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एक साल की मेहनत, दो साल का इंतजार, पीएम मोदी ने स्वीकार किया छात्र का बनाया पोर्ट्रेट

 




सूरत, 05 जून (हि.स.)। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सूरत दौरे के दौरान एक भावुक और प्रेरणादायक दृश्य देखने को मिला। जनसभा को संबोधित करते समय प्रधानमंत्री की नजर भीड़ में खड़े एक युवक के हाथ में मौजूद उनके विशाल पोर्ट्रेट पर पड़ी। चित्र देखकर प्रधानमंत्री इतने प्रभावित हुए कि उन्होंने मंच से ही युवक की कला की सराहना की और उसे मंच के पास बुलाकर चित्र स्वीकार किया। इस दौरान पूरी सभा तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठी।

यह युवक सूरत के रांदेर क्षेत्र में रहने वाला देव पटेल है, जो कक्षा 12 कॉमर्स का छात्र है। देव ने केवल पेंसिल और रबर की मदद से प्रधानमंत्री मोदी का विशाल पोर्ट्रेट तैयार किया है। इस चित्र को बनाने में उसे करीब एक वर्ष का समय लगा।

देव ने बताया कि कोरोना काल के दौरान उन्हें प्रधानमंत्री मोदी का चित्र बनाने का विचार आया था। मोदी के व्यक्तित्व, कार्यशैली और ऊर्जा से प्रेरित होकर उन्होंने ऐसा चित्र बनाने का संकल्प लिया, जिसमें उनकी सकारात्मक ऊर्जा झलकती हो। उन्होंने कहा कि चित्र तैयार होने के बाद उनकी इच्छा थी कि इसे स्वयं प्रधानमंत्री को भेंट करें, लेकिन यह आसान नहीं था।

देव के अनुसार प्रधानमंत्री तक यह चित्र पहुंचाने के लिए उन्होंने करीब दो वर्षों तक प्रयास किया। कई लोगों से संपर्क किया और सिफारिशें भी कराईं। लेकिन उसकी मंशा तब पूरी हुई जब उसकी मुलाकात सूरत शहर भाजपा उपाध्यक्ष रौनक बहन ध्रुव से हुई और उन्होंने उसे शहर भाजपा प्रमुख परेश पटेल से मिलाया और शहर प्रमुख उसकी इस कला से प्रभावित हुए और आखिरकार सूरत के कार्यक्रम में उसे प्रवेश मिला और उसकी वर्षों की प्रतीक्षा पूरी हो गई।

जनसभा के दौरान जब प्रधानमंत्री मोदी का ध्यान चित्र पर गया तो उन्होंने संबोधन के बीच ही युवक की प्रशंसा की और चित्र स्वीकार करते हुए उसे उज्ज्वल भविष्य के लिए आशीर्वाद दिया।

सम्मान मिलने के बाद भावुक देव पटेल ने कहा कि किसी सामान्य परिवार के युवक के लिए इससे बड़ा सौभाग्य नहीं हो सकता कि देश का प्रधानमंत्री उसकी कला को पहचान दे। उन्होंने कहा कि यह पल उनके पूरे जीवन की सबसे बड़ी प्रेरणा बन गया है। “देश के लिए वे प्रधानमंत्री हैं, लेकिन मेरे लिए ऊर्जा के पावरहाउस हैं। उनसे मिला यह सम्मान मुझे जीवनभर आगे बढ़ने की प्रेरणा देता रहेगा,”।

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हिन्दुस्थान समाचार / यजुवेंद्र दुबे