बीएचयू के वैज्ञानिकों ने मूत्र से मूत्राशय कैंसर की शुरुआती पहचान के लिए विकसित की नई तकनीक
—मूत्र एक्सोसोमल माइक्रोआरएनए को कैंसर पहचान के लिए संवेदनशील बायोमार्कर के रूप में पहचाना गया
वाराणसी, 06 मई (हि.स.)। काशी हिन्दू विश्वविद्यालय (बीएचयू) के विज्ञान संस्थान के जैव प्रौद्योगिकी विभाग के शोधकर्ताओं ने चिकित्सा विज्ञान संस्थान के यूरोलॉजी विभाग के सहयोग से मूत्राशय कैंसर (यूबीसी) की प्रारंभिक पहचान के लिए एक नई गैर-आक्रामक मूत्र आधारित तकनीक विकसित की है। यह अध्ययन स्कूल ऑफ बायोटेक्नोलॉजी के डॉ. समरेन्द्र कुमार सिंह तथा यूरोलॉजी विभाग, आईएमएस के डॉ. ललित कुमार के नेतृत्व में, डॉ. गरिमा सिंह, डॉ. अनिल कुमार, सृष्टी भट्टाचार्जी सहित शोध दल के महत्वपूर्ण योगदान के साथ सम्पन्न हुआ है।
यह शोध अंतरराष्ट्रीय पत्रिका नेचर स्प्रिंगर समूह की बीएमसी यूरोलाजी (2026) में प्रकाशित हुआ है। शोधकर्ताओं के अनुसार मूत्र में उपस्थित एक्सोसोमल माइक्रोआरएनए कैंसर की पहचान के लिए अत्यंत स्थिर और विश्वसनीय बायोमार्कर के रूप में कार्य करते हैं। यह नई तकनीक वर्तमान जांच विधियों की सीमाओं को दूर करती है, जहां सिस्टोस्कोपी आक्रामक होती है और यूरिन साइटोलॉजी की संवेदनशीलता कम होती है। इस शोध में तीन माइक्रोआरएनए के संयोजन (पैनल) ने 90 फीसद से अधिक संवेदनशीलता प्रदर्शित की, जो इसे मूत्राशय कैंसर के लिए एक प्रभावी गैर-आक्रामक निदान उपकरण बनने की दिशा में अत्यंत संभावनाशील बनाता है। अध्ययन में यह भी पाया गया कि ये बायोमार्कर कैंसर के विभिन्न चरणों के अनुसार अलग-अलग स्तर पर व्यक्त होते हैं, जिससे न केवल प्रारंभिक पहचान बल्कि रोग की प्रगति की निगरानी भी संभव हो सकती है।
प्रमुख अन्वेषक डॉ. समरेन्द्र कुमार सिंह ने बताया कि यह अध्ययन कैंसर निदान के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण कदम है। केवल मूत्र के नमूने से कैंसर की पहचान भविष्य में जांच प्रक्रिया को अधिक सरल और रोगी-अनुकूल बना सकती है। उन्होंने बताया कि माइक्रोआरएनए आधारित यह तकनीक न केवल कैंसर की पहचान में बल्कि उसके विकास को समझने में भी सहायक है, जिससे बेहतर उपचार रणनीतियां विकसित की जा सकती हैं। डॉ. ललित कुमार (सह-प्रमुख अन्वेषक एवं यूरोलॉजिस्ट) के अनुसार यह अध्ययन मूत्राशय कैंसर के गैर-आक्रामक और रोगी-अनुकूल निदान की दिशा में एक आशाजनक बदलाव का संकेत देता है। इस प्रकार की खोजें कैंसर निदान के क्षेत्र में क्रांतिकारी परिवर्तन ला सकती हैं और समाज को व्यापक रूप से लाभान्वित कर सकती हैं।
हिन्दुस्थान समाचार / श्रीधर त्रिपाठी