बाइक से 25 हजार किलोमीटर का भ्रमण, 26 राज्यों की यात्रा कर रामानुजगंज पहुंचे दिल्ली के पंकज
-संस्कृति और परंपराओं को करीब से समझने के साथ दे रहे एकता और भाईचारे का संदेश
बलरामपुर, 16 अगस्त (हि.स.)। देश को देखने का सपना कई लोग देखते हैं, लेकिन उसे पूरा करने के लिए पंकज यादव ने बाइक को अपना साथी बनाया है। नई दिल्ली के गोविंदपुरी निवासी 32 वर्षीय पंकज पिछले छह महीने से बाइक पर भारत भ्रमण कर रहे हैं। अब तक करीब 25 हजार किलोमीटर की दूरी तय कर वे 26 राज्यों की यात्रा कर चुके हैं। इसी क्रम में उनका सफर आज बलरामपुर जिले के रामानुजगंज तक पहुंचा है।
पंकज के लिए यह यात्रा सिर्फ अलग-अलग जगहों पर घूमने तक सीमित नहीं है। उनका उद्देश्य भारत के अलग-अलग हिस्सों की संस्कृति, परंपराओं, खान-पान और लोगों के रहन-सहन को करीब से समझना है। यात्रा के दौरान स्थानीय लोगों से बातचीत कर वे देश की विविधता को महसूस कर रहे हैं। साथ ही लोगों के बीच आपसी भाईचारे और एकता का संदेश देने की कोशिश कर रहे हैं।
लंबे सफर के दौरान पंकज ने अलग-अलग राज्यों के लोगों से मुलाकात की। उन्होंने महसूस किया कि भाषा, खान-पान और जीवनशैली अलग होने के बावजूद लोगों के बीच अपनापन और सहयोग की भावना हर जगह देखने को मिलती है।
पंकज ने बताया कि, सड़क यात्रा का सबसे बड़ा फायदा यह है कि पर्यटक स्थलों के साथ उन गांवों और कस्बों को भी देखने का मौका मिलता है, जहां सामान्य पर्यटन यात्राओं में पहुंचना मुश्किल होता है। यही अनुभव उनके भारत भ्रमण को खास बना रहा है।
पंकज का सफर अभी पूरा नहीं हुआ है। अगस्त में वे उत्तर प्रदेश और छत्तीसगढ़ के विभिन्न क्षेत्रों का भ्रमण करेंगे। इसके बाद दिल्ली लौटने की योजना है। आगे की यात्रा में भी उनका प्रयास नए स्थानों को देखने के साथ वहां की स्थानीय संस्कृति और लोगों को समझने का रहेगा।
लंबी बाइक यात्रा के दौरान पंकज अपने साथ जरूरत का लगभग पूरा सामान रखते हैं। टेंट, कपड़े, खाने-पीने की सामग्री, पेट्रोल और फोल्डिंग कुर्सी जैसी चीजें उनकी यात्रा का हिस्सा हैं।
किसी सुरक्षित स्थान पर पहुंचने के बाद वे कई बार खुद टेंट लगाकर रात गुजारते हैं। यात्रा के दौरान कुछ पेट्रोल पंपों पर भी उन्हें रुकने की सुविधा मिल जाती है। इस तरह वे कम खर्च में अपनी यात्रा को लगातार आगे बढ़ा रहे हैं।
रामानुजगंज पहुंचने के बाद पंकज ने शिव मंदिर में विश्राम किया। मंदिर के मुख्य पुजारी श्याम कुशल पांडेय ने उनकी मदद की। पंकज के मुताबिक छह महीने से चल रही इस यात्रा के दौरान उन्हें अब तक किसी बड़ी परेशानी का सामना नहीं करना पड़ा है।
उनका कहना है कि रास्ते में अनजान लोगों से भी कई बार सहयोग और अपनापन मिला, जिससे यात्रा का अनुभव और बेहतर हुआ।
पंकज ने बताया कि भारत भ्रमण शुरू करने से पहले वे सेल्समैन की नौकरी करते थे। नौकरी के दौरान बचाए गए पैसों से उन्होंने इस यात्रा की शुरुआत की। इसके लिए उन्होंने परिवार से आर्थिक सहायता नहीं ली।उनका मानना है कि किसी बड़े सपने को पूरा करने के लिए हमेशा बड़े संसाधनों की जरूरत नहीं होती। मजबूत इच्छाशक्ति और सही योजना के साथ सीमित साधनों में भी लक्ष्य की ओर बढ़ा जा सकता है।
पंकज की यात्रा अब सिर्फ उनका निजी अनुभव नहीं रह गई है। उनके सफर की कहानी उन युवाओं के लिए प्रेरणा बन रही है, जो अपने सपनों को पूरा करना चाहते हैं लेकिन संसाधनों की कमी को बाधा मानते हैं।
करीब 25 हजार किलोमीटर और 26 राज्यों का सफर पूरा कर चुके पंकज अभी भी रास्ते में हैं। उनके लिए यह यात्रा केवल भारत घूमने की नहीं, बल्कि देश की विविधता को समझने और अलग-अलग लोगों से जुड़ने की कोशिश है। उनका संदेश है कि भारत की अलग-अलग संस्कृतियां और परंपराएं मिलकर देश की खूबसूरत तस्वीर बनाती हैं और यही विविधता आपसी एकता को मजबूत करती है।
हिन्दुस्थान समाचार / विष्णु पांडेय