आरजी कर मेडिकल कॉलेज अस्पताल में दुर्लभ सर्जरी, घायल युवक के पैर का हुआ एलोग्राफ्ट ट्रांसप्लांटेशन
कोलकाता, 20 फ़रवरी (हि. स.)। सड़क दुर्घटना में दाहिने पैर की जांघ की हड्डी (फीमर) टूटकर चूर-चूर हो गई थी। कई बार ऑपरेशन के बावजूद घुटने के ठीक ऊपर फीमर का पुनर्निर्माण संभव नहीं हो पाया और घुटने के ऊपर से पैर काटने की नौबत आ गई थी। लगभग ढाई वर्ष की असफल चिकित्सा लड़ाई के बाद आखिरकार सफलता मिली।
कोलकाता के आरजी कर मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल ने अपने संसाधनों से 2.40 लाख खर्च कर शव से संरक्षित हड्डी के टुकड़े (एलोग्राफ्ट) को हैदराबाद से मंगाकर पीड़ित युवक के पैर में प्रत्यारोपित किया। मंगलवार को हुए इस सफल ऑपरेशन के बाद चिकित्सकों को उम्मीद है कि युवक फिर से सामान्य रूप से चल-फिर सकेगा। अस्पताल प्रशासन का दावा है कि पूर्वी भारत में इस तरह की एलोग्राफ्टिंग का यह पहला उदाहरण है।
अस्पताल सूत्रों के अनुसार, ट्रक की टक्कर में उत्तर 24 परगना के बीरा क्षेत्र के दिहाड़ी मजदूर रिजाउद्दीन मंडल (31) पैर खोने की स्थिति में पहुंच गए थे। वर्ष 2023 की दुर्घटना में डिस्टल फीमर हड्डी टूटकर त्वचा को चीरते हुए बाहर निकल आई थी और घुटने के जोड़ के पास हड्डी लगभग पूरी तरह नष्ट हो गई थी। मई में पहली सर्जरी में हड्डी जोड़ी गई, जून में प्लास्टिक सर्जरी कर मांसपेशी और त्वचा की मरम्मत हुई तथा अगस्त में फिर ऑपरेशन कर चलने की क्षमता बहाल करने का प्रयास किया गया, लेकिन लाभ नहीं हुआ। 2024 के जुलाई में एक और कोशिश भी विफल रही और चलना-फिरना लगभग असंभव हो गया।
सफल एलोग्राफ्ट करने वाले ऑर्थोपेडिक सर्जन सुनीत हाजरा ने बताया कि ऐसी स्थिति में दो ही विकल्प थे - एलोग्राफ्ट या पैर काटना। रोगी की कम उम्र को देखते हुए घुटना बचाने के लिए एलोग्राफ्ट से हड्डी पुनर्निर्माण का निर्णय लिया गया। एलोग्राफ्ट में शव से प्राप्त हड्डी या ऊतक को विशेष प्रक्रिया से संरक्षित कर दूसरे मरीज के शरीर में प्रत्यारोपित किया जाता है। जब मरीज की अपनी हड्डी से पुनर्निर्माण संभव नहीं होता, तब बड़े हड्डी दोष को भरने में यह प्रभावी विकल्प साबित होता है।
फ्रेश कैडावेरिक एलोग्राफ्ट बेहद महंगा और दुर्लभ होता है। ऐसे में अस्पताल प्रशासन की मदद से लगभग 2.40 लाख रुपये का ग्राफ्ट हैदराबाद से जुटाया गया। सीटी स्कैन के आधार पर थ्री-डी मॉडल तैयार कर संबंधित संस्था को भेजा गया, जिसके बाद आवश्यक परिस्थितियों में ग्राफ्ट तैयार कर कोलकाता लाया गया। मंगलवार को एलोग्राफ्ट फिक्सेशन की जटिल सर्जरी सफलतापूर्वक पूरी हुई। चिकित्सकों का मानना है कि इस पुनर्निर्माण से रिजाउद्दीन सामान्य जीवन में लौट सकेंगे और उनका घुटना पुनः सक्रिय हो सकेगा।
अस्पताल के सुपर सप्तर्षि चटर्जी ने कहा कि न केवल राज्य बल्कि पूरे पूर्वी भारत में ऐसा ऑपरेशन पहले नहीं हुआ। वहीं ऑर्थोपेडिक विभागाध्यक्ष संजय कुमार ने इस उपलब्धि के लिए ऑर्थोपेडिक और एनेस्थीसिया टीम को बधाई दी।
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हिन्दुस्थान समाचार / अभिमन्यु गुप्ता