अंग की लोक संस्कृति का महापर्व 'विषहरी पूजा' कल से, चंपानगर मुख्य मंदिर समेत तमाम थानों में तैयारियां पूरी
भागलपुर, 16 अगस्त (हि.स.)। अंग क्षेत्र की प्राचीन लोक संस्कृति, आस्था और अटूट विश्वास का प्रतीक पांच दिवसीय मां विषहरी पूजा (मनसा पूजा) कल सोमवार से शुरू हो रही है। इसे लेकर शहरी और ग्रामीण इलाकों के सभी विषहरी मंदिरों को आकर्षक ढंग से सजाया गया है। डलिया चढ़ाने और मां के दर्शन के लिए श्रद्धालुओं में भारी उत्साह है।
पूजा का मुख्य केंद्र ऐतिहासिक और पौराणिक स्थल चंपानगर स्थित मां मनसा-विषहरी का मुख्य मंदिर है। मां बिहुला और बाला लखेंद्र की गाथा से जुड़े इस मंदिर में सोमवार की सुबह से ही विशेष अनुष्ठान शुरू हो जाएंगे। मंदिर समिति और जिला प्रशासन ने सुरक्षा, बैरिकेडिंग और कतारबद्ध दर्शन के लिए पुख्ता इंतजाम किए हैं। चंपानगर के अलावा मनसाहबजादी, भीखनपुर, परबत्ती, खंजरपुर, मंदरोजा और बरारी समेत विभिन्न शहरी और ग्रामीण इलाकों के मंदिरों में भी भव्य सजावट की गई है।
परंपरा के अनुसार, सोमवार को विभिन्न पूजा समितियों द्वारा भव्य कलश यात्रा और देवी विषहरी की प्रतिमाओं की शोभायात्रा निकाली जाएगी। इस दौरान पारंपरिक वाद्य यंत्रों (ढाक और झांझ) की गूंज से पूरा माहौल भक्तिमय हो जाएगा। ग्रामीण क्षेत्रों में भी इसे लेकर व्यापक उत्साह है, जहां लोग सामूहिक रूप से डलवा (दौरी) लेकर मंदिर पहुंचेंगे। विषहरी पूजा के दौरान अंग प्रदेश की प्रसिद्ध 'मंजूषा कला' की जीवंत झलक देखने को मिलती है। मंदिरों को मंजूषा पेंटिंग से सजाया गया है, जिसमें मां विषहरी के पांचों रूपों (जया, विषहरी, शामिलबारी, देव और दोतनी) तथा सती बिहुला की वीरता की कहानियां चित्रित हैं।
रात में विभिन्न स्थानों पर बिहुला-विषहरी के लोक नाट्य और गीतों का आयोजन होगा, जो देर रात तक श्रद्धालुओं को बांधे रखेगा। भीड़ को देखते हुए नगर निगम ने सभी पूजा स्थलों के आसपास विशेष सफाई, ब्लीचिंग पाउडर के छिड़काव और स्ट्रीट लाइट दुरुस्त करने का काम पूरा कर लिया है। पुलिस प्रशासन द्वारा चंपानगर मुख्य मंदिर और संवेदनशील चौराहों पर अतिरिक्त पुलिस बल और महिला पुलिस कर्मियों की तैनाती की गई है। सीसीटीवी कैमरों से भी असामाजिक तत्वों पर नजर रखी जाएगी।
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हिन्दुस्थान समाचार / बिजय शंकर