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एमसीबी: बदली धान खरीद व्यवस्था से किसान रमाशंकर को मिला मेहनत का पूरा सम्मान

 






मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर, 12 जनवरी (हि.स.)। छत्तीसगढ़ में खरीफ विपणन वर्ष 2025-26 किसानों के लिए सिर्फ धान बेचने का मौसम नहीं, बल्कि भरोसे, सम्मान और आत्मविश्वास से भरा एक नया दौर बनकर सामने आया है। राज्य सरकार की आधुनिक, तकनीक आधारित और किसान-केंद्रित धान खरीदी व्यवस्था ने यह भरोसा मजबूत किया है कि अब किसान की मेहनत सुरक्षित है और उसका उचित मूल्य समय पर सीधे बैंक खाते में पहुंच रहा है।

इसी बदली हुई व्यवस्था की सशक्त मिसाल बने हैं मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर जिले के ग्राम पोड़ीडीह निवासी किसान रमाशंकर, जिन्होंने खड़गवां उपार्जन केंद्र में धान विक्रय कर इस नई प्रणाली की प्रभावशीलता को प्रत्यक्ष रूप से अनुभव किया।

किसान रमाशंकर वर्षों से खेती से जुड़े एक साधारण, परिश्रमी और जुझारू किसान हैं। मौसम की अनिश्चितता, बढ़ती लागत और बाजार की चिंता के बावजूद उन्होंने पूरी लगन से धान की फसल तैयार की। राज्य सरकार की प्रति एकड़ 21 क्विंटल तक धान खरीदी की नीति और 3100 रुपये प्रति क्विंटल समर्थन मूल्य ने उनके मन से असुरक्षा और चिंता को दूर किया है। यह नीति न केवल आर्थिक संबल दे रही है, बल्कि खेती के प्रति नया आत्मविश्वास और सम्मान भी प्रदान कर रही है।

जब रमाशंकर धान विक्रय के लिए खड़गवां उपार्जन केंद्र पहुंचे, तो उन्हें पहले की तुलना में कहीं अधिक सुव्यवस्थित, अनुशासित और किसान-हितैषी व्यवस्था देखने को मिली। केंद्र पर बैठने की समुचित सुविधा, स्वच्छ पेयजल और कर्मचारियों का सहयोगी व्यवहार इस बात का प्रमाण था कि अब खरीदी प्रक्रिया में किसान की सुविधा और सम्मान को प्राथमिकता दी जा रही है। न लंबी कतारें थीं, न अनावश्यक प्रतीक्षा और न ही किसी प्रकार की असमंजस की स्थिति।

धान खरीद के दौरान डिजिटल तौल कांटा, फोटो आधारित सत्यापन और रियल-टाइम डेटा एंट्री जैसी आधुनिक तकनीकों के उपयोग ने पूरी प्रक्रिया को पारदर्शी और भरोसेमंद बना दिया। सभी कार्यवाही किसान की मौजूदगी में संपन्न हुई, जिससे किसी भी तरह की शंका की गुंजाइश नहीं रही। तकनीक के सफल इस्तेमाल से समय की बचत हुई और व्यवस्था के प्रति किसानों का विश्वास और मजबूत हुआ।

खरीफ विपणन वर्ष 2025-26 में रमाशंकर ने कुल 63.20 क्विंटल धान का सफलतापूर्वक विक्रय किया। पूरी प्रक्रिया समयबद्ध, सुचारु और बिना किसी बाधा के पूरी हुई। अपने परिश्रम की उपज को सम्मानजनक और पारदर्शी तरीके से बिकते देखकर उनके चेहरे पर संतोष और गर्व साफ झलक रहा था। धान विक्रय के बाद भुगतान राशि सीधे बैंक खाते में जमा होने से उनकी आर्थिक स्थिति सुदृढ़ हुई है, जिससे अब वे बच्चों की शिक्षा, घरेलू जरूरतों और आगामी कृषि सत्र की तैयारी को लेकर अधिक आत्मविश्वास के साथ योजनाएं बना पा रहे हैं।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में लागू की गई किसान-हितैषी नीतियों के प्रति संतोष व्यक्त करते हुए रमाशंकर ने कहा कि बदली हुई धान खरीद व्यवस्था ने किसानों के मनोबल को नई ऊंचाई दी है और खेती को एक सुरक्षित, सम्मानजनक और स्थायी आजीविका के रूप में स्थापित किया है। किसान रमाशंकर की यह कहानी छत्तीसगढ़ के उन हजारों किसानों की भावना और विश्वास को दर्शाती है, जो नई व्यवस्था से लाभान्वित होकर आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ रहे हैं। यह इस बात का जीवंत प्रमाण है कि सही नीति, आधुनिक तकनीक और संवेदनशील प्रशासन मिलकर किसान के जीवन में वास्तविक और सकारात्मक बदलाव ला सकते हैं।

हिन्दुस्थान समाचार / पारस नाथ सिंह