रहे हैं।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के 75वें जन्मदिन पर वर्ष 2025 में मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने इस ‘नमो वन’ का लोकार्पण किया था जो भूमि कभी वीरान और अनुपजाऊ थी, वहां आज हरियाली लहलहा रही है। हाल ही में स्थानीय निकाय चुनाव से पहले मुख्यमंत्री ने दोबारा इस वन का दौरा किया और यहां आने वाले लोगों की सुविधा के लिए 3 करोड़ रुपए की विशेष ग्रांट से आइकॉनिक रोड बनाने की घोषणा की।

राज्य सरकार के सूचना विभाग के अनुसार मोरबी पांजरापोल ट्रस्ट के ट्रस्टी कांतिलाल अमृतिया ने पर्यावरण संरक्षण के संकल्प के साथ इस अभियान की शुरुआत की थी। उन्होंने बताया कि जमीन पूरी तरह बंजर थी, इसलिए सबसे पहले उसे समतल किया गया। बाहर से हजारों टन उपजाऊ मिट्टी और गोबर खाद मंगाकर जमीन को खेती योग्य बनाया गया। इसके बाद पूरे क्षेत्र में बाड़ लगाकर पौधरोपण शुरू किया गया।

इस अभियान में करीब 500 लोगों ने लगातार 37 दिनों तक काम किया। प्रतिदिन 25 से 30 हजार पौधे लगाए गए और आखिरकार 10 लाख पौधे लगाने का लक्ष्य पूरा हुआ। वर्तमान में इन पौधों की देखरेख और सिंचाई की जिम्मेदारी सद्भावना वृद्धाश्रम निभा रहा है।

64 वर्षीय कांतिलाल अमृतिया हाल ही में कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से भी जूझ चुके हैं। सर्जरी और पांच कीमोथेरेपी के बाद भी उन्होंने हिम्मत नहीं हारी। वर्तमान में वे इम्यूनोथेरेपी ले रहे हैं। उन्होंने कहा कि कैंसर से उबरने के बाद उन्हें लगता है कि प्रकृति ने उन्हें दूसरा जीवन दिया है और अब वे अपना शेष जीवन वृक्षारोपण और प्राकृतिक खेती के लिए समर्पित करना चाहते हैं।

कांतिलाल ने सरकार से मच्छू डैम के आसपास की सरकारी जमीन उपलब्ध कराने की भी मांग की है, ताकि भविष्य में और बड़े स्तर पर वृक्षारोपण अभियान चलाया जा सके। उन्होंने इससे पहले मच्छू डैम के किनारे आठ चेकडैम बनाकर जल संरक्षण का भी महत्वपूर्ण कार्य किया है। उनका कहना है कि प्रकृति संरक्षण केवल पर्यावरण नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के भविष्य से जुड़ा विषय है।

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हिन्दुस्थान समाचार / यजुवेंद्र दुबे