मेदिनीपुर मेडिकल कॉलेज के चिकित्सकों की मानवीय पहल, सफल ऑपरेशन कर मरीज को दुर्लभ बीमारी से दिलाई मुक्ति
मेदिनीपुर, 26 फ़रवरी (हि. स.)। मेदिनीपुर मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में एक दुर्लभ हर्निया का सफल ऑपरेशन कर चिकित्सकों ने बुधवार शाम बड़ी उपलब्धि हासिल की है। मरीज को ‘राइट पैराडुओडेनल हर्निया विद ऑब्स्ट्रक्शन’ नामक बीमारी थी, जिसे बेहद दुर्लभ माना जाता है।
इस बीमारी के सामान्य लक्षणों में तेज पेट दर्द, उल्टी, पेट फूलना और पेट में गांठ जैसी समस्या शामिल है। इन्हीं लक्षणों से पीड़ित बेलदा निवासी 46 वर्षीय एक महिला निजी नर्सिंग होम के चक्कर लगा रही थीं। एक ओर असहनीय दर्द, दूसरी ओर ऑपरेशन का खर्च वहन करने में परिवार असमर्थ था।
ऐसी स्थिति में परिवार ने अस्पताल के मुख्य सर्जन डॉ. सुदीप्त चटर्जी से संपर्क किया। मरीज की जांच के बाद चिकित्सकों ने तत्काल ऑपरेशन करने का निर्णय लिया।
मुख्य सर्जन डॉ. सुदीप्त चटर्जी ने बताया कि इस बीमारी का पता चलते ही तत्काल सर्जरी जरूरी होती है। अन्य कोई उपचार प्रभावी नहीं है। समय पर ऑपरेशन न होने पर आंत में सड़न होकर जान का खतरा बढ़ सकता है।
डॉ. सुदीप्त के नेतृत्व में सहायक सर्जन डॉ. सुप्रतिम चाकी, डॉ. अंकन कर्मकार, डॉ. अमर्त्य, डॉ. देव शंकर तथा एनेस्थेटिस्ट डॉ. देवाशीष भड़ की टीम ने 16 फरवरी को मरीज को भर्ती करने के बाद 18 फरवरी को लगभग ढाई घंटे तक चले जटिल ऑपरेशन को सफलतापूर्वक अंजाम दिया।
बुधवार शाम विस्तृत जांच के बाद डॉक्टरों ने ऑपरेशन को पूरी तरह सफल घोषित किया। फिलहाल मरीज की स्थिति स्थिर और संतोषजनक है। वह सामान्य रूप से भोजन कर रही हैं और चल-फिर भी पा रही हैं। चिकित्सकों की योजना है कि दो-तीन दिनों के भीतर उन्हें अस्पताल से छुट्टी दे दी जाएगी और वह अपने घर बेलदा लौट सकेंगी।
अस्पताल की इस उल्लेखनीय सफलता से चिकित्सक दल में उत्साह का माहौल है। वहीं, परिजनों की आंखों में राहत साफ झलक रही है। मरीज के एक परिजन ने भावुक होकर कहा कि हमलोग आर्थिक रूप से बहुत परेशान थे। निजी अस्पताल में इलाज कराना संभव नहीं था। यहां के डॉक्टरों ने न सिर्फ सफल ऑपरेशन किया, बल्कि हमें नया जीवन दिया है। हम उनके सदैव आभारी रहेंगे।
चिकित्सकों के अनुसार, जागरूकता और समय पर उपचार—इन दोनों के माध्यम से ऐसे दुर्लभ रोगों में जीवन बचाया जा सकता है। मेदिनीपुर के इस सरकारी अस्पताल की सफलता न केवल एक मरीज के स्वस्थ होने की कहानी है, बल्कि सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवाओं पर बढ़ते भरोसे का भी सशक्त संदेश है।
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हिन्दुस्थान समाचार / अभिमन्यु गुप्ता