जल संसाधन दिवस : जल संरक्षण ही घटते जल स्रोत का समाधान
वाराणसी, 10 अप्रैल (हि. स.) l भारत में हर साल 10 अप्रैल को जल संसाधन दिवस मनाया जाता है, जिसका उद्देश्य जल संरक्षण, पानी की बर्बादी रोकने और वर्षा जल संचयन के प्रति लोगों को जागरूक करना है। यह दिन प्राकृतिक जल संसाधनों के सतत प्रबंधन और भावी पीढ़ियों के लिए पानी बचाने के संकल्प का अवसर है।
सह संयोजक गंगा विचार मंच काशी प्रांत, गंगा सेवक राजेश शुक्ल कहते हैं कि जल संसाधन दिवस सिर्फ एक तारीख नहीं बल्कि हमें स्मरण दिलाने का दिन है कि जल के बिना जीवन की कल्पना भी संभव नहीं है। जल संरक्षण, इसके उचित प्रबंधन और प्राकृतिक जल स्रोतों को दूषित होने से बचाने के प्रति जागरूकता फैलाने के लिए ही जल संसाधन दिवस मनाया जाता है। हम रोजमर्रा की जिंदगी में जल का इस्तेमाल तो करते हैं लेकिन अक्सर उसकी अहमियत को नजरअंदाज कर देते हैं जो भविष्य के लिए संकट पैदा कर सकता है। उन्होंने कहा कि भले ही पृथ्वी लगभग 71 प्रतिशत सतह जल से ढकी हुई है l लेकिन उसमें से केवल 3 प्रतिशत ही ऐसा मीठा जल है जो इंसान पी सकता है या उपयोग कर सकता है।
वहीं, अगर हम भारत की स्थिति देखें तो आंकड़े और गंभीर हो जाते हैं। भारत का हिस्सा दुनिया के कुल भूभाग में सिर्फ 2.45 प्रतिशत है लेकिन हमारी आबादी दुनिया की लगभग 16 प्रतिशत है। इसके बावजूद हमारे पास दुनिया के जल का केवल 4 प्रतिशत हिस्सा है। तेजी से बढ़ती जनसंख्या, जल स्रोतों का अत्यधिक दोहन और उनका असमान वितरण भारत में जल की उपलब्धता को लगातार कम कर रहा है। नदियां, झीलें, तालाब और जलाशय, हमारे लिए मुख्य जल स्रोत हैं। मानसून और हिमालय की बर्फ के पिघलने से ये नदियां जीवनदान देती हैं।
पूरे देश की नदियों में औसत वार्षिक प्रवाह लगभग 1,869 घन किलोमीटर है, लेकिन इसका सिर्फ 37 प्रतिशत ही हम प्रभावी रूप से इस्तेमाल कर पाते हैं। जलवायु परिवर्तन, तीव्र शहरीकरण और औद्योगीकरण की बढ़ती चुनौतियों के साथ, कुशल जल संरक्षण विधियों की आवश्यकता सर्वोपरि हो गई है, विशेष रूप से भारत जैसे देश में, जहाँ जल संकट एक गंभीर समस्या है। हम जल संरक्षण के महत्व पर गहराई से विचार करके और इस बहुमूल्य संसाधन को संरक्षित करने के लिए भारत में अपनाई जाने वाली विभिन्न विधियां अपना सकते है l
वर्षा जल संचयन : भूजल स्तर में सुधार के लिए वर्षा के पानी को संग्रहित कर उसे भूमिगत जल स्तर बढ़ाने या अन्य उपयोगों के लिए संरक्षित किया जा सकता है। जल का पुनः उपयोग (रीयूज) : घरेलू या औद्योगिक उपयोग के बाद पानी को शुद्ध कर पुनः उपयोग में लाना। इससे पानी की खपत कम होती हैl
जल की बर्बादी रोकना : नल, पाइपलाइन आदि में रिसाव को रोकना और पानी का विवेकपूर्ण उपयोग करना। सिंचाई के आधुनिक तरीके अपनाना : ड्रिप सिंचाई और स्प्रिंकलर जैसी तकनीकों का उपयोग कर पानी की बचत की जा सकती है। पेड़ जल चक्र को संतुलित रखते हैं और वर्षा को बढ़ावा देते हैं, जिससे जल संरक्षण में मदद मिलती है। जल स्रोतों को प्रदूषित होने से बचाना ताकि जल स्रोत स्वच्छ और उपयोगी बने रहें। इन उपायों को अपनाकर हम जल संरक्षण कर सकते हैं और जल संकट से बच सकते हैंl
____________________
हिन्दुस्थान समाचार / श्रीधर त्रिपाठी