भारत की वनस्पति विरासत संवार रहा पतंजलि, 27 हजार से अधिक नमूने संरक्षित
हरिद्वार, 29 सितंबर (हि.स.)। भारत की समृद्ध वनस्पति विरासत के वैज्ञानिक दस्तावेजीकरण और संरक्षण की दिशा में पतंजलि रिसर्च फाउंडेशन लगातार काम कर रहा है। फाउंडेशन के वैज्ञानिकों ने देश के विभिन्न हिस्सों में पादप सर्वेक्षण करते हुए अब तक 27 हजार से अधिक पादप नमूनों को पतंजलि पादपालय (हर्बेरियम) में संरक्षित किया है। वहीं, विभिन्न राज्यों से 100 से अधिक नए पादप अभिलेख दर्ज किए गए हैं।
आचार्य बालकृष्ण के नेतृत्व और मार्गदर्शन में पीआरएफ के वैज्ञानिक उत्तराखंड, हरियाणा, अरुणाचल प्रदेश, बिहार, उत्तर प्रदेश, झारखंड और पश्चिम बंगाल समेत विभिन्न क्षेत्रों में पादप सर्वेक्षण और अनुसंधान कर रहे हैं। इन सर्वेक्षणों के दौरान सामने आए नए पादप अभिलेखों को देश के वनस्पति अभिलेखों में दर्ज करने के साथ ही क्यू बॉटनिकल गार्डन के डिजिटल डेटाबेस और ऑनलाइन पोर्टल पर भी स्थान मिला है।
राष्ट्रपति भवन में 620 से अधिक पौधों का रिकॉर्ड
पीआरएफ के वैज्ञानिकों ने राष्ट्रपति भवन, नई दिल्ली में पहली बार व्यापक पादप सर्वेक्षण किया। इस दौरान 620 से अधिक पौधों का रिकॉर्ड तैयार किया गया। इस कार्य के आधार पर फ्लोरा ऑफ राष्ट्रपति भवन और मेडिसिनल प्लांट्स ऑफ राष्ट्रपति भवन नामक दो पुस्तकों का प्रकाशन किया गया। 2 नवंबर 2025 को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने स्वामी रामदेव और आचार्य बालकृष्ण की मौजूदगी में इन पुस्तकों का विमोचन किया। इसके साथ दिल्ली के पादपों की चेकलिस्ट भी प्रकाशित की गई।
गोमुख से गंगासागर तक किया सर्वेक्षण
नमामि गंगे परियोजना के अंतर्गत वर्ष 2023-24 में पीआरएफ के वैज्ञानिकों ने गोमुख से गंगासागर तक गंगा के दोनों किनारों पर पादप सर्वेक्षण किया। इस दौरान विभिन्न क्षेत्रों की वनस्पतियों का दस्तावेजीकरण किया गया और कई पादपों को संबंधित राज्यों के वनस्पति अभिलेखों में दर्ज किया गया।
अरुणाचल प्रदेश के पाके-कसांग जिले के सिजोसा क्षेत्र में भी सर्वेक्षण किया गया। वहीं हरियाणा के मोरनी हिल्स और उत्तराखंड के जनजातीय क्षेत्रों में किए गए सर्वेक्षण के दौरान स्थानीय स्तर पर उपयोग किए जाने वाले कई महत्वपूर्ण पादपों का भी दस्तावेजीकरण किया गया।
2024 में नई पादप प्रजाति का रिकॉर्ड
पीआरएफ के अनुसंधान कार्य के दौरान वर्ष 2024 में कैम्पेन्यूला डेन्सीसिलिएटा को नई पादप प्रजाति के रूप में दुनिया के सामने दर्ज किए जाने का उल्लेख किया गया है। इसके अलावा विभिन्न राज्यों से प्राप्त कई अन्य संभावित नई पादप प्रजातियों पर भी संस्थान में अध्ययन चल रहा है।
अष्टवर्ग के पादपों पर भी किया शोध
आचार्य बालकृष्ण ने अष्टवर्ग में वर्णित पादपों की खोज और पहचान के साथ हर्बेरियम तैयार करने का कार्य किया। इसके आधार पर अष्टवर्ग रहस्य पुस्तक का हिंदी और अंग्रेजी में प्रकाशन भी किया गया। यह कार्य औषधीय महत्व वाले पादपों के वैज्ञानिक दस्तावेजीकरण की दिशा में महत्वपूर्ण प्रयास के रूप में प्रस्तुत किया गया है।
हरिद्वार की वनस्पतियों का भी हो रहा दस्तावेजीकरण
स्वामी रामदेव के संरक्षण और आचार्य बालकृष्ण के मार्गदर्शन में हरिद्वार जिले का पादप सर्वेक्षण भी जारी है। इसके तहत फ्लोरा ऑफ हरिद्वार तैयार करने का कार्य प्रगति पर है। सर्वेक्षण के दौरान सामने आए कई पादपों को उत्तराखंड के वनस्पति अभिलेख में भी दर्ज किया गया है।
आचार्य बालकृष्ण ने कहा कि नई पादप प्रजातियों और नए अभिलेखों की खोज केवल वैज्ञानिक उपलब्धि नहीं, बल्कि जैव विविधता संरक्षण, औषधीय पौधों की पहचान, पर्यावरणीय अध्ययन और भविष्य के वानस्पतिक अनुसंधान की आधारशिला है। प्रत्येक नई खोज भारत की प्राकृतिक विरासत को वैज्ञानिक रूप से समृद्ध करती है और आने वाली पीढ़ियों के लिए स्थायी ज्ञान-संपदा तैयार करती है।
हिन्दुस्थान समाचार / डॉ.रजनीकांत शुक्ला