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सात समंदर पार जर्मनी से आए दूल्हे ने लिए फिरोजाबाद की दुल्हन संग सात फेरे

 






फिरोजाबाद, 20 फ़रवरी (हि.स.)। जिले में हुई एक अनोखी अंतरराष्ट्रीय शादी लोगों के बीच चर्चा का विषय बनी हुई है। सात समुंदर पार जर्मनी से आए दूल्हे ने फिरोजाबाद की दुल्हन के साथ हिंदू रीति-रिवाज से विवाह रचाया। इस ऐतिहासिक विवाह के गवाह सैकड़ों लोग बने, वहीं विदेश से आए मेहमान भी भारतीय संस्कृति और परंपराओं में सराबोर नजर आए।

जर्मनी निवासी दूल्हा गुस्ताव और फिरोजाबाद की युवती खुशी ने पूरे विधि-विधान के साथ सात फेरे लेकर एक-दूसरे को जीवनसाथी स्वीकार किया। दूल्हा भारतीय परिधान शेरवानी और साफा पहने हुए थे, जबकि दुल्हन खुशी लाल जोड़े में बेहद आकर्षक लग रही थीं। खास बात यह रही कि दूल्हे ने अपने हाथों में मेहंदी से पत्नी का नाम भी लिखवाया था जो समारोह में मौजूद लोगों के लिए आकर्षण का केंद्र बना रहा। विवाह समारोह में वरमाला, फेरे और विदाई सहित सभी रस्में भारतीय परंपरा के अनुसार सम्पन्न कराई गईं, लेकिन इसमें जर्मन संस्कृति की झलक भी देखने को मिली।

विदेशी मेहमानों ने भारतीय शादी की रस्मों को बड़े उत्साह से देखा और उनमें भागीदारी भी की। भाषा की समस्या न हो, इसके लिए चार अनुवादकों की व्यवस्था की गई थी। विदेशी मेहमानों ने भारतीय संस्कृति की सराहना करते हुए कहा कि भारत एक विशाल और विविधताओं से भरा देश है। यहां के लोगों का अपनापन और मेहमाननवाजी उन्हें बेहद पसंद आई। खासकर शिकोहाबाद जैसे छोटे शहर की आत्मीयता ने उन्हें प्रभावित किया। शादी समारोह में स्थानीय लोग भी बड़ी संख्या में शामिल हुए और नवविवाहित जोड़े को आशीर्वाद दिया। दोनों परिवारों ने एक-दूसरे के साथ खुशियां साझा कीं। गुस्ताव और खुशी ने एक-दूसरे का हाथ थामकर नए जीवन की शुरुआत की।

दुल्हन की चाची ज्योति ने शुक्रवार काे बताया कि खुशी जयपुर में एक जर्मन कंपनी में कार्यरत है। वहीं गुस्ताव का आना-जाना हुआ और दोनों की पहली मुलाकात हुई, जो बाद में दोस्ती और फिर प्रेम संबंध में बदल गई। दूल्हे गुस्ताव ने बताया कि वर्ष 2023 में वह भारत घूमने आए थे। इस दौरान राजस्थान, दिल्ली और आगरा की यात्रा की। जयपुर के एक होटल में ठहरने के दौरान स्विमिंग पूल के पास उनकी मुलाकात खुशी से हुई, जो धीरे-धीरे रिश्ते में बदल गई।

फिरोजाबाद में हुआ यह अंतरराष्ट्रीय विवाह लोगों के बीच चर्चा का विषय होने के साथ ही आकर्षण का केंद्र भी रहा।

हिन्दुस्थान समाचार / कौशल राठौड़