अमरकंटक के बाजार में छाई जंगली मशरूम ‘पिहरी’, 400 रुपये किलो तक भाव
अनूपपुर, 23 सितंबर (हि.स.)। वर्षा ऋतु के साथ ही मध्य प्रदेश के अमरकंटक के बाजार में इन दिनों जंगली मशरूम ‘भोंडो पिहरी’ की आवक बढ़ गई है। जंगलों में प्राकृतिक रूप से मिलने वाली यह मौसमी वन्य उपज अपने खास स्वाद और सीमित उपलब्धता के कारण स्थानीय लोगों के बीच काफी लोकप्रिय है। अमरकंटक के बाजार में पिहरी की खरीदारी के लिए लोगों की अच्छी भीड़ देखी जा रही है।
इन दिनों बाजार में पिहरी की कीमत 350 से 400 रुपये प्रति किलो तक है। ग्राहकों की सुविधा के लिए इसे 100 रुपये पाव के हिसाब से भी बेचा जा रहा है। वर्षा ऋतु में जंगल से मिलने वाली इस उपज की मांग बनी हुई है और स्थानीय लोग इसे उत्साह के साथ खरीद रहे हैं।
जंगल से बाजार तक पहुंच रही पिहरी
छत्तीसगढ़ के गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले के केवची निवासी नरेश यादव, परसराम यादव और दिलीप यादव ने बताया कि वन क्षेत्रों में रहने वाले ग्रामीण जंगलों से पिहरी एकत्रित कर बाजार तक पहुंचाते हैं। ग्रामीणों से पिहरी करीब 300 से 350 रुपये किलो की दर से खरीदी जाती है, जिसे अमरकंटक बाजार में लगभग 400 रुपये किलो तक बेचा जा रहा है।
ग्रामीणों के मुताबिक पिहरी पूरी तरह मौसमी वन्य उपज है। वर्षा ऋतु में इसकी उपलब्धता लगभग एक महीने तक रहती है। फिलहाल बाजार में इसकी आवक जारी है और अगले करीब 15 दिनों तक जंगल से पिहरी मिलने की संभावना बताई जा रही है। इसके बाद इसकी उपलब्धता धीरे-धीरे कम होने लगती है।
सब्जी से लेकर चटनी तक में इस्तेमाल
भोंडो पिहरी अपने विशिष्ट स्वाद के कारण स्थानीय खान-पान में खास स्थान रखती है। ग्रामीण और स्थानीय लोग इसकी सब्जी बनाकर खाते हैं। इसके अलावा पिहरी से चटनी भी तैयार की जाती है, जिसे स्थानीय लोगों के बीच काफी पसंद किया जाता है।
केवची निवासी नरेश यादव ने बताया कि वर्षा के मौसम में पिहरी की आवक का स्थानीय लोगों को इंतजार रहता है। जंगल से सीमित अवधि के लिए मिलने वाली इस उपज का स्वाद सामान्य मशरूम से अलग माना जाता है, जिसके चलते बाजार में इसकी मांग बनी रहती है।
महानगरों में कीमत और अधिक
स्थानीय व्यापारियों के अनुसार, महानगरों में इस तरह के जंगली मशरूम की कीमत 700 से 800 रुपये प्रति किलो तक पहुंच जाती है। इसके मुकाबले अमरकंटक के बाजार में 350 से 400 रुपये किलो की कीमत पर पिहरी उपलब्ध होने से स्थानीय खरीदारों के साथ यहां आने वाले पर्यटक भी इसे खरीदने में रुचि दिखा रहे हैं।
अमरकंटक के आसपास के वन क्षेत्रों से निकलकर बाजार तक पहुंचने वाली भोंडो पिहरी यहां की पारंपरिक खाद्य संस्कृति और वनांचल की प्राकृतिक उपज की पहचान भी बन गई है। वर्षा ऋतु में सीमित समय के लिए मिलने वाली यह मौसमी वन्य सब्जी बाजार की रौनक बढ़ाने के साथ लोगों की थाली में भी अपनी खास जगह बनाए हुए है।
हिन्दुस्थान समाचार / राजेश शुक्ला