पीएम एफएमई योजना से मप्र में तीन वर्षों में साढ़े 8 हजार हितग्राही बने उद्यमी, हजारों को मिला रोजगार
- तीन वर्ष में 292 करोड़ रुपये की दी अनुदान सहायता
भोपाल, 21 अप्रैल (हि.स.) । मध्य प्रदेश में तीन वर्षों में प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्यम उन्नयन योजना के तहत साढ़े 8 हजार से अधिक हितग्राही उद्यमी बनकर आत्मनिर्भर हुए और हजारों लोगों को रोजगार मिला। सरकार की अनुदान सहायता से स्थापित हजारों इकाइयों ने ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती देते हुए लाभ और आय में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की।
प्रदेश के सीहोर जिले के आष्टा विकासखंड के श्यामलाल परमार, ग्राम मेंडोरा के लोकेश गौर, चैनपुरा के मोहन शर्मा, झाबुआ जिले के ग्राम रायचुरिया के भैरूलाल मकवाना प्रदेश के उन साढ़े 8 हजार हितग्राहियों में से चुनिंदा है, जिन्होंने प्रधानमंत्री सूक्ष्म, खाद्य उद्यम उन्नयन योजना (पीएम-एफएमई) के माध्यम से अपनी पहचान एक उद्यमी के रूप में बनाई है। साथ ही बड़ी संख्या में अन्य लोगों को रोजगार भी मुहैया कराया है।
जनसंपर्क अधिकारी अनिल वशिष्ठ ने मंगलवार को जानकारी देते हुए बताया कि मध्य प्रदेश में गत 3 वर्षों में 5 हजार 615 उद्यम इकाइयों की स्थापना की गई है। केन्द्र सरकार की भागीदारी से संचालित इस योजना में 3 वर्षों में 292 करोड़ से अधिक की अनुदान सहायता उपलब्ध कराई गई है। इसमें 175 करोड़ 21 लाख रुपये केन्द्रांश और 116 करोड़ 81 लाख रुपये राज्यांश के रूप में दिये गये है। योजना में हितग्राही व्यक्तिगत इकाई या समूह के रूप में योजना से जुड़ सकते हैं।
उन्होंने बताया कि सीहोर जिले के आष्टा विकासखंड के श्यामलाल परमार द्वारा आलू की चिप्स (वेफर्स) निर्माण यूनिट स्थापित की गई। इसके लिये पीएम-एफएमई योजना के तहत 23 लाख 24 हजार रूपये का अनुदान मुहैया कराया गया है। श्यामलाल का मानना है कि यूनिट के लिये कच्चा माल आसपास के गांवों से आसानी से उपलब्ध हो रहा है। इससे लागत पर नियंत्रण कर ज्यादा लाभ कमाया जा सका है।
इसी प्रकार ग्राम मेंडोरा के लोकेश गौर ने दुग्ध और उससे बनने वाले उत्पाद की यूनिट गांव में ही प्रारंभ की है। इसके लिये 19 लाख 45 हजार रुपये का अनुदान योजना के तहत प्राप्त हुआ है। सीहोर जिले के ही चैनपुरा के मोहन शर्मा ने भी साढ़े 22 लाख का अनुदान प्राप्त कर गांव में ही दलहन उत्पादन यूनिट प्राप्त की है। इसमें दालों की ग्रेडिंग, पैकिंग का काम भी प्रारंभ किया गया है।
झाबुआ जिले के रायपुरिया के भेरूलाल मकवाना की कहानी और भी प्रेरणादायक है। उन्होंने एक साल में ही अपनी आय को दोगुना 2.5 लाख से 5 लाख रुपये कर लिया है। अनुसूचित जनजाति वर्ग के भेरूलाल दूध डेयरी प्रारंभ करने के लिये प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्यम योजना में 3.25 लाख रुपये का ऋण स्वीकृत कराया। इस राशि से गांव में दूध डेयरी का काम प्रारंभ कर दूध, दही, पनीर का उत्पादन कर 250 ग्राम से एक किलो तक की पैकिंग भी कर रहे है। पहले वह सालभर में 2.5 लाख रुपये कमाते थे। इस साल उन्होंने 5 लाख से अधिक मुनाफा कमाया है।
प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्यम योजना की सफलता की कहानियां पूरे प्रदेश में हैं। वित्तीय वर्ष 2023-24 में 2 हजार 147 हितग्राहियों को 80 करोड़ 11 लाख रूपये, वर्ष 2024-25 में 2 हजार 452 हितग्राहियों को 82 करोड़ 92 लाख रुपये तथा वर्ष 2025-26 में 3 हजार 856 हितग्राहियों को 129 करोड़ रुपये का अनुदान उपलब्ध कराया गया है।
जनसंपर्क अधिकारी ने बताया कि यह योजना वर्ष 2020-21 से वर्ष 2024-25 तक के लिये प्रारंभ की गई थी, लेकिन मध्य प्रदेश में योजना की सफलता और प्रगति को देखते हुए इसे भारत सरकार द्वारा एक वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिये बढ़ाया गया।
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हिन्दुस्थान समाचार / उम्मेद सिंह रावत