पेरंबलूर की जिला कलेक्टर ने दो वर्षीय बेटे का कराया आंगनवाड़ी में दाखिला
पेरंबलूर, 10 जुलाई (हि.स.)। तमिलनाडु के पेरंबलूर की जिला कलेक्टर शरण्या अरी ने अपने दो वर्षीय पुत्र आद्विक का दाखिला आंगनवाड़ी केंद्र में कराकर सरकारी बाल देखभाल व्यवस्था के प्रति भरोसा जताया है। जहां अधिकांश वरिष्ठ अधिकारी और संपन्न परिवार अपने बच्चों को निजी शिक्षण संस्थानों में भेजना पसंद करते हैं, वहीं कलेक्टर के इस निर्णय की जिले में व्यापक चर्चा हो रही है और सोशल मीडिया पर भी इसकी सराहना की जा रही है।
शरण्या अरी ने एक जून को पेरंबलूर के जिला कलेक्टर के रूप में पदभार ग्रहण किया था। कार्यभार संभालने के बाद से उन्होंने जिले में विभिन्न सरकारी योजनाओं और संस्थानों का लगातार निरीक्षण किया है। इस दौरान उन्होंने दिव्यांग बच्चों के एकीकृत सेवा केंद्र, कोट्टराई जलाशय परियोजना, सरकारी विद्यालयों, पुल निर्माण कार्यों, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों तथा आंगनवाड़ी केंद्रों का दौरा कर वहां उपलब्ध कराई जा रही सुविधाओं और सेवाओं की समीक्षा की।
इसी क्रम में दो जून को उन्होंने पेरंबलूर पंचायत संघ के अंतर्गत एसनई पंचायत स्थित एक आंगनवाड़ी केंद्र का निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान उन्होंने बच्चों को दिए जाने वाले भोजन की गुणवत्ता परखने के लिए स्वयं भोजन चखा और अभिभावकों से बच्चों की देखभाल, कर्मचारियों के व्यवहार तथा केंद्र की कार्यप्रणाली के बारे में जानकारी ली।
कलेक्टर ने अभिभावकों से पूछा कि बच्चों को केंद्र में ही भोजन कराया जाता है या वे भोजन घर ले जाते हैं? इस पर अभिभावकों ने बताया कि बच्चों को आंगनवाड़ी में ही भोजन कराया जाता है और भोजन के बाद वे कुछ समय वहीं विश्राम भी करते हैं। उन्होंने महिलाओं से उनके रोजगार के बारे में भी जानकारी ली। कुछ महिलाओं ने बताया कि वे खेतों में मजदूरी करती हैं, जबकि अन्य गृहिणी हैं। इस दौरान कलेक्टर ने कहा कि जब बच्चे सुरक्षित वातावरण में केंद्र में रहते हैं तो अभिभावक भी निश्चिंत होकर अपने काम पर ध्यान दे सकते हैं।
बातचीत के दौरान शरण्या अरी ने अभिभावकों से कहा कि वह भी अपने बेटे को आंगनवाड़ी केंद्र में भेजने की योजना बना रही हैं। इस पर वहां मौजूद अभिभावकों ने उनका स्वागत करते हुए कहा कि उनके बच्चे की भी अन्य बच्चों की तरह देखभाल की जाएगी।
निरीक्षण के दौरान कलेक्टर ने बच्चों के साथ समय बिताया और आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं से भोजन, पोषण तथा बच्चों की दैनिक गतिविधियों की जानकारी ली। उन्होंने बच्चों को समय पर भोजन उपलब्ध कराने और उनकी समुचित देखभाल सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए। इस दौरान का उनका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। जहां अनेक लोगों ने उनके व्यवहार और सरकारी सेवाओं के प्रति विश्वास की सराहना की, वहीं कुछ लोगों ने इसे केवल औपचारिक घोषणा बताया।
बाद में शरण्या अरी ने अपने कथन को अमल में लाते हुए दो वर्षीय पुत्र आद्विक का पेरंबलूर पंचायत संघ के अंतर्गत नोच्चियम पंचायत के विलामुथूर स्थित सरकारी आंगनवाड़ी केंद्र में दाखिला करा दिया। इसके बाद उनका यह निर्णय जिले में चर्चा का विषय बन गया।
हाल ही में क्षेत्र के दौरे के दौरान जिला कलेक्टर विलामुथूर आंगनवाड़ी केंद्र भी पहुंचीं। उन्होंने आंगनवाड़ी कार्यकर्ता से अपने पुत्र की दिनचर्या, व्यवहार, सीखने की गतिविधियों और केंद्र में उसके समायोजन के बारे में जानकारी ली। इसके अलावा उन्होंने अन्य बच्चों से भी बातचीत की, उनके साथ समय बिताया तथा केंद्र में उपलब्ध सुविधाओं और बच्चों की देखभाल की व्यवस्था का भी निरीक्षण किया।
जिला कलेक्टर के इस निर्णय पर स्थानीय लोगों और सोशल मीडिया पर सकारात्मक प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। लोगों का कहना है कि जब वरिष्ठ अधिकारी स्वयं सरकारी संस्थानों का उपयोग करते हैं तो इससे आम नागरिकों का भरोसा बढ़ता है। वहीं, कुछ लोगों का मानना है कि ऐसे कदम सरकारी संस्थानों में सेवाओं की गुणवत्ता बनाए रखने और उनमें सुधार के प्रति प्रशासन की प्रतिबद्धता का भी संदेश देते हैं।
--------------
हिन्दुस्थान समाचार / Dr. Vara Prasada Rao PV