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छह महीने बाद ‘हस्ती’ को मिला मां-बाप का प्यार, कोटक दंपति ने लिया गोद, पुलिसकर्मी हुए भावुक

 






सूरत, 31 मई (हि.स.)। पिछले वर्ष दिसंबर में सूरत के डिंडोली क्षेत्र के डेलाडवा तालाब के पास लावारिस अवस्था में मिली नवजात बच्ची ‘हस्ती’ को आखिरकार नया परिवार मिल गया है। सूरत पुलिस द्वारा प्यार से बच्ची को ‘हस्ती’ नाम दिया गया था। इस बच्ची को मुंबई के मनीष और दीप्ती कोटक दंपति ने गोद लिया है। गोद लेने की प्रक्रिया के दौरान भावुक माहौल देखने को मिला और उपस्थित लोगों की आंखें नम हो गईं।

छह दिसंबर 2025 को डिंडोली-डेलाडवा तालाब के निकट एक नवजात बच्ची लावारिस अवस्था में मिली थी। सूचना मिलते ही सूरत पुलिस ने बच्ची को सुरक्षित बचाकर आश्रय दिलाया। इसके बाद उसकी चिकित्सा, देखभाल और कानूनी प्रक्रियाएं पूरी की गईं। बच्ची के प्रति विशेष स्नेह रखते हुए सूरत पुलिस ने उसका नाम ‘हस्ती’ रखा था। समय के साथ वह पूरे पुलिस परिवार की लाडली बन गई।

शनिवार को कतारगाम स्थित बालाश्रम में आयोजित गोद लेने की प्रक्रिया के दौरान सूरत पुलिस आयुक्त अनुपम सिंह गहलोत उनकी पत्नी संध्या गहलोत, जिला कलेक्टर तेजस परमार सहित कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे।

सभी कानूनी औपचारिकताएं पूरी होने के बाद ‘हस्ती’ को मुंबई के मनीष कोटक और दीप्ती कोटक को सौंप दिया गया। यह पल वहां मौजूद पुलिसकर्मियों, बालाश्रम के कर्मचारियों और अतिथियों के लिए बेहद भावुक रहा।

10 साल बाद माता-पिता बनने का सपना हुआ पूरा

मुंबई निवासी मनीष और दीप्ती कोटक पिछले 10 वर्षों से संतान की प्रतीक्षा कर रहे थे। लंबे इंतजार के बाद ‘हस्ती’ के उनके परिवार में आने से उनके जीवन में नई खुशियां आई हैं। दंपति ने बच्ची को भरपूर प्रेम, सुरक्षा और बेहतर भविष्य देने का संकल्प लिया।

एक ही दिन तीन बच्चियों को मिला नया परिवार

विशेष बात यह रही कि कतारगाम स्थित शिशु मंदिर में शनिवार को केवल ‘हस्ती’ ही नहीं, बल्कि कुल तीन बच्चियों को अलग-अलग परिवारों ने गोद लिया। पुणे निवासी इंजीनियर कौस्तुभ गारोले और उनकी पत्नी अमृता गारोले ने एक बच्ची को गोद लिया, जबकि भुज के व्यवसायी जिगर कोटक और उनकी पत्नी विश्वा कोटक ने भी एक बच्ची को अपना परिवार दिया।

इस अवसर पर पुलिस आयुक्त अनुपम सिंह गहलोत ने समाज से अपील करते हुए कहा कि नवजात बच्चों को कचरे के ढेर, सड़कों या सुनसान स्थानों पर छोड़ने के बजाय सरकारी शिशु गृहों में सुरक्षित सौंपा जाना चाहिए, ताकि उनका बेहतर पालन-पोषण और भविष्य सुनिश्चित हो सके।

“हस्ती हमारी बेटी जैसी थी”

सूरत पुलिस कमिश्नर अनुपम सिंह गहलोत और डिंडोली पुलिस टीम भी ‘हस्ती’ की विदाई के समय भावुक हो गई। उन्होंने कहा, “जब यह बच्ची हमें मिली थी, तभी से उससे भावनात्मक जुड़ाव हो गया था। वह हमारे लिए सिर्फ एक केस नहीं, बल्कि हमारी अपनी बेटी जैसी थी। आज उसे एक प्यार करने वाला परिवार मिला है, यह हमारे लिए गर्व और खुशी की बात है।”

उन्होंने यह भी कहा कि भले ही ‘हस्ती’ अब मुंबई चली गई हो, लेकिन उसके स्वास्थ्य, शिक्षा और उज्ज्वल भविष्य को लेकर सूरत पुलिस परिवार हमेशा उसके संपर्क में रहेगा।

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हिन्दुस्थान समाचार / यजुवेंद्र दुबे