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रजोनिवृत्ति के बाद अस्थि क्षय की रोकथाम पर बीएचयू में आयुर्वेदिक शोध, कैंडी के रूप में विकसित की गई नई औषधि

 




वाराणसी, 05 जून (हि.स.)। काशी हिंदू विश्वविद्यालय में रजोनिवृत्ति (मेनोपॉज) के बाद महिलाओं में होने वाले अस्थि क्षय (ऑस्टियोपोरोसिस) की रोकथाम को लेकर एक महत्वपूर्ण आयुर्वेदिक शोध किया गया है। इस शोध के तहत एक नवीन आयुर्वेदिक औषधि को कैंडी के रूप में विकसित किया गया है, ताकि महिलाओं के लिए इसका सेवन आसान और स्वीकार्य बनाया जा सके। इसी औषधीय योग का एक वटी (टैबलेट) स्वरूप भी तैयार किया गया है।

यह शोध बीएचयू के चिकित्सा विज्ञान संस्थान के आयुर्वेद संकाय में काय चिकित्सा विभाग की एमडी (आयुर्वेद) तृतीय वर्ष की शोध छात्रा डॉ. कनिका नैनवाल ने किया है। शोध कार्य रसशास्त्र एवं भैषज्य कल्पना विभाग के प्रोफेसर प्रो. आनंद चौधरी के मार्गदर्शन में तथा डॉ. रोहित शर्मा और डॉ. मीरा अन्तिवाल के सह-पर्यवेक्षण में संपन्न हुआ। हाल ही में शोधार्थी ने अपना शोध प्रबंध विश्वविद्यालय में प्रस्तुत किया है।

डॉ. नैनवाल के अनुसार, शोध का उद्देश्य रजोनिवृत्ति के बाद महिलाओं में हड्डियों की कमजोरी और ऑस्टियोपोरोसिस जैसी समस्याओं की रोकथाम के लिए एक प्रभावी, सुरक्षित एवं सहज रूप से स्वीकार्य आयुर्वेदिक औषधि विकसित करना था। औषधीय योग में शतावरी, आंवला, रागी (फिंगर मिलेट), मुक्ताशुक्ति भस्म और गुड़ जैसे पोषक एवं अस्थि-पोषक तत्वों का उपयोग किया गया।

नैदानिक अध्ययन सर सुंदरलाल चिकित्सालय के आयुर्वेद विंग में दो माह तक 30 रजोनिवृत्त महिलाओं पर तीन समानांतर समूहों में किया गया। अध्ययन के दौरान अस्थिक्षय से जुड़े आयुर्वेदिक लक्षणों के साथ-साथ सीरम कैल्शियम, बोन मिनरल डेंसिटी (बीएमडी), सीरम अल्कलाइन फॉस्फेटेज और सीरम एल्ब्यूमिन जैसे जैव-रासायनिक मानकों का भी मूल्यांकन किया गया।

शोध के परिणामों में प्रतिभागियों के सीरम कैल्शियम स्तर में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई। इसके अलावा अस्थिक्षय से संबंधित लक्षणों में 75 प्रतिशत तक सुधार देखने को मिला। अस्थि एवं संधि पीड़ा, कमजोरी, दैनिक कार्यों में होने वाली कठिनाइयों तथा बाल झड़ने जैसी समस्याओं में भी महत्वपूर्ण कमी पाई गई।

शोध के दौरान बोन मिनरल डेंसिटी में भी सकारात्मक परिवर्तन के संकेत मिले, हालांकि शोधकर्ताओं का मानना है कि अस्थि घनत्व पर इसके दीर्घकालिक प्रभावों के आकलन के लिए बड़े नमूने और लंबी अवधि वाले अध्ययनों की आवश्यकता होगी।

डॉ. नैनवाल ने बताया कि ऑस्टियोपोरोसिस विश्वभर में एक गंभीर स्वास्थ्य चुनौती बनता जा रहा है। रजोनिवृत्ति के बाद महिलाओं में एस्ट्रोजन हार्मोन की कमी के कारण इस रोग का खतरा और इसकी प्रगति अधिक तेज हो जाती है। उनका मानना है कि भविष्य में बड़े स्तर पर किए जाने वाले अध्ययन इस आयुर्वेदिक योग की प्रभावशीलता को और अधिक वैज्ञानिक आधार प्रदान कर सकते हैं।

हिन्दुस्थान समाचार / श्रीधर त्रिपाठी